करियर डेस्क. National Eligibility cum Entrance Test, NEET 2020: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (National Eligibility cum Entrance Test, NEET 2020) और जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (Joint Entrance Examination, JEE Main 2020) परीक्षा की तारीखें चिंता का विषय बनी हुई हैं।  हालांकि, इस बार यह चिंता परीक्षा रद्द करने के लिए नहीं बल्कि उसके उलट है।

परीक्षा में और देरी न हो

माता-पिता ने अब सुप्रीम कोर्ट से कहा है, सुनिश्चित करे कि NEET 2020 और JEE मेन 2020 परीक्षा सितंबर के लिए दिए शेड्यूल के अनुसार आयोजित होगी। ये याचिका गुजरात अभिभावक संघ द्वारा दायर की गई है। ये छात्र-अभिभावक संघ अनुच्छेद 32 के तहत मांग कर रहा है कि परीक्षा में और देरी न हो, इसके लिए अदालत से हस्तक्षेप करें।

परीक्षायें स्थगित करने का अनुरोध

इससे पहले देश में तेजी से बढ़ रहे कोविड-19 महामारी के मामलों की संख्या के मद्देनजर सितंबर में प्रस्तावित जेईई (मुख्य) अप्रैल, 2020 और नीट-स्नातक परीक्षायें स्थगित करने के अनुरोध के साथ उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी। 

यह याचिका 11 राज्यों के 11 छात्रों ने दायर की थी। याचिका में कोरोना वायरस महामारी का जिक्र करते हुये राष्ट्रीय परीक्षा एजेन्सी (एनटीए) की तीन जुलाई की नोटिस रद्द करने का अनुरोध किया गया था। इन नोटिस के माध्यम से ही एनटीए ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मुख्य, अप्रैल, 2020 और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) सितंबर में कराने का निर्णय लिया था।

स्थिति बहाल होने के बाद परीक्षा आयोजित

याचिका में प्राधिकारियों को सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ही इन परीक्षाओं को आयोजित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। एनटीए की सार्वजनिक नोटिस के अनुसार जेईई (मुख्य) अप्रैल, 2020 की परीक्षा 1-6 सितंबर तक और नीट-यूजी की परीक्षा 13 सितंबर को आयोजित होगी। अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव के माध्यम से दायर इस याचिका में इन परीक्षाओं के लिये परीक्षा केन्द्रों की संख्या बढ़ाने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था।

परीक्षाओं के लिये कुछ समय और इंतजार

याचिका में कहा गया था कि कोविड-19 महामारी के दौरान संक्रमित लोगों की बढ़ती संख्या के बीच इन परीक्षाओं के लिये कुछ समय और इंतजार करना उचित होगा। याचिका में कहा गया था कि छात्रों और उनके माता-पिता की जिंदगी सुरक्षित रखने के लिये कोविड-19 का संकट खत्म होने के बाद ये परीक्षायें आयोजित की जानी चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि संबंधित प्राधिकारियों ने बिहार, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित लाखों छात्रों की स्थिति को नजरअंदाज करते हुये परीक्षायें आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन राज्यों में ऑनलाइन या ऑफ लाइन परीक्षायें आयोजित करना संभव नहीं होगा।