3 बार फेल, 4th अटेम्ट में दुश्मनों से सबक सीखकर क्रैक कर डाला UPSC-बन गए IAS
Krishnateja Success Story: सिर्फ दोस्त ही नहीं, कभी-कभी दुश्मन भी आपका भला कर जाते हैं. युवा IAS कृष्णतेजा की कहानी यही बताती है. कहते हैं कि उन्हें अपने दुश्मनों की वजह से ही सिविल में रैंक मिली. आइए जानते हैं कैसे।

पवन कल्याण के OSD कृष्णतेजा IAS की सफलता की कहानी
Success Story: आमतौर पर जब कोई जीवन में सफल होता है, तो इसका श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों को दिया जाता है. लेकिन एक युवा तेलुगु IAS ने साबित कर दिया है कि कभी-कभी दुश्मन भी हमारी जीत का कारण बन सकते हैं. पढ़ाई में टॉपर होने और 24 घंटे मेहनत करने के बावजूद, वह सिविल सेवा में रैंक हासिल नहीं कर सके और उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा. जब उन्होंने IAS बनने की उम्मीद छोड़ दी थी, तब उनके दुश्मनों ने ही उनका भला किया और उन्हें फिर से परीक्षा देने और रैंक हासिल करने के लिए प्रेरित किया. अब वह आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण के OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) के रूप में काम कर रहे हैं. इनका नाम है कृष्णतेजा IAS.
कृष्णतेजा की सफलता में दुश्मनों की भूमिका...
आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले के चिलकलुरिपेट के रहने वाले कृष्णतेजा बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज थे. वह दसवीं, इंटर और इंजीनियरिंग सभी में टॉपर थे. इसलिए उन्हें लगा कि वह आसानी से सिविल में रैंक हासिल कर लेंगे. लेकिन IAS बनने का सपना देखने वाले कृष्णतेजा को शुरुआत में लगातार असफलताएं मिलीं. एक समय तो उन्होंने तैयारी छोड़कर आईटी की नौकरी करने का मन बना लिया. इसी दौरान उनके दुश्मनों ने उनकी सोच बदल दी और उन्होंने फिर से परीक्षा देकर IAS बनकर दिखाया.
कृष्णतेजा बताते हैं कि भगवान ने उन्हें पढ़ाई में तो कई सफलताएं दीं, लेकिन सिविल सेवा में तीन बार फेल कर दिया. वह बताते हैं कि IAS बनने के जुनून के साथ उन्होंने तैयारी की, 24 घंटे पढ़ाई की, फिर भी 3 बार फेल हो गए. इससे उनका आत्मविश्वास पूरी तरह से टूट गया. उन्होंने एक महीने तक खुद का विश्लेषण किया, लेकिन कोई गलती नहीं मिली. फिर दोस्तों से पूछा, पर वे भी उनकी असफलता का कारण नहीं बता पाए.
आखिरकार, उन्होंने मान लिया कि सिविल सेवा पास करना असंभव है और एक प्राइवेट कंपनी में आईटी की नौकरी करने की तैयारी करने लगे. कृष्णतेजा बताते हैं कि इसी समय कुछ दुश्मनों ने उनका बहुत भला किया. जब उन्हें पता चला कि कृष्णतेजा ने तैयारी छोड़ दी है, तो तीन दुश्मन उनका मज़ाक उड़ाने आए और उन्होंने ही उनकी कमियां बताईं. उन्हीं कमियों को सुधारकर उन्होंने दोबारा कोशिश की और IAS बन गए.
दुश्मनों से सबक सीखने वाले IAS कृष्णतेजा
सिविल सेवा छोड़कर आईटी की नौकरी की तैयारी कर रहे कृष्णतेजा को उनके तीन दुश्मनों ने आईना दिखाया. जो लोग उनका मज़ाक उड़ाने आए थे, उन्होंने ही उनका भला कर दिया. कृष्णतेजा कहते हैं कि उन्हीं की वजह से उन्हें अपनी कमियों का पता चला. वे तीन कमियां ये थीं:
1. सिविल सेवा में 2000 अंकों की लिखित परीक्षा होती है. इसमें सिर्फ अच्छा जवाब लिखना ही काफी नहीं, बल्कि पेपर आकर्षक भी दिखना चाहिए, जिसके लिए अच्छी हैंडराइटिंग जरूरी है. एक दुश्मन ने कृष्णतेजा को बताया कि उनकी हैंडराइटिंग खराब होने की वजह से नंबर कट रहे हैं.
2. सिविल सेवा परीक्षा में जवाब निबंध के रूप में लिखने होते हैं. लेकिन इंजीनियरिंग की आदत के कारण वह पॉइंट्स में जवाब लिखते थे, जिससे कम नंबर मिलते थे. दूसरे दुश्मन ने बताया कि किसी विषय को कहानी की तरह समझाने पर अच्छे नंबर मिलते हैं.
3. तीसरे दुश्मन ने बताया कि इंटरव्यू में नंबर क्यों कट रहे हैं. उसने कहा, 'तुम हर बात सीधे-सीधे बोल देते हो, लेकिन सिविल सेवा के इंटरव्यू में डिप्लोमैटिक तरीके से बात करने पर ही नंबर मिलते हैं.' इसी वजह से इंटरव्यू में कम नंबर मिलने से रैंक नहीं आ रही थी.
कमियों को ताकत बनाने वाले कृष्णतेजा
कृष्णतेजा कहते हैं कि उनसे नफरत करने वाले दुश्मनों ने मज़ाक उड़ाने के बहाने उनका बहुत भला किया. इसलिए वह कहते हैं कि जब भी अपनी खूबियों के बारे में जानना हो तो परिवार और दोस्तों से पूछें, लेकिन अपनी कमियों के बारे में जानना हो तो दुश्मनों से पूछें. कृष्णतेजा ने बताया कि अपने दुश्मनों द्वारा बताई गई कमियों को दूर करके ही वह IAS बन पाए.
पवन कल्याण की नजर में कैसे आए?
2009 से सिविल सेवा की तैयारी करते हुए कृष्णतेजा तीन बार फेल हुए. 2014 में अपने चौथे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 66वीं रैंक हासिल की. 2015 में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें केरल कैडर मिला. इस राज्य में विभिन्न पदों पर काम करने के बाद, कृष्णतेजा ने पिछले साल 2023 में त्रिशूर जिले के कलेक्टर का पद संभाला. इसी दौरान उनके एक नेक काम ने उन्हें देश भर में पहचान दिलाई.
कोरोना महामारी के कारण अपने माता-पिता को खो चुके लगभग 609 अनाथ बच्चों को कृष्णतेजा ने गोद लिया और दानदाताओं की मदद से उनकी पढ़ाई का इंतजाम किया. कलेक्टर कृष्णतेजा की मदद से ये अनाथ बच्चे अब आराम से पढ़ रहे हैं. उनकी इस निस्वार्थ सेवा ने उन्हें खूब पहचान दिलाई. सैकड़ों अनाथ बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम करने के लिए कृष्णतेजा को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग पुरस्कार के लिए चुना गया. इससे देश भर में कृष्णतेजा का नाम गूंज उठा और वह पवन कल्याण की नजर में आ गए, जिन्होंने उन्हें अपना OSD नियुक्त कर लिया.
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