वैकेंसी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों UPSESSB की आधिकारिक साइट upsessb.org पर वैकेंसी रद्द करने की आधिकारिक सूचना देख सकते हैं। यहां हम आपको भर्ती रद्द किए जाने की वजह भी बता रहे हैं। 

करियर डेस्क. UP TGT/PGT Teacher vacancy cancelled: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (UPSESSB) ने अचानक 18 नवंबर 2020 को यूपी शिक्षक वैकेंसी 2020 को रद्द कर दिया। इस भर्ती अभियान के जरिए राज्य में 15508 टीजीटी, पीजीटी पद भरे जाने थे। अब इस भर्ती विज्ञापन और वैकेंसी को रद्द कर दिया गया है। 

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

वैकेंसी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों UPSESSB की आधिकारिक साइट upsessb.org पर वैकेंसी रद्द करने की आधिकारिक सूचना देख सकते हैं। यहां हम आपको भर्ती रद्द किए जाने की वजह भी बता रहे हैं। 

ये है वजह

दरअसल, आधिकारिक नोटिस के अनुसार, विज्ञापन को रद्द करने का निर्णय एक ही लिखित परीक्षा के आधार पर दो तरह से, ad hoc और fresh candidates को जॉइन करवाने की वजह से लिया गया है। जॉइन कराने का यह फैसला गलत पाया गया। कानूनी टीम के साथ परामर्श के बाद, बोर्ड ने शिक्षक पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया।

जिन उम्मीदवारों ने पहले आवेदन किया, उन्हें फिर से आवेदन करना होगा। बोर्ड जल्द ही शिक्षकों की भर्ती के बारे में नए सिरे से अधिसूचना जारी करेगा। जिन उम्मीदवारों ने पहले पदों के लिए आवेदन किया, उन्हें फिर से ऑनलाइन आवेदन करना होगा, लेकिन आवेदन शुल्क नहीं भरना होगा।

29 अक्टूबर को शुरू हुई थी आवेदन प्रक्रिया

चयन प्रक्रिया में टीजीटी पदों के लिए एक लिखित परीक्षा और पीजीटी पदों के लिए लिखित परीक्षा के आलावा साक्षात्कार भी शामिल होगा। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 29 अक्टूबर को शुरू और आवेदन की अंतिम तिथि 27 नवंबर 2020 तक थी। कुल 12913 पदों पर टीजीटी और 2595 पदों को पीजीटी से भरा जाना था।

69000 शिक्षक पदों को भरने की अनुमति मिली

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को मई 2020 में घोषित परिणाम के अनुसार राज्य में 69000 शिक्षक रिक्ति को भरने की अनुमति दी। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा मित्र एसोसिएशन द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें राज्य में सहायक बुनियादी शिक्षकों (assistant basic teachers) के चयन के लिए कट-ऑफ अंक को बरकरार रखने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।