एक एप्लीकेंट ने रेडिट पर भर्ती का खराब अनुभव शेयर किया। 'तुरंत जॉइन' की मांग करने वाली कंपनी का इंटरव्यूअर 2 बार नहीं आया। एक महीने बाद HR के फिर संपर्क करने से कंपनियों के दोहरे मापदंड पर सवाल उठे।
एक जॉब एप्लीकेंट ने रेडिट पर नौकरी के लिए दिए गए इंटरव्यू का अपना निराशाजनक अनुभव शेयर किया है। उसने एक कंपनी पर आरोप लगाया कि वह बार-बार "तुरंत जॉइन करने वाले" (immediate joiner) कैंडिडेट की मांग कर रही थी, जबकि उसे कैंडिडेट के समय या प्रोफेशनल कमिटमेंट्स की कोई परवाह नहीं थी। यह पोस्ट पॉपुलर सबरेडिट r/developersIndia पर "The absolute audacity of HRs and ‘immediate joiner’ requirements" (HR का ये कैसा रवैया और 'तुरंत जॉइन' करने की मांग) टाइटल के साथ शेयर की गई। इसमें एक महीने तक चली उस मुश्किल को बताया गया है, जिसमें इंटरव्यू न लेना, खराब कम्युनिकेशन और हायरिंग में कंपनी का दोहरा रवैया शामिल था। उसने लिखा, "मैं सच में इस देश में चल रहे रिक्रूटमेंट सर्कस से तंग आ चुका हूं।"

एप्लीकेंट के मुताबिक, उसने करीब चार हफ्ते पहले एक जॉब-सर्च और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए एक पद के लिए आवेदन किया था। अप्लाई करने के तुरंत बाद, एक रिक्रूटर ने उससे संपर्क किया और बताया कि कंपनी खासतौर पर ऐसे किसी व्यक्ति की तलाश में है जो दो हफ्ते के अंदर जॉइन कर सके।
एप्लीकेंट ने साफ किया कि वह अपनी मौजूदा नौकरी में 60-दिन का नोटिस पीरियड सर्व कर रहा है, लेकिन यह भी बताया कि इस समय को लेकर बातचीत हो सकती है क्योंकि उसके पास बायआउट का ऑप्शन और जमा छुट्टियां हैं, जिन्हें एडजस्ट किया जा सकता है। रिक्रूटर इस व्यवस्था के लिए कथित तौर पर सहमत हो गया और अगले दिन के लिए एक इंटरव्यू शेड्यूल कर दिया। हालांकि, कैंडिडेट ने दावा किया कि इंटरव्यू लेने वाला कभी आया ही नहीं। इंटरव्यू में शामिल होने के लिए, उसने कथित तौर पर अपने मौजूदा दफ्तर से छुट्टी ली थी और तैयारी में भी समय लगाया था, लेकिन उसे बिना किसी सूचना के इंतजार करना पड़ा।
उसने लिखा, "मेरी छुट्टी और समय दोनों बर्बाद हो गए।"
इसके बाद इंटरव्यू अगले दिन के लिए फिर से शेड्यूल किया गया, लेकिन एप्लीकेंट के अनुसार, वही चीज़ दोबारा हुई। इंटरव्यूअर कथित तौर पर दूसरी बार भी नहीं आया और कंपनी की ओर से कोई सफाई भी नहीं दी गई। उसने आगे कहा, "न कोई ईमेल, न कोई अपडेट, बस पूरी तरह से सन्नाटा।"
एप्लीकेंट ने यह भी दावा किया कि दूसरे छूटे हुए इंटरव्यू के बाद, कंपनी ने लगभग एक महीने तक उससे कोई संपर्क नहीं किया। हैरानी की बात यह है कि बाद में उसी एचआर प्रतिनिधि ने उससे फिर से संपर्क किया और पूछा कि क्या वह अभी भी दो सप्ताह के भीतर जॉइन कर सकता है। उसने अपनी निराशा जाहिर करते हुए लिखा, "क्या आप सच में मज़ाक कर रहे हैं।" उसने कहा कि रिक्रूटर्स को "कैंडिडेट के समय की ज़रा भी परवाह नहीं है"।
उसने कॉर्पोरेट हायरिंग में दोहरे मापदंडों की भी आलोचना की। उसने इस विरोधाभास की ओर इशारा किया कि कंपनियां "तुरंत जॉइन करने वालों" की मांग करती हैं, जबकि अपने ही कर्मचारियों पर लंबा नोटिस पीरियड थोपती हैं। उसने तंज कसते हुए कहा, "मतलब, आप चाहते हैं कि मैं 14 दिनों में आपके ऑफिस में टेलीपोर्ट हो जाऊं, लेकिन अगर मैं आपकी 'इज्जतदार' कंपनी छोड़ना चाहूं, तो मुझे तीन महीने का नोटिस पीरियड सर्व करना होगा?"
एप्लीकेंट ने यह भी तर्क दिया कि लंबे नोटिस पीरियड वाले उम्मीदवारों को अक्सर भर्ती के दौरान नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जबकि इंडस्ट्री में नोटिस पॉलिसी ऐसी है कि जल्दी नौकरी बदलना मुश्किल होता है।
यह पोस्ट रेडिट यूजर्स के बीच तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने रिक्रूटर्स और हायरिंग मैनेजर्स के साथ अपने ऐसे ही अनुभव शेयर किए। कुछ यूजर्स ने तो ऐसी कंपनियों का सार्वजनिक रूप से नाम लेने का सुझाव दिया ताकि दूसरे नौकरी खोजने वालों को ऐसी स्थितियों से बचाया जा सके, जबकि अन्य ने हायरिंग में "रेड फ्लैग" के लिए जानी जाने वाली कंपनियों पर नज़र रखने के लिए एक डायरेक्टरी बनाने की मांग की।
