लांबा टीम में नहीं थे पर के श्रीकांत मैदान के बाहर गए और लांबा उनकी जगह फील्डिंग करने आ गए। थोड़ी देर बाद श्रीकांत आवस मैदान पर आ गए, पर उन्होंने किसी को इस बात की जानकारी नहीं दी। रवि शास्त्री गेंदबाजी के लिए तैयार थे, पर किसी को भी अंदाजा नहीं था कि भारत के 12 खिलाड़ी मैदान पर हैं। 

नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर अक्सर अजीबो गरीब मामले सामने आते रहते हैं। कभी अंपायर की गलती से तो कभी खिलाड़ियों के कारण मैच के दौरान चौकाने वाली घटनाएं होती रहती हैं, जिन्हें सुनकर भरोसा ही नहीं होता कि ऐसा कुछ भी मैदान के अंदर हुआ होगा। हम आपको आज ऐसी ही एक घटना के बारे में बता रहे हैं। जब भारतीय टीम के 12 खिलाड़ी एक साथ मैदान पर थे और पूरे एक ओवर तक यही हाल रहा था, पर अंपायर ने इस ओवर की किसी भी गेंद को नो बॉल नहीं करार दिया था।

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यह मामला भारतीय टीम के 1986 दौरे का है। रमन लांबा भारतीय टीम में नए-नए खिलाड़ी थे और कप्तान सब्स्टीट्यूट फील्डर के रूप में उनका इस्तेमाल कर रहे थे। लांबा टीम में नहीं थे पर के श्रीकांत मैदान के बाहर गए और लांबा उनकी जगह फील्डिंग करने आ गए। थोड़ी देर बाद श्रीकांत आवस मैदान पर आ गए, पर उन्होंने किसी को इस बात की जानकारी नहीं दी। रवि शास्त्री गेंदबाजी के लिए तैयार थे, पर किसी को भी अंदाजा नहीं था कि भारत के 12 खिलाड़ी मैदान पर हैं। शास्त्री ने अपना पूरा ओवर खत्म कर दिया पर किसी को पता नहीं चला कि भारत 12 खिलाड़ियों के साथ खेल रहा है। ओवर के बाद सभी को इसका एहसास हुआ और बिना मैच खेले ही रमन लांबा के साथ अनोखी याद जुड़ गई। 

इस टूर के बाद ही रमन लांबा ने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई थी। लांबा अपनी निडर फील्डिंग के लिए जाने जाते थे। हालांकि इसी वजह से उन्हें मैदान पर ही मौत का सामना करना पड़ा था। बांग्लादेश के खिलाफ उस मैच में सिर्फ 3 गेंद बची थी, जब लांबा को प्वाइंट पर फील्डिंग के लिए बुलाया गया। सभी ने लांबा से हेलमेट पहनने को कहा पर उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि सिर्फ 3 गेंद ही बची हैं। इसी ओवर की तौथी गेंद पर बल्लेबाज ने पुल किया। गेंद सीधा जाकर रमन लांबा के सिर पर लगी, जिसके कारण वो कोमा में चले गए और 2 दिन बाद ही उनकी मौत हो गई थी।