पेपर लीक के बाद हुए नीट री-एग्जाम में कई छात्रों को कुछ मिनट की देरी के कारण प्रवेश नहीं मिला। परीक्षा केंद्रों के बाहर रोते छात्रों और अभिभावकों के वीडियो वायरल हुए, जिससे सख्त नियमों और इंसानियत पर बहस छिड़ गई है।
भारत में आजकल बड़े-बड़े एग्जाम एक मज़ाक बनकर रह गए हैं। परीक्षा होने से पहले ही टेलीग्राम पर पेपर बिकने लगते हैं और पैसे देने वालों को आसानी से मिल जाते हैं। इन सब पर सरकार का ढीला-ढाला रवैया मामले को और भी गंभीर बना देता है। लाखों छात्रों की सालों की मेहनत ऐसे ही बर्बाद हो जाती है। हाल ही में हुए नीट री-एग्जाम के पेपर भी लीक होने की अफवाहें थीं, हालांकि अधिकारियों ने इससे इनकार किया। इस बीच, देश भर के कई नीट परीक्षा केंद्रों के बाहर आंखों में आंसू लिए छात्र और उनके मां-बाप देखे गए। वजह? सिर्फ दो मिनट की देरी। इस छोटी सी गलती के लिए सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें परीक्षा हॉल में घुसने नहीं दिया।

परीक्षा हॉल के बाहर रोते-बिलखते छात्र और मां-बाप
मध्य प्रदेश का एक वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का दिल दहला रहा है। एक यूजर ने लिखा, "मध्य प्रदेश के विदिशा से दिल दुखाने वाला सीन। गर्ल्स कॉलेज री-नीट परीक्षा केंद्र पर तीन छात्राओं का एग्जाम छूट गया। वजह- थोड़ी देर से पहुंचना, बायोमेट्रिक में दिक्कत और गलती से पुराना एडमिट कार्ड ले आना। हर छात्र के पीछे उनके मां-बाप के सालों के सपने, उम्मीदें और त्याग होते हैं - इस पल ने सब कुछ और भी भावुक कर दिया।" इस वीडियो ने सोशल मीडिया यूजर्स को काफी परेशान किया।
कई लोगों ने लिखा कि ऐसे एग्जाम के नियम इतने सख्त हैं कि उनमें इंसानियत की कोई जगह ही नहीं है। कुछ यूजर्स ने शिकायत की कि यह सिस्टम आम आदमी के लिए काम नहीं करता। नेटिजन्स का कहना था कि जब सरकार की नाकामी की वजह से दोबारा परीक्षा करानी पड़ रही है, तो छात्रों के साथ ऐसा बर्ताव करना बेहद शर्मनाक है। तेलंगाना से भी एक ऐसा ही वीडियो सामने आया, जिसमें एक मां अपनी बेटी को सिर्फ दो मिनट की देरी की वजह से अंदर न जाने देने पर सिक्योरिटी गार्ड के पैरों में गिरकर गिड़गिड़ा रही थी।
'थोड़ी तो इंसानियत दिखा सकते थे'
सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं, 'पेपर लीक की वजह से 2 लाख छात्र परेशान हो रहे हैं, लेकिन किसी नेता ने इस्तीफा नहीं दिया।' एक और ने लिखा, '2 मिनट की देरी हुई तो अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए 3 छात्रों को एंट्री नहीं दी।' वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इमरजेंसी हालात में थोड़ी ढील दी जा सकती थी। एक यूजर ने लिखा, 'माना कि परीक्षा के नियम और रिपोर्टिंग टाइम का पालन करना जरूरी है। लेकिन यह एक री-एग्जाम था, सिर्फ 1-2 मिनट की मोहलत देने से कई छात्रों की साल भर की मेहनत बच सकती थी। अनुशासन जरूरी है, लेकिन मुश्किल हालात में इंसानियत भी उतनी ही जरूरी है।' हालांकि, कुछ लोग इसके खिलाफ भी थे। उनका सवाल था कि जो लोग दो मिनट पहले नहीं आ सकते, वे आगे चलकर मरीजों का इलाज करने वाले जिम्मेदार डॉक्टर कैसे बनेंगे?
