छंटनी के बाद एक कंपनी ने WFH शुरू किया, पर शर्त रखी कि कर्मचारी दिल्ली-NCR में ही रहें। उपस्थिति के लिए GPS ट्रैकिंग की जा रही है, जिससे कर्मचारी इस नीति से निराश हैं।
नई दिल्लीः आमतौर पर जब किसी कंपनी में 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने की सुविधा मिलती है, तो कर्मचारी खुशी से झूम उठते हैं। लेकिन एक कंपनी की नई वर्क फ्रॉम होम पॉलिसी सुनकर कर्मचारी हैरान-परेशान हैं। कंपनी के ही एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया है कि घर से काम करने के दौरान कंपनी GPS से उनकी लोकेशन ट्रैक कर रही है। ये पोस्ट अब इंटरनेट पर खूब चर्चा में है। कर्मचारी ने बताया कि पिछले महीने ही कंपनी ने बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरी से निकाला था, जिसके बाद यह नया नियम लाया गया है।

वर्क फ्रॉम होम की वजह
छंटनी से पहले कंपनी में 40 कर्मचारी थे, जो अब सिर्फ 15 रह गए हैं। खर्च बचाने के लिए कंपनी ने छठी मंजिल पर मौजूद अपना बड़ा ऑफिस खाली कर दिया और नीचे पांचवीं मंजिल पर एक छोटी सी जगह में शिफ्ट हो गई। रेडिट के 'इंडियन वर्कप्लेस' पेज पर कर्मचारी ने लिखा, "पांचवीं मंजिल पर हम सभी के बैठने की जगह नहीं है, इसलिए कंपनी ने वर्क फ्रॉम होम देने का फैसला किया। वहां हमारे लिए सिर्फ 4 सीटें हैं। इसलिए, बाकी लोगों को बारी-बारी से घर से काम करना होगा। कुछ हफ्तों बाद घर वाले ऑफिस आएंगे और ऑफिस वाले घर से काम करेंगे।"
ये तो धोखा है!
वर्क फ्रॉम होम का ऐलान सुनते ही कर्मचारी खुश हो गया कि वह अपने घर जाकर वहां से काम कर सकेगा, लेकिन 'GPS' वाली शर्त ने उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कर्मचारी ने बताया, "मैं पहले बहुत खुश था कि आखिरकार मैं अपने होमटाउन जा सकूंगा। लेकिन बॉस ने साफ कह दिया कि काम सिर्फ दिल्ली-NCR के अंदर रहकर ही करना होगा। यह पक्का करने के लिए अटेंडेंस GPS के जरिए लगाई जाएगी। अगर कर्मचारी दिल्ली-NCR के दायरे में होगा, तभी सिस्टम उसकी हाजिरी लगाएगा।" कर्मचारी के मुताबिक, बॉस ने इसका कोई ठोस कारण तो नहीं बताया, लेकिन शायद ऐसा इसलिए है ताकि किसी इमरजेंसी में ऑफिस बुलाने पर कर्मचारी जल्दी पहुंच सके। वह पूछता है, "यह सुनकर मुझे बहुत निराशा हुई। क्या इसी को असली वर्क फ्रॉम होम कहते हैं?"
'यह तो गुलामी है'
पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों के रिएक्शन की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने कर्मचारी के साथ सहमति जताते हुए कंपनी के इस रवैये की आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, "इसे गुलामी कहते हैं, और दुर्भाग्य से यह हमारे समाज में आम होता जा रहा है।" वहीं, कुछ लोगों ने बताया कि बड़ी-बड़ी कंपनियां भी ऐसा ही करती हैं। एक अन्य यूजर ने कहा, "बड़ी मल्टी-नेशनल कंपनियों (MNCs) में भी यही हाल है। कई कर्मचारी बिजली चली गई या इंटरनेट नहीं है, जैसे बहाने बनाकर ऑफलाइन हो जाते हैं। शायद ऐसी चीजों से बचने के लिए कंपनी ने GPS ट्रैकिंग शुरू की है।" वहीं, कुछ लोगों ने कंपनी का नाम न बताने पर कर्मचारी की आलोचना भी की।
