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71 फीसदी मां-बाप नहीं भेजना चाहते अपने बच्चों को स्कूल, कोरोना के अलावा सता रहा इन चीजों का डर

21 सितंबर से सरकार ने अनलॉक 5.0 के तहत स्कूल-कॉलेज खोलने की परमिशन दे दी थी। पर शिक्षा से ज्यादा स्वास्थ्य की चिंता के चलते मां-बाप बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि कोरोना का कहर देख करीब 71 फीसदी पैरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेजने को राजी नहीं हैं। 

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New Delhi, First Published Sep 30, 2020, 1:15 PM IST
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करियर डेस्क. भारत में कोरोना वायरस संक्रमित लोगों का आंकड़ा 60 लाख को पार कर गया है।  रोजोना करीब 80 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या अब लगभग 1 लाख है। ऐसे में लोग इस बात को लेकर कन्फयूज हैं कि बाजार, रेस्तरां, बार, मेट्रो और अन्य जरूरतों के लिए बाहर जाएं या नहीं? इसमें स्कूल-कॉलेज जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। 

महामारी के कारण पिछले 6-7 महीने से स्कूल-कॉलेज सब बंद हैं। एडमिशन, एंट्रेस और सरकारी नौकरियों से जुड़ी परीक्षाएं आदि हो रही हैं। हालांकि 21 सितंबर से सरकार ने अनलॉक 5.0 के तहत स्कूल-कॉलेज खोलने की परमिशन दे दी थी। पर शिक्षा से ज्यादा स्वास्थ्य की चिंता के चलते मां-बाप बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि कोरोना का कहर देख करीब 71 फीसदी पैरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेजने को राजी नहीं हैं।  

मार्च से बंद हैं स्कूल-कॉलेज 

मार्च में लॉकडाउन की घोषणा के बीच देश में मार्च 2020 से स्कूल बंद कर दिए गए। अब अभिभावकों की ओर से 21 सितंबर, 2020 आधार प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त 10-12 वीं के छात्रों के लिए स्वैच्छिक उपस्थिति के लिए स्कूल खोले गए। ऐसे में सितंबर में स्कूल खुलने के बाद मां-बाप की नब्ज पकड़ने के लिए लोकल सर्कल ने एक सर्वे किया गया।

सर्वेक्षण में देश के लगभग 217 जिलों में स्थित अभिभावकों से 14,500 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं, जिसमें टीयर 1 जिलों के 61% अभिभावक, टीयर 2 जिलों के 21% और टीयर 3, टीयर 4 और भारत के ग्रामीण जिलों से 18% अधिक हैं। 

 

 

जब पैरेंट्स से पूछा गया कि, अगर केंद्र सरकार और उनकी राज्य सरकार यह तय करती है कि अक्टूबर में उनके राज्य में खुलने चाहिए तो क्या वे अक्टूबर में आपके बच्चे / पोते को स्कूल भेजेंगे? 

इस सवाल के जवाब में करीब 71% ने  'नहीं' में जवाब दिया जबकि केवल 20% ने कहा 'हाँ '। 9% इसके बारे में अनिश्चित ही थे।

अक्टूबर में भी नहीं भेजेंगे स्कूल

लोकल सर्कल ने इसी साल अगस्त में इसी तरह का एक सर्वे और किया था और तब 23 फीसदी  माता-पिता ने कहा था कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं, क्योंकि COVID-19 महामारी उस समय मात्र 23% थी। लेकिन अब आंकड़ों से साफ है कि बढ़ते COVID मामलों के साथ 23 से मात्र 20 फीसदी मां-बाप ही अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए तैयार हैं। 

तमिलनाडु और त्रिपुरा जैसे कुछ राज्यों ने घोषणा की है कि उनके राज्यों के स्कूल 1 अक्टूबर, 2020 से स्वैच्छिक आधार पर फिर से खुलेंगे और क्लास 10-12 के बच्चे गाइडेंस या जरूरत के लिए स्कूलों जा सकते हैं।

 

 

 

बच्चों को स्कूल भेजने वाले इस सर्वे में जब पैरेंट्स से दूसरा प्रश्न पूछा गया कि, बढ़ते COVID-19 केस और आगामी त्योहारी सीजन में भारत में स्कूल खोलने के बारे में उनकी क्या स्थिति है?  

तो जवाब में, 32% ने कहा कि 31 दिसंबर, 2020 तक स्कूल नहीं खुलने चाहिए, जबकि 34% ने कहा कि सरकार को इस एकेडैमिक ईयर के लिए स्कूल नहीं खोलने चाहिए अर्थात मार्च / अप्रैल 2021 तक। 7% ने कहा कि स्कूल 1 अक्टूबर, 2020 से खुलने चाहिए, 12% स्कूल 1 नवंबर, 2020 से खुलने चाहिए और 9% ने कहा कि 1 दिसंबर, 2020 से स्कूल खुलने चाहिए। 

28 फीसदी नहीं चाहते इस साल खुले स्कूल

इसका मतलब है कि केवल 28% माता-पिता साल 2020 में दोबारा स्कूल खोलने के पक्ष में हैं, यानी 31 दिसंबर, 2020 से पहले, जबकि 34% को लगता है कि उन्हें केवल अगले ऐकेडैमिक ईयर यानी अप्रैल 2021 में ही स्कूल खोलना चाहिए। 

प्रदूषण और कोरोना दोनों का डर

भारत के अधिकांश हिस्सों में अक्टूबर और नवंबर के महीने का त्योहार होता है और इसके कारण कई दिनों तक स्कूल बंद रहते हैं। इसके अलावा आगामी अक्टूबर- नवंबर-दिसंबर सर्दी-कोहरे  के मौसम वाले हैं। खासतौर पर देश के उत्तरी भागों में अधिकतर पैरेंट्स के लिए ये एक चिंता का विषय है। पिछले साल, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर PM 2.5 के 900 को छूने के बाद, 74% अभिभावकों ने मांग की थी कि सरकार हर साल अक्टूबर 1 से -20 नवंबर तक स्कूलों के लिए 'स्मॉग ब्रेक' की घोषणा करे। 

 

 

इस साल बंद रह सकते हैं स्कूल के दरवाजे

इस सब को ध्यान में रखते हुए, अधिकांश अभिभावकों को लगता है कि यह सबसे अच्छा होगा यदि स्कूलों को अक्टूबर और नवंबर के महीनों में फिर से न खोला जाए और अगर 1 जनवरी, 2021 से कोविड ​​-19 की स्थिति में सुधार पर विचार किया जाए। हालांकि, यह एक बड़ी बात है अगर दुनिया भर के देशों को अपनी दूसरी COVID लहर का सामना करना पड़ रहा है, तो भारत के त्यौहारों और स्मॉग के मौसम के कारण हालात बदतर हो सकते हैं, स्कूलों को इस शैक्षणिक वर्ष 2020-21 तक बंद रहने की संभावना हो सकती है।

देश में 5 महीने से ज्यादा वक्त से बंद स्कूल सितंबर में खुले थे लेकिन कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के कारण अभी स्कूलों में न तो बच्चों की पहले जैसी उपस्थिति है ना ही रौनक। बता दें कि सरकार ने 9-12 वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलने के लिए गाइडलाइंस जारी किए थे। बच्चों को स्कूल आने के लिए अपने पैरंट्स की लिखित अनुमति भी जरूरी कर दी गई थी। जिन राज्यों में स्कूल खुले हैं वहां पैरंट्स कोरोना के डर के कारण बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं या भेजने में संकोच कर रहे हैं।

स्कूल तो खुले, पर छात्र नहीं

केंद्र की गाइडलाइंस के अनुसार, 21 सितंबर से देश के जो राज्य 9-12वीं तक के स्कूल खोलने के इच्छुक थे वह SOP के अनुसार स्कूल खोल सकते थे। पर स्कूल खुलने के बाद अब छात्रों की उपस्थिति काफी कम है। पैरंट्स कोरोना वायरस के डर के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में संकोच कर रहे हैं। 21 सितंबर को खुले कई स्कूलों ने तो छात्रों की कम उपस्थिति को देखते हुए 30 सितंबर तक कैंपस बंद करने की घोषणा कर दी।

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