नई दिल्ली. श्री लालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम संस्कृत माध्यम में एक ऐसा आभासी संसार तैयार कर रहा है जहां छात्र कम्प्यूटर साफ्टवेयर के माध्यम से न केवल पढ़ाई कर सकेंगे बल्कि उन्हें पाठ का अभ्यास करने की सुविधा और समस्या आने पर प्राध्यापकों का मार्गदर्शन भी मिलेगा ।

विद्यापीठम के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडे ने बताया, ‘‘श्री लालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम, संस्कृत माध्यम में वर्चुअल पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है । यह कार्य छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और सितंबर तक तैयार हो जायेगा । हालांकि, हम जुलाई 2020 से वर्चुअल कक्षाएं शुरू कर देंगे। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने संस्कृत संस्थाओं के कुलपतियों के साथ बैठक के बाद इस वर्चुअल पाठ्यक्रम को प्लेटफार्म प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है ।’’ 

सुदूर क्षेत्रों के छात्रों को पढ़ाई करने वाले छात्रों को मिलेगी मदद
संस्कृत में वर्चुअल कक्षा एक ऐसी अनोखी पहल है जिसे कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से अमल में लाया जायेगा । इसमें वीडियो, ऑडियो सामग्रियों को एकीकृत कमान के तहत जोड़ा जाएगा। छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए प्राध्यापक भी उपलब्ध रहेंगे। वेब आधारित इस पहल में सुदूर क्षेत्रों के छात्रों को पढ़ाई करने की सहुलियत मिलेगी ।

वेद परिचय, वास्तुकला सहित ये विषय होंगे शामिल 
प्रो. पांडे ने बताया कि संस्कृत के विद्वान वर्चुअल पाठ्यक्रम को तैयार कर रहे हैं । अभी यह 16 विषय श्रेणी में तैयार किया जा रहा है । विभिन्न श्रेणियों में वेद परिचय, वास्तुकला, व्याकरण, ज्योतिष शास्त्र, पौरोहित, मीमांसा प्रवेशिका, न्याय वैशेषिक, जैन दर्शन आदि शामिल हैं ।

लगभग 16 हजार छात्रों को मिलेगा फायदा 
प्रो. पांडे ने कहा, ‘‘जो छात्र कालेज या शिक्षण संस्थानों में नहीं पहुंच सकते, उनके लिये यह वर्चुअल कक्षाएं तैयार की जा रही हैं । प्राचीन भाषा को प्रौद्योगिकी के संयोग से आगे बढ़ाने की यह महत्वपूर्ण पहल है। ’’ गौरतलब है कि देश में संस्कृत के तीन प्रमुख संस्थान श्री लालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरूपति और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में अभी करीब 16 हजार छात्र पढ़ाई करते हैं ।

UGC की योजना के तहत उठाया कदम
विद्यापीठम के कुलपति ने बताया कि इसके अलावा संस्थान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक योजना के तहत संस्कृत पाठ्यसामग्रियों को ई..डिजिटल प्रारूप में तैयार किया है। उन्होंने बताया कि संस्कृत माध्यम को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिये हाल ही में ‘वास्तु शास्त्र’ में पाठ्यक्रम तैयार किया गया है जिसमें स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर ने सहयोग दिया है। उन्होंने बताया कि छात्रों के रोजगार की दृष्टि से संस्थान में कैम्पस प्लेंसमेंट का भी आयोजन होता है।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)