शंघाई में पति के विरोधी कंपनी में होने पर एक महिला को नौकरी से निकाल दिया गया। कोर्ट ने इसे गैर-कानूनी ठहराया और सबूतों के अभाव में कंपनी को 6,90,000 युआन का मुआवजा देने का आदेश दिया।

शंघाई: पति का विरोधी कंपनी में काम करना एक महिला को इतना महंगा पड़ा कि उसकी नौकरी ही चली गई। लेकिन जब मामला कोर्ट पहुंचा, तो कंपनी को अपनी गलती का अहसास हुआ। शंघाई की एक कंपनी को अपनी महिला कर्मचारी को गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकालने के लिए कोर्ट ने 6,90,000 युआन (करीब 83 लाख रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला शंघाई की शुहुई डिस्ट्रिक्ट पीपुल्स कोर्ट में सुना गया।

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कंपनी ने क्या कहा?

लियू नाम की यह महिला 2006 से एक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट कंपनी में काम कर रही थीं। लेकिन 2023 के आखिर में, कंपनी ने उन्हें यह कहकर नौकरी से निकाल दिया कि उनके पति का एक विरोधी कंपनी में जनरल मैनेजर होना कंपनी के लिए "नुकसानदायक" हो सकता है। कंपनी को डर था कि लियू कंपनी की गोपनीय जानकारी अपने पति को दे सकती हैं। कंपनी के इस फैसले के खिलाफ लियू ने फरवरी 2024 में लेबर आर्बिट्रेशन कमेटी में शिकायत की। कमेटी ने जांच के बाद कंपनी को आदेश दिया कि वो लियू को सैलरी और छुट्टियों के पैसे का मुआवजा दे।

मामला कोर्ट तक पहुंचा

लेकिन कंपनी इस फैसले से खुश नहीं थी और मामले को कोर्ट में ले गई। कंपनी ने दलील दी कि ऑपरेशंस मैनेजर के तौर पर लियू को कंपनी के कई राज पता थे, जिससे कंपनी को खतरा था। वहीं, लियू ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वो सिर्फ एक सपोर्टिंग रोल में थीं और कंपनी के सीक्रेट्स तक उनकी पहुंच नहीं थी।

कोर्ट ने सुनाया फैसला

कोर्ट ने कंपनी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कंपनी यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दे पाई कि लियू की वजह से कंपनी के हितों को कोई नुकसान हुआ है। चीनी कानून के मुताबिक, 'नॉन-कम्पीट' (non-compete) यानी एक जैसी कंपनी में काम न करने की शर्त सिर्फ बड़े अधिकारियों या टेक्निकल एक्सपर्ट्स पर लागू होती है।

कोर्ट ने साफ किया कि लियू न तो ऐसे किसी पद पर थीं और न ही उन्होंने ऐसे किसी एग्रीमेंट पर साइन किया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति-पत्नी का एक ही इंडस्ट्री की अलग-अलग कंपनियों में काम करना एक आम बात है। इसके बाद कोर्ट ने कंपनी को लियू को 6,90,000 युआन का मुआवजा देने का आदेश दिया।

यह खबर चीन के सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। कुछ लोगों ने कंपनी की चिंताओं को सही ठहराया, तो ज्यादातर लोगों का मानना था कि बिना किसी सबूत के किसी को नौकरी से निकालना पूरी तरह गलत है।