भारत में अक्सर कप्तानी को लेकर काफी गहमागहमी रहती है। कई बार तो ऐसे हालात बना दिए जाते हैं कि कप्तानी छोड़नी पड़ती है। लेकिन जब हम बात ऑस्ट्रेलिया की करते हैं तो प्रोफेशनलिज्म साफ दिखता है। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एरॉन फिंच ने भी कुछ इसी अंदाज में सन्यास की घोषणा की है। 

Aaron Finch Retirement. ऑस्ट्रेलिया के वनडे कैप्टन एरॉन फिंच ने सन्यास की घोषणी कर दी है। रविवार यानी 11 सितंबर को फिंच न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी वनडे मुकाबला खेलेंगे। एरॉन फिंच ने ऑस्ट्रेलिया में ही होने वाले टी20 विश्वकप से ठीक पहले कप्तानी से अलविदा कहा है। यह ऑस्ट्रेलिया की उस परंपरा का पालन करने जैसा है, जहां महान खिलाड़ी, युवा खिलाड़ियों के लिए खुद ही रास्ता तैयार करते हैं। यही काम एरॉन फिंच ने किया है। टी20 विश्व कप से ठीक पहले फिंच की रिटायरमेंट ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को नये खिलाड़ी आजमाने का मौका देगी। 

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कौन हैं एरॉन फिंच
एरॉन फिंच ने 2023 के विश्व कप में खेलने का टार्गेट सेट किया था लेकिन जब फार्म ने साथ देना छोड़ा तो इस कप्तान ने भी आगे बढ़कर संन्यास की घोषणा कर डाली। यह किसी भी टीम और खिलाड़ी के लिए सबक की तरह है। एरॉन फिंच ने वनडे करियर में कुल 145 मैच खेले हैं और 39.14 की औसत से 5401 रन बनाए हैं। इस फॉर्मेट में फिंच के नाम 17 शतक दर्ज हैं, जो कि ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 5 नंबर पर हैं। रिकी पोंटिंग, मार्क वॉ और डेविड वॉर्नर के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे ज्यादा सेंचुरी जड़ने वाले बल्लेबाज फिंच ही हैं। पोंटिंग ने इस फॉर्मेट में सबसे अधिक 29 शतक जड़े हैं। वहीं डेविड वॉर्नर और मार्क वॉ 18-18 शतक बनाए हैं। फिंच के कुल 17 शतक हैं और 11 सितंबर के मैच में वे 18वां शतक भी ठोक सकते हैं।

सबसे ज्यादा विश्व कप जीतने वाली टीम
ऑस्ट्रेलिया में एक से बढ़कर एक दिग्गज प्लेयर हुए हैं। लेकिन किसी भी खिलाड़ी की रिटायरमेंट और कप्तानी छोड़ने को लेकर कभी कोई बवाल नहीं हुआ। महान कप्तान स्टीव वॉ रहे हों या फिर रिकी पोंटिंग। माइकल क्लार्क रहें हों या एरॉन फिंच सभी ने युवाओं के लिए खुद ही रास्ता बनाया है। हालांकि भारत में ऐसा कम ही नजर आता है। हाल ही में विराट कोहली ने कप्तानी छोड़ी तो विवाद भी सामने आया। विराट ने एशिया कप में भी एक बयान दिया कि उनकी कप्तानी छोड़ने के बाद सिर्फ धोनी का मैसेज आया था। यानी भारत में यह प्रोफेशनलिज्म क्रिकेट में कम ही दिखाई देता है। इसे कुछ हद तक खत्म करने का काम महेंद्र सिंह धोनी ने किया था। 

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