जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास में पहली बार खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। फाइनल में मजबूत कर्नाटक को हराकर टीम ने 66 साल का लंबा इंतजार खत्म किया। इस जीत के हीरो आकिब नबी, शुभम पुंडीर और कामरान इकबाल रहे।
हुबली: जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास में वो कर दिखाया है, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। तेज गेंदबाज आकिब नबी की घातक गेंदबाजी, पहली पारी में शुभम पुंडीर और दूसरी पारी में कामरान इकबाल के शानदार शतकों की बदौलत टीम ने मजबूत कर्नाटक को हराकर अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीत लिया है।
66 साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म
पिछले 66 सालों के रणजी इतिहास में जम्मू-कश्मीर को कभी भी एक मजबूत दावेदार नहीं माना गया। लेकिन इस बार टीम ने सारे समीकरण बदल दिए और भारत का सबसे प्रतिष्ठित फर्स्ट-क्लास क्रिकेट टाइटल अपने नाम कर लिया। जम्मू-कश्मीर ने अपना पहला रणजी मैच 1960 में खेला था। टीम को अपनी पहली जीत के लिए 22 साल का इंतजार करना पड़ा। 1982 में अपने 99वें मैच में टीम को पहली बार जीत मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि उसी साल कर्नाटक ने अपना तीसरा रणजी खिताब जीता था। 2025-26 का यह ऐतिहासिक फाइनल जम्मू-कश्मीर के इतिहास का 346वां मैच था और यह उनकी कुल 47वीं जीत है। इस सीजन में टीम सिर्फ एक मैच हारी है, जो श्रीनगर में मुंबई के खिलाफ था।
जम्मू-कश्मीर का शानदार खेल
पहली पारी में 584 रन बनाने के बाद जम्मू-कश्मीर ने अपनी दूसरी पारी 342/4 के स्कोर पर घोषित कर दी। ओपनर कामरान इकबाल 311 गेंदों पर 160 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि साहिल लोत्रा ने 226 गेंदों पर 101 रन बनाए। जब दोनों टीमों ने हाथ मिलाया (मैच ड्रॉ हुआ), तब तक उनकी साझेदारी 197 रन की हो चुकी थी और जम्मू-कश्मीर की कुल बढ़त 633 रनों की हो गई थी।
इससे पहले, पहली पारी में पुंडीर ने 247 गेंदों पर 121 रन बनाए थे। उनके अलावा यावर हसन (88), कप्तान पारस डोगरा (70), अब्दुल समद (61), कन्हैया वाधवन (70) और साहिल लोत्रा (72) ने भी अर्धशतक लगाकर टीम को 584 के विशाल स्कोर तक पहुंचाया था।
291 रनों की बढ़त ने तय की जीत
पहली पारी में 291 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर जम्मू-कश्मीर (J&K) ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। कर्नाटक के लिए वापसी का एकमात्र रास्ता यही था कि वह दूसरी पारी में J&K को सस्ते में आउट कर दे और फिर लक्ष्य का पीछा करे।
दूसरी पारी में एक समय J&K का स्कोर 11 रन पर 2 विकेट था, जिससे कर्नाटक की उम्मीदें जाग गई थीं। लेकिन कामरान इकबाल ने संकटमोचक की तरह बल्लेबाजी की। उन्होंने न सिर्फ नई गेंद का सामना किया, बल्कि पारस डोगरा और अब्दुल समद के साथ दो अहम अर्धशतकीय साझेदारियां भी कीं। इसके बाद, इकबाल और साहिल लोत्रा ने बेहद सधी हुई बल्लेबाजी करते हुए कर्नाटक के लिए वापसी के सारे दरवाजे बंद कर दिए। दोनों ने शानदार शतक जड़े और टीम की जीत पक्की कर दी।
