Preschool Donation Fees Viral X Post: 2 साल की बच्ची के प्री-स्कूल एडमिशन के लिए ₹1.5 लाख डोनेशन के दावे ने सोशल मीडिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर पूरा मामला क्या है? जानिए

Preschool Admission Fees: दो साल के बच्चे के प्री-स्कूल एडमिशन के लिए ₹1.5 लाख की कथित डोनेशन फीस ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। अहमदाबाद के उद्यमी प्रितेश लखानी ने X पर अपना अनुभव साझा करते हुए स्कूलों में एडमिशन के बढ़ते खर्च पर सवाल उठाया।

बच्ची के लिए स्कूल तलाश रहे थे लखानी

लखानी ने बताया कि उनकी बेटी हाल ही में दो साल की हुई है और परिवार ऐसा प्री-स्कूल तलाश रहा है, जहां आगे चलकर स्कूल बदलने की जरूरत न पड़े। इसी दौरान एक स्कूल को लेकर उन्हें एक अन्य पैरेंट से कथित तौर पर ऐसी जानकारी मिली, जिसने उन्हें हैरान कर दिया।

उनके मुताबिक, पैरेंट ने बताया कि एडमिशन के लिए ₹1.5 लाख की डोनेशन अनिवार्य है। अगर यह रकम नहीं दी जाती, तो बच्चे और माता-पिता का असेसमेंट लिया जा सकता है और कथित तौर पर ज्यादा फीस वसूली जा सकती है। लखानी ने यह भी दावा किया कि पहले साल की प्री-स्कूल डोनेशन फीस ₹1.25 लाख बताई गई।

लखानी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “Preschool fun should not be this expensive.” उनकी पोस्ट 23 सितंबर को सामने आई और जल्द ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। नीचे देखें वायरल पोस्ट-

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किसी ने कहा स्कूल बदलें, किसी ने होमस्कूलिंग सुझाई

  • पोस्ट पर यूजर्स ने प्री-स्कूल एडमिशन के खर्च और दो साल के बच्चे के असेसमेंट को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने इसे स्कूल बदलने का संकेत बताया, जबकि कुछ ने homeschooling को विकल्प बताया।
  • एक यूजर ने पूछा कि दो साल के बच्चे के लिए एडमिशन टेस्ट आखिर किस आधार पर किया जाएगा। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में यह सवाल भी उठा कि शुरुआती उम्र में बच्चों के लिए खेल, दूसरे बच्चों के साथ मेलजोल और सीखने का माहौल ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • हालांकि, लखानी की पोस्ट में जिस स्कूल का जिक्र है, उसका नाम सामने नहीं आया है और डोनेशन या कथित एडमिशन प्रक्रिया के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन रकमों को किसी स्कूल की सामान्य फीस या पूरी प्री-स्कूल इंडस्ट्री की स्थिति नहीं माना जा सकता।

फिलहाल इस चर्चा ने एक बड़ा सवाल जरूर सामने रखा है, क्या दो साल की उम्र में स्कूल चुनना परिवारों के लिए शिक्षा से ज्यादा खर्च और एडमिशन प्रक्रिया की चुनौती बनता जा रहा है?

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