Why Panshul Bansal Skipped Protests: NEET AIR 2 पांशुल बंसल ने बताया कि पेपर लीक विवाद के दौरान उन्होंने प्रोटेस्ट की बजाय पढ़ाई पर क्यों और कैसे फोकस किया। जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी।

Panshul Bansal NEET AIR 2: NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद ने लाखों छात्रों की तैयारी और मानसिक स्थिति को प्रभावित किया। परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, लेकिन इसी दौर में दिल्ली के छात्र पांशुल बंसल ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने विरोध में शामिल होने के बजाय अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाया और उसी का नतीजा रहा कि री-एग्जाम में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल की। 99.9999 पर्सेंटाइल के साथ 715 अंक लाकर पांशुल ने यह साबित कर दिया कि मुश्किल हालात में भी सही सोच और लगातार मेहनत बड़ी सफलता दिला सकती है।

पहले निराशा हुई, फिर बदला नजरिया

NDTV से बातचीत में पांशुल ने बताया कि जब पहली NEET परीक्षा रद्द हुई तो उन्हें कुछ समय के लिए काफी निराशा हुई। उन्हें लगा कि उन्होंने अच्छा पेपर दिया था और सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले की उम्मीद मजबूत थी। हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्होंने खुद को संभाला और पूरी स्थिति को नए नजरिए से देखना शुरू किया। उनके मुताबिक, उन्होंने फैसला किया कि नकारात्मक सोच में समय गंवाने से बेहतर है कि दोबारा मिलने वाले मौके का पूरा फायदा उठाया जाए। यही सोच उन्हें फिर से तैयारी की ओर ले गई।

प्रदर्शन की जगह तैयारी को दी प्राथमिकता

पेपर लीक के बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। इस सवाल पर कि उन्होंने उन प्रदर्शनों में हिस्सा क्यों नहीं लिया, पांशुल ने साफ कहा कि उन्होंने अपना समय पढ़ाई में लगाना ज्यादा सही समझा। उन्होंने कहा कि अगर वह विरोध में समय देते, तो पढ़ाई का नुकसान होता। इसलिए उन्होंने घर पर रहकर अपनी कमजोरियों पर काम किया और खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश की। उनका मानना था कि अतिरिक्त समय का सही इस्तेमाल ही सबसे बड़ा जवाब होगा।

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रूटीन नहीं बदला, सिर्फ मेहनत बढ़ाई

पांशुल ने बताया कि री-एग्जाम की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई का तरीका नहीं बदला। उन्होंने वही रूटीन जारी रखा, जिसे पहले से फॉलो कर रहे थे। फर्क सिर्फ इतना था कि उन्होंने अगले डेढ़ महीने में अपना सौ प्रतिशत देने का फैसला किया और बाकी परिणाम भगवान पर छोड़ दिए। उन्होंने यह भी बताया कि पहली परीक्षा में उनके करीब 706 अंक आए थे, जबकि री-एग्जाम में उन्होंने इसे बढ़ाकर 715 अंक कर दिया।

CJP प्रदर्शनों पर टिप्पणी से किया इनकार

एनडी टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार जब उनसे देशभर में चल रहे CJP और स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शनों पर राय मांगी गई तो उन्होंने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि वह इस विषय पर कुछ नहीं कहना चाहते।

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सफलता का सबसे बड़ा संदेश

पांशुल बंसल की कहानी उन छात्रों के लिए एक प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से नहीं भटकते। परीक्षा रद्द होने जैसी बड़ी चुनौती के बावजूद उन्होंने समय को अवसर में बदला, लगातार तैयारी जारी रखी और देश के टॉप रैंकर्स में अपनी जगह बनाई। उनका अनुभव यही बताता है कि हर चुनौती के बीच एक नया मौका छिपा होता है, जिसे सही सोच और अनुशासन के साथ सफलता में बदला जा सकता है।