मेटा में छंटनी के डर से एक महिला कर्मचारी ने बच्चे पैदा करने की योजना छोड़ दी। उन्होंने 'ब्लाइंड' पर लिखा कि नौकरी की अनिश्चितता के बीच वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहतीं। इस पोस्ट ने कॉर्पोरेट कल्चर के निजी जीवन पर प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है।

सोशल मीडिया कंपनी मेटा में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने नौकरी की अनिश्चितता के चलते एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। 30-32 साल की इस महिला ने कहा है कि उन्होंने बच्चे पैदा करने का विचार ही छोड़ दिया है। यह बात उन्होंने प्रोफेशनल नेटवर्क 'ब्लाइंड' (Blind) पर एक गुमनाम पोस्ट के ज़रिए साझा की, जो अब वायरल हो गई है। अपने पोस्ट में महिला ने बताया कि वह और उनके पार्टनर बच्चे की प्लानिंग कर रहे थे, लेकिन कंपनी में लगातार छंटनी के डर ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने लिखा कि वह ऐसे अस्थिर माहौल में किसी बच्चे को दुनिया में नहीं लाना चाहतीं। परफॉर्मेंस रिव्यू और किसी भी वक्त नौकरी जाने का तनाव बहुत ज़्यादा है।

नौकरी का डर या ज़िंदगी का कंट्रोल?

यह पोस्ट सामने आने के बाद टेक जगत में काम के माहौल और जॉब सिक्योरिटी को लेकर एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। कई दूसरे यूज़र्स ने भी कमेंट्स में अपनी ऐसी ही चिंताएं ज़ाहिर कीं। एक यूज़र ने लिखा कि मेटा में डर का माहौल 'साफ महसूस' किया जा सकता है और वह भी इसी कश्ती में सवार हैं। दरअसल, मेटा ने पिछले कुछ समय में 'ईयर ऑफ एफिशिएंसी' (Year of Efficiency) के नाम पर कई दौर में हज़ारों कर्मचारियों की छंटनी की है। 

इसी वजह से कंपनी के मौजूदा कर्मचारियों में नौकरी को लेकर एक गहरी अनिश्चितता और डर का माहौल है। ज़ाहिर है, इसी माहौल ने महिला को इतना बड़ा फैसला लेने पर सोचने को मजबूर किया। हालांकि, पोस्ट पर सभी की राय एक जैसी नहीं थी। कुछ लोगों ने महिला को सलाह दी कि किसी नौकरी को अपनी ज़िंदगी के इतने बड़े फैसले पर हावी नहीं होने देना चाहिए। एक यूज़र ने कहा कि कोई भी नौकरी कभी 100% सुरक्षित नहीं होती, इसलिए स्थिरता का इंतज़ार करते रहना सही नहीं है। जो भी हो, यह घटना दिखाती है कि कॉर्पोरेट कल्चर का असर अब लोगों की निजी ज़िंदगी पर कितना गहरा पड़ रहा है।