नई दिल्ली. भारत की टेस्ट टीम में हनुमा विहारी अब काफी जाना माना नाम बन चुके हैं। मुश्किल परिस्थितियों में भी क्रीज पर खड़े रहने की क्षमता और धैर्य के साथ बल्लेबाजी की काबीलियत ने काफी कम समय में उन्हें भारतीय टीम का स्थायी सदस्य बना दिया है। टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम के बल्लेबाजों के नाम ज्यादा रन नहीं होते हैं, क्योंकि इस नंबर पर जब भी बल्लेबाजी का मौका मिलता है तब या तो टीम पहले ही काफी रन बना चुकी होती है और कप्तान को पारी घोषित करने की जल्दी होती है या फिर पिच बल्लेबाजी के लिए मुश्किल होती है और आपका टॉप ऑर्डर फेल हो चुका होता है। इसके बावजूद विहारी ने भारत के लिए 9 मैचों में 537 रन बनाए हैं। सफलता की यह कहानी भी संघर्ष से भरी हुई है। 

छोटी उम्र में पिता को खोया 
हनुमा विहारी ने छोटी उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था। इस उम्र में पिता का साया उठने के बावजूद कुछ ही लोग अपने सपनों को हकीकत में बदलने का साहस रख पाते हैं, पर विहारी इनमें से एक थे। उनके अंदर बचपन से ही टीम इंडिया के लिए क्रिकेट खेलने का जुनून था। इसके बावजूद भारतीय टीम में जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान काम नहीं होता है, पर विहारी की मां ने उनके अंदर वो सभी गुण भरे जो एक अच्छे खिलाड़ी और अच्छे इंसान में होने चाहिए। यही वजह रही कि उन्होंने भारतीय टीम में अपने पहले मौके को ही जमकर भुनाया और अब टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। 

मुआवजे के पैसे से मां ने बनावाई थी पिच 
क्रिकबज से बातचीत में विहारी और उनकी मां ने बताया कि जब वो अंडर 13 क्रिकेट खेलते थे तभी उनके पिता की मौत हो गई थी। विहारी उन दिनों अंडर 13 क्रिकेट में रन भी नहीं बना पा रहे थे। उनकी मां को एहसास था कि उन्हें ज्यादा प्रैक्टिस की जरूरत है, पर पिच ना होने के कारण वो पर्याप्त प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे थे। विहारी के पिता की मौत के बाद उनकी कंपनी से उनके परिवार को मुआवजे के रूप में जो पैसे मिले थे, उन्हीं से उनकी मां ने बेटे के लिए क्रिकेट पिच बनवा दी। विहारी रोजाना जमकर प्रैक्टिस करने लगे और इसका नतीजा भी सामने आया। अगली बार जब यह खिलाड़ी स्टेट लेवल अंडर 13 क्रिकेट में खेला तो सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में टॉप पर था। यहीं से उनके स्टार बनने का सफर शुरू हो चुका था। 

साल 2018 में भारत के लिए अपना पहला मैच खेलने वाले विहारी ने अब तक 9 टेस्ट मैचों में 537 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 37 के करीब रहा है। उन्होंने क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में 1 शतक और 4 अर्धशतक भी लगाए हैं। गेंद के साथ भी उन्होंने 5 बल्लेबाजों का शिकार किया है। निचले क्रम में विहारी ने अपने छोटे से करियर में कई बार भारत के लिए उपयोगी पारियां खेली हैं।