Gujarat Assembly Election 2022: कांग्रेस में इस बार कोई भी बड़ा आदिवासी चेहरा नहीं होने से पार्टी इन क्षेत्रों में बैकफुट पर नजर आ रही है। पार्टी के बड़े आदिवासी नेता और दस बार विधायक रहे मोहन सिंह राठवा अब भाजपा में हैं। 

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव के बीच पहले चरण की वोटिंग गुरुवार, 1 दिसंबर को है। हालांकि, चुनाव में इस बार भाजपा और आप जोर लगाती दिख रही है, जबकि कांग्रेस इस बार बैकफुट नजर आ रही है। आदिवासी समुदाय के उसके कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर चले गए हैं। इनमें उसके सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक और 10 बार के विधायक मोहन सिंह राठवा ने चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम लिया था। 

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बता दें कि मोहन सिंह राठवा छोटा उदेपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जहां तक आदिवासी सीटों की बात है तो अभी नतीजों का अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि, कांग्रेस पर राठवा के बाहर निकलने का प्रभाव निश्चित तौर पर पड़ेगा। भाजपा ने इस क्षेत्र में पैठ बना ली है। इसके अलावा, पहले से दो आदिवासी जिलों महिसागर और दाहोद में कुछ सीटें जीत मजबूत स्थिति में है। ऐसे में इन सीटों पर दोनों पार्टियों के पास अब समान अवसर है। यह संगठनात्मक ताकत और व्यक्तित्व पर निर्भर करेगा तथा साथ ही उम्मीदवारों की लोकप्रियता पर भी कि बाजी कौन मारेगा। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि कांग्रेस के पास इस बार कोई बड़ा आदिवासी चेहरा नहीं है, इसलिए वह इन क्षेत्रों में बैकफुट पर नजर आ रही है। 

उम्मीदवार तय करते हैं कि उन्हें वोट कौन दे रहा 
दरअसल, इस बार मोहन सिंह राठवा के बेटे राजेंद्र सिंह राठवा को भाजपा ने आदिवासी आरक्षित छोटा उदेपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। राजेंद्र सिंह राठवा का दावा है कि इस क्षेत्र में ज्यादातर लोग उनको ही वोट देंगे, चाहे वे किसी भी पार्टी से जुड़े हों। राठवा के अनुसार, एक पार्टी के वोट अपनी जगह होते हैं, मगर कई बार उम्मीदवार भी तय करते हैं कि उन्हें कौन वोट दे रहा है। उम्मीदवारों को सामाजिक स्तर पर भी वोट मिलते हैं और वे दूसरी पार्टी से जुड़े लोग भी हो सकते हैं। 

मोहन सिंह की वजह से लोग भाजपा को वोट करेंगे 
राठवा ने यह भी कहा कि कुछ नेता ऐसे होते हैं, जिनमें लीडरशिप की क्वॉलिटी होती है। वे उस पार्टी से प्रभावित नहीं होते, जिसमें वे शामिल होते हैं। राठवा के अनुसार, मोहन सिंह एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपनी पार्टी से संबद्धता के बावजूद सभी को साथ रखा। उन्होंने अपने व्यक्तिगत नेतृत्व गुणों के जरिए क्षेत्र में कांग्रेस को बढ़ाया है। अब वह भाजपा में शामिल हो चुके हैं, ऐसे में लोग उनकी वजह से भाजपा को वोट देंगे। 

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