Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी केस में SIT जांच, 8 आरोपी गिरफ्तार, 79.8 लाख बरामद। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच तेज, दान प्रबंधन और पारदर्शिता पर बड़े सवाल।
Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी का मामला देश के सबसे चर्चित मामलों में से एक है। यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर के दान प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT बनाई, सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और अब सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की निगरानी कर रहा है।
क्या है राम मंदिर दान चोरी मामला?
आरोप है राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान और अन्य चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों ने प्लांड तरीके से रकम को चोरी किया। शुरुआती जांच में दावा किया गया कि यह कथित गड़बड़ी कई दिनों तक लगातार चलती रही। मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट को दान की गिनती में कुछ गलत होने का शक पैदा हुआ। इसके बाद इंटर्नल लेबल (आंतरिक स्तर) पर इनपुट इकट्ठा किया गया और और उत्तर प्रदेश सरकार को इसकी जानकारी दी गई।
राम मंदिर दान चोरी मामले में कैसे बनी SIT?
उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर जून 2026 में 3 सदस्यीय SIT का गठन किया। SIT ने कई दिनों तक CCTV फुटेज, कैश काउंटिंग का प्रोसेस, कर्मचारियों की भूमिका और रिकॉर्ड की जांच की। शुरुआती रिपोर्ट में कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई, जिसके बाद FIR दर्ज हुई।
राम मंदिर दान चोरी मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
- ट्रस्ट को डोनेशन में कुछ गलत होने का शक पैदा हुआ।
- यूपी सरकार ने SIT बनाई।
- SIT ने शुरुआती रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंपी।
- रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज हुई।
- सभी 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
- लाखों रुपए की नकदी बरामद की गई।
- ट्रस्ट के 2 सीनियर अधिकारियों का इस्तीफा हुआ।
- मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
- सुप्रीम कोर्ट ने SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी और केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट से जवाब तलब किया।
राम मंदिर दान चोरी मामले में अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
पुलिस ने FIR में नामजद सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट के अनुसार- इनमें मंदिर में दान गिनने वाले कर्मचारी और उनसे जुड़े लोग शामिल हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं-
- अविनाश शुक्ला (मुख्य आरोपी)
- अनुकल्प मिश्रा
- रामशंकर यादव
- करुणेश पांडेय
- सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
- लवकुश मिश्रा
- तथा 2 अन्य आरोपी जिनकी भी गिरफ्तारी हो चुकी है।
राम मंदिर दान चोरी मामले में कौन है मुख्य आरोपी?
SIT की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार- अविनाश शुक्ला को आरोपी नंबर-1 बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार- कथित गबन की पूरी व्यवस्था में उसकी केंद्रीय भूमिका होने के सबूत मिले हैं। जांच एजेंसियां उसके बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य फाइनेन्सियल लेन-देन की भी जांच कर रही हैं।
राम मंदिर दान चोरी मामले में अब तक कितना कैश मिला?
पुलिस और जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार आरोपियों से लगभग 79.8 लाख रुपए बरामद किए हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रस्ट ने जांच स्टार्ट होने से पहले ही कुछ कैश वापस हासिल कर लिया था। हालांकि कुल राशि को लेकर जांच जारी है।
राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए यूपी सरकार से जवाब मांगा। SIT से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी। SIT की संरचना (Composition) की जानकारी मांगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार से भी जवाब तलब किया। कुछ याचिकाओं में CBI जांच और कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग भी की गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
राम मंदिर दान चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने क्या किया?
राज्य सरकार ने SIT का गठन किया। शुरुआती रिपोर्ट के बाद एफआईआर दर्ज कराई। सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। जांच तेज करने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
राम मंदिर दान चोरी मामले में ट्रस्ट ने क्या कदम उठाए?
विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई कदम उठाए।
- महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपना पद छोड़ा।
- प्रोफेशनल CEO अप्वाइंट करने का प्रोसेस स्टार्ट।
- डोनेशन मैनेजमेंट सिस्टम (दान प्रबंधन व्यवस्था) को और ज्यादा ट्रांसपरेंट बनाने पर जोर।
अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण फेज स्टार्ट हो चुका है। पुलिस-SIT आरोपियों के बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति, डिजिटल सबूत, CCTV फुटेज और फाइनेन्सियल लेन-देन की जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इन्वायरी की ट्रांसपरेंसी (पारदर्शिता) पर देश के लोगों की नजर बनी हुई है। अंतिम रिजल्ट कोर्ट में पेश किए जाने वाले सबूतों और जांच रिपोर्ट पर डिपेंड करेगा।


