क्या शून्य की खोज हुई थी या अविष्कार? पढ़ें UPSC इंटरव्यू के चौंकाने वाले 5 ट्रिकी सवाल
UPSC Interview Tricky Questions and Answers: सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं? यहां पढ़ें यूपीएससी इंटरव्यू में पूछे जाने वाले 5 ऐसे ट्रिकी सवाल और उनके तार्किक जवाब, जो अक्सर उम्मीदवारों को उलझा देते हैं।

सवाल: आकाश और अंतरिक्ष में क्या अंतर है?
जवाब: आकाश और अंतरिक्ष को लेकर दृष्टिकोण संदर्भ पर निर्भर करता है। सामान्य और भौतिक अर्थों में, पृथ्वी के ऊपर दिखाई देने वाले वातावरणीय क्षेत्र को हम आकाश या गगन कहते हैं, जहां बादल, पक्षी और वायुमंडलीय घटनाएं होती हैं। वहीं अंतरिक्ष उस क्षेत्र को कहते हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल से आगे फैला हुआ है, जहां ग्रह, तारे और आकाशगंगाएं स्थित हैं। धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों में आकाश को सूक्ष्म तत्व के रूप में भी परिभाषित किया गया है। इस प्रकार, आकाश सीमित है जबकि अंतरिक्ष अत्यंत व्यापक और लगभग असीम माना जाता है।
सवाल: क्या किसी व्यक्ति को अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार है?
जवाब: हां, किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का प्रचार करने और उसके बारे में दूसरों को जानकारी देने का अधिकार है। हालांकि यह अधिकार तब तक ही मान्य है, जब तक वह स्वेच्छा पर आधारित हो और किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती न की जाए। एक लोकतांत्रिक समाज में धर्म की स्वतंत्रता के साथ-साथ दूसरों की आस्था और विचारों के सम्मान की भी उतनी ही जिम्मेदारी होती है।
सवाल: क्या पृथ्वी पूरी तरह गोल है?
जवाब: पृथ्वी पूरी तरह से गोल नहीं है। वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी को चपटा गोलाकार (Oblate Spheroid) कहा जाता है। यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा के पास थोड़ी उभरी हुई है। ऐसा पृथ्वी के घूर्णन के कारण होता है। इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि पृथ्वी लगभग गोल है, लेकिन पूर्ण रूप से नहीं।
सवाल: पाप और पुण्य में क्या अंतर है?
जवाब: पाप और पुण्य का संबंध केवल धार्मिक नियमों से नहीं, बल्कि मानव व्यवहार और नैतिकता से भी है। जो कार्य समाज, प्रकृति या किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाते हैं और विवेक के विरुद्ध होते हैं, उन्हें पाप कहा जाता है। वहीं जो कर्म दूसरों की भलाई, सहयोग और कल्याण की भावना से किए जाते हैं, वे पुण्य की श्रेणी में आते हैं। इस प्रकार पाप और पुण्य का मूल आधार मानव विवेक और सामाजिक जिम्मेदारी है।
सवाल: क्या शून्य (Zero) की खोज हुई थी या उसका आविष्कार किया गया था?
जवाब: शून्य को लेकर यह कहना अधिक उपयुक्त होगा कि उसका आविष्कार हुआ था, न कि केवल खोज। खोज किसी पहले से मौजूद चीज़ की होती है, जबकि शून्य एक अमूर्त गणितीय अवधारणा है, जिसे मानव बुद्धि ने विकसित किया। वैदिक साहित्य में शून्य की अवधारणा के संकेत मिलते हैं, हालांकि वहां इसके आविष्कारक का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐतिहासिक रूप से आधुनिक गणित में शून्य को एक संख्या के रूप में व्यवस्थित करने और उसका प्रयोग विकसित करने का श्रेय भारतीय गणितज्ञों को दिया जाता है। इस प्रकार शून्य मानव सभ्यता की बौद्धिक उपलब्धि का उदाहरण है।
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