एनसीईआरटी करीब 14 साल से अधिक समय बाद राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा (एनसीएफ) की समीक्षा करने वाला है और यह नई रूपरेखा के साथ तालमेल में मूल्यांकन दिशानिर्देश तैयार करेगा।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने कहा है कि स्कूली शिक्षा में मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली के ‘‘घातक प्रभाव’’ हैं और वह 2022 तक मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव के लिए जल्द दिशानिर्देश तैयार करने वाला है। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने यह जानकारी दी। एचआरडी मंत्रालय अपनी नई शिक्षा नीति को अंतिम स्वरूप देने की प्रक्रिया में है और उसने इसका अंतिम ड्राफ्ट भी प्रस्तावित किया है। 

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सभी छात्रों को किसी भी स्कूली वर्ष के दौरान दो अवसरों पर बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति होगी और परीक्षा को ‘‘आसान’’ बनाया जाएगा। एनसीईआरटी करीब 14 साल से अधिक समय बाद राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा (एनसीएफ) की समीक्षा करने वाला है और यह नई रूपरेखा के साथ तालमेल में मूल्यांकन दिशानिर्देश तैयार करेगा।

पसंदीदा विषय का चयन कर पाएंगे स्टूडेंट्स 

ड्राफ्ट में प्रस्ताव दिया गया, ‘‘मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली के घातक प्रभावों को हटाया जाएगा, बोर्ड परीक्षाएं विकास को प्रोत्साहित करने वाली होंगी, स्टूडेंट्स अपनी व्यक्तिगत रूचि के आधार पर कई विषयों में से पसंदीदा विषय का चयन कर पाएंगे, जिसमें वे बोर्ड परीक्षा दे पाएंगे।’’ बोर्ड परीक्षा साल में दो बार लेने के विचार पर एचआरडी मंत्रालय ने फैसला किया है कि ‘‘2020 तक एनसीएफ के साथ-साथ 2022 तक मूल्यांकन प्रणाली में परिवर्तन के लिए एनसीईआरटी इस संदर्भ में दिशानिर्देश तैयार करेगा।’’

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मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने किया जाएगा पेश

नई नीति में मूल्यांकन नियमों एवं मानकों के मकसद से भारत के सभी मान्यताप्राप्त स्कूल बोर्ड के लिए एक नई नियामक संस्था बनाने की सिफारिश की गई है। जिससे निश्चित किया जा सके कि सभी बोर्ड के मूल्यांकन के तरीके टैलेंट की आवश्यकता को पूरा करने वाले हों। इस मसौदे को एचआरडी मंत्रालय ने अंतिम स्वरूप दिया है और अब मंजूरी के लिए इसे केंद्रीय कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। 

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)