प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) पर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को रद्द करने का दबाव बढ़ गया है। 

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) पर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को रद्द करने का दबाव बढ़ गया है। इस टूर्नामेंट के कैंसिल होने पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड को 2 हजार करोड़ रुपयों का नुकसान होगा, जबकि हर फ्रेंचाइजी को इससे 100 करोड़ रुपयों का घाटा लगेगा।

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बीसीसीआई ने इस महीने की शुरुआत में आईपीएल को 15 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया था तब उसने कहा था कि टूर्नामेंट की मेजबानी केवल स्थिति में सुधार होने पर किया जाएगा । लेकिन इसमें सुधार होने की जगह स्थिति और गंभीर हो गयी जहां भारत में इस वायरस के चपेट में लगभग पांच सौ लोग आ गये है।

गांगुली बोले अभी कुछ नहीं कह सकता 
बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पीटीआई कहा था कि गंभीर स्थिति को देखते हुए उनके पास इस मामले पर कहने के लिए कुछ नहीं है। गांगुली ने कहा, ‘‘मैं फिलहाल कुछ नहीं कह सकता। हम उसी स्थान पर हैं जहां हम इसे निलंबित करने वाले फैसला लेते समय थे। पिछले 10 दिनों में कुछ भी नहीं बदला है। ऐसे में मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है। यथास्थिति बनी हुई है।’’

किंग्स इलेवन पंजाब के सह-मालिक नेस वाडिया इस मुद्दे पर अधिक स्पष्ट दिखे। वाडिया ने कहा, ‘‘ बीसीसीआई को वास्तव में आईपीएल को अब स्थगित करने पर विचार करना चाहिए। एक प्रमुख खेल आयोजन के तौर पर हमें बड़ी जिम्मेदारी के साथ काम करने की जरूरत है।’’