मांड्या यूनिवर्सिटी में लेक्चरर व सुविधाओं की कमी के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। 20 दिन बाद भी क्लास शुरू न होने से वे नाराज हैं और नियमित पढ़ाई व सिलेबस पूरा करने की मांग कर रहे हैं।

मांड्या: मांड्या यूनिवर्सिटी में बदइंतजामी और क्लास शुरू न होने से नाराज सैकड़ों छात्रों ने बुधवार को भारतीय विद्यार्थी संघ के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया। शहर में मांड्या यूनिवर्सिटी के सामने धरने पर बैठे छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनकी मांग थी कि मांड्या यूनिवर्सिटी को बंद कर वापस मैसूर यूनिवर्सिटी में मिला दिया जाए। छात्रों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, "एडमिन बिल्डिंग में सिर्फ खाली दीवारें हैं। न लेक्चरर हैं, न कोई सुविधा और पीने का पानी तक नहीं है।" छात्रों ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि जरूरी सुविधाएं दिए बिना यूनिवर्सिटी प्रशासन उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

लेक्चरर की भारी कमी

छात्रों ने बताया कि कॉलेज खुले 20 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हुई है। लेक्चरर की भारी कमी है। कॉलेज में साफ-सफाई का भी बुरा हाल है और पीने के पानी की किल्लत बनी हुई है। उन्होंने चिंता जताई कि मांड्या यूनिवर्सिटी में इन शैक्षणिक और बुनियादी समस्याओं के चलते उनकी पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक छात्र ने कहा, "जब यह मैसूर यूनिवर्सिटी के तहत था, तब सब कुछ ठीक था। मांड्या यूनिवर्सिटी बनने के बाद क्लास में पढ़ाने के लिए लेक्चरर ही नहीं हैं। यह यूनिवर्सिटी 'ऊपर से चकाचक, अंदर से खोखला' जैसी हो गई है।"

छात्रों ने मांग की कि कॉलेज की क्लासें तय टाइम-टेबल के हिसाब से नियमित रूप से शुरू की जाएं। छात्रों के लिए दोपहर के खाने का एक निश्चित समय तय हो और परीक्षा से पहले सभी विषयों का सिलेबस पूरा किया जाए।

यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर को सौंपा ज्ञापन

छात्रों ने एक ज्ञापन सौंपकर मांग की कि परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय और सही मार्गदर्शन दिया जाए। इसके अलावा, जरूरी स्टडी मटेरियल, मॉडल क्वेश्चन पेपर और तैयारी के लिए प्री-एग्जाम भी कराए जाएं। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि 75% से ज्यादा अटेंडेंस वाले कई छात्रों के हर साल बैक-लॉग आ रहे हैं। इस समस्या को ठीक किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान कॉलेज के छात्र आनंद ने कहा, "मांड्या के विधायक पी. रविकुमार ने कहा था कि हमें मैसूर के अधीन क्यों रहना चाहिए, हम मांड्या यूनिवर्सिटी को बचाएंगे। लेकिन यहां छात्रों को जरूरी सुविधाएं तक नहीं दी गईं। हमारे लिए कोई भी यूनिवर्सिटी मायने नहीं रखती, पढ़ाई मायने रखती है। हमें फौरन लेक्चरर और लैब की सुविधा चाहिए।"

एक अन्य छात्र एन.यू. हरीश ने कहा, "मांड्या यूनिवर्सिटी की हालत 'ऊंची दुकान, फीके पकवान' जैसी है। दूसरे विश्वविद्यालयों में दो-दो विषय पूरे हो चुके हैं और हमारे यहां एक भी क्लास शुरू नहीं हुई है। दिसंबर में परीक्षा है, हम तैयारी कैसे करेंगे? कोई टेस्ट भी नहीं हुआ है।"

यूनिवर्सिटी के एक सीनियर छात्र आलोक कुमार ने आरोप लगाया, "क्लास के लिए कोई टाइम-टेबल नहीं है। लंच का समय भी तय नहीं है। पहले भी सिलेबस पूरा नहीं कराया गया, जिससे छात्र फेल हो रहे हैं। कॉलेज में अनुभवहीन लेक्चरर हैं। साइंस ब्लॉक में कंप्यूटर ठीक से काम नहीं करते। क्लासरूम और टॉयलेट गंदे पड़े हैं।"

छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कॉलेज में सुविधाएं नहीं दी गईं और पढ़ाई ठीक से शुरू नहीं हुई, तो वे आने वाले दिनों में 'स्टूडेंट पावर' दिखाएंगे। एक छात्रा नित्या ने बताया कि यूनिवर्सिटी में पीने के पानी की गंभीर समस्या है। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स, किसी भी ब्लॉक में पीने का साफ पानी नहीं है, जिससे छात्रों को काफी परेशानी हो रही है। एक और छात्रा शुभितारम ने कहा, "कॉलेज खुले 20 दिन हो गए, लेकिन कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। कोई आता है, पढ़ाता है और चला जाता है। लेकिन ठीक से पढ़ाने वाले लेक्चरर नहीं हैं।" छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे चार सेमेस्टर की पूरी फीस ले ली गई है, लेकिन लैब में ट्रेनिंग का मौका नहीं दिया जा रहा। इस प्रदर्शन में भारतीय विद्यार्थी संघ के बी.एस. मंजू समेत सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल हुए।