बिक्रम मजीठिया से मुकाबले में घिरे नवजोत सिंह सिद्धू, जानें आखिर पार्टी से क्यों मांग रहे अब दूसरी सीट?

| Jan 28 2022, 06:15 PM IST

बिक्रम मजीठिया से मुकाबले में घिरे नवजोत सिंह सिद्धू, जानें आखिर पार्टी से क्यों मांग रहे अब दूसरी सीट?

सार

राजनीतिक समीक्षक वीरेंद्र भारत ने बताया कि पहला मौका है, जब नवजोत सिंह सिद्धू फंसते नजर आ रहे हैं। अभी तक की राजनीति करियर में उनकी इतनी घेराबंदी पहले कभी नहीं हुई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के सामने दिक्कत यह है कि ना सिर्फ स्वयं बल्कि पार्टी की जिम्मेदारी भी अब उनके ऊपर है। 

मनोज ठाकुर, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव में अमृतसर ईस्ट सबसे हॉट सीट बन गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू इस बार कड़े मुकाबले में हैं। अकाली दल की ओर से बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी उनके सामने ताल ठोक दी है। मजीठिया ने दूसरी सीट मजीठा से भी नामांकन किया है। ये मजीठिया की पारंपरिक सीट है। इस तरह से अकाली दल के उम्मीदवार ने खुद को सेफ कर लिया है। इधर, सिद्धू भी चाहते हैं कि उन्हें भी पार्टी दूसरी सीट से टिकट दे, जिससे वह सेफ जोन में रह सकें। बताया जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें पटियाला से कैप्टन के खिलाफ उतारने को बोला है। अब देखना यह है कि क्या सिद्धू पार्टी के इस ऑफर को मानते हैं या नहीं।

फंस रहे हैं गुरु
राजनीतिक समीक्षक वीरेंद्र भारत ने बताया कि पहला मौका है, जब नवजोत सिंह सिद्धू फंसते नजर आ रहे हैं। अभी तक की राजनीति करियर में उनकी इतनी घेराबंदी पहले कभी नहीं हुई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के सामने दिक्कत यह है कि ना सिर्फ स्वयं बल्कि पार्टी की जिम्मेदारी भी अब उनके ऊपर है। इस तरह से उनका अपना प्रदर्शन तो मायने रखता ही है, यह भी मायने रखेगा कि पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहा है? अमृतसर पूर्व की सीट पर सिद्धू को इतनी तगड़ी चुनौती पहले नहीं मिली है। जितनी इस बार मिली है। इससे भी बड़ी बात तो यह है कि यह चुनौती सिर्फ सियासी नहीं है, बल्कि अकाली दल उम्मीदवार इसे व्यक्तिगत मान कर चल रहे हैं। मजीठिया इस सीट पर पूरी ताकत लगाए हुए हैं।

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इस बार विवाद भी विपरीत जा रहे हैं 
सिद्धू को यह बात अच्छे से पता है कि किस मौके को कैसे कैश करना है। इससे पहले जितने भी विवाद हुए, उन्हें इसका फायदा ही मिला। वह चाहे भाजपा छोड़ने का हो, कांग्रेस ज्वाइन करने से पहले के विवाद हो। कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद भी वह विवादों रहे। कैप्टन को लेकर उन्होंने लगातार मोर्चा खोल कर रखा। जो उन्हें चर्चा में बनाए रखा। इस सब के बीच कांग्रेस ने उन्हें प्रदेशाध्यक्ष बना दिया। वह भी तब जब उस वक्त सीएम पद पर कैप्टन अमरिंदर सिंह थे। कांग्रेस में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सीएम पद पर यदि सिख है तो प्रदेश अध्यक्ष गैर सिख चेहरा हो, जिससे बैलेंस बना रहे। सिद्धू मामले में कांग्रेस ने यहां भी समझौता कर लिया। यह अलग बात है कि बाद में कैप्टन को सीएम पद से हटा दिया गया। 

मजीठिया से विवाद पड़ रहा है भारी 
कोशिश तो यह थी कि मजीठिया आरोपों में फंसकर जेल चले जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई। पंजाब के पत्रकार सुखदेव सिंह चीमा कहते हैं कि मजीठिया केस को लेकर सिद्धू ने होमवर्क अच्छे से नहीं किया। कई जांच टीमों ने मजीठिया के खिलाफ आरोप पुख्ता ना होने की बात बोली है। इसके बाद भी सिद्धू अडे़ रहे। अब केस बन तो गया, लेकिन मजीठिया इसे अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका उन्हें लाभ भी मिल रहा है। पंजाब के मतदाता समझ रहे हैं कि मजीठिया को फंसाया गया है। हालात अपनी ओर होता देख मजीठिया भी अब फुल फॉर्म में आ गए। सिद्धू के खिलाफ अपनी उम्मीदवारी पेश कर उन्होंने  जोरदार हमला बोल दिया। 

सीएम फेस भी नहीं बनाया गया
सिद्धू लगातार इस कोशिश में है कि एक बार सीएम की कुर्सी पर आ जाए। वह कुर्सी को लेकर जितना उतावले हो रहे हैं, यह कुर्सी उतना ही उनसे दूर खिसकती जा रही है। कैप्टन को बदलने की परिस्थितियों में भी उन्हेंने खूब जोर लगाया कि उन्हें सीएम बनाया जाए। पार्टी ने दांव चरणजीत सिंह चन्नी पर खेल लिया। चन्नी ने इस मौके का फायदा उठाते हुए खुद को सीएम के तौर पर स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब स्थिति यह है कि कैप्टन के सीएम कुर्सी पर अब उनके सामने चन्नी खड़े हैं। जिसकी काट फिलहाल उनके पास नहीं है। 

पार्टी ने भी रणनीति से काम लिया
सिद्धू को लेकर कांग्रेस रणनीतिकारों ने भी खूब संयम दिखाया। क्योंकि जानते थे, सिद्धू फिसल सकते हैं। उन्हें रोके रखना बेहद जरूरी था। कैप्टन के सीएम पद से हटने के बाद भी कई माैकों पर सिद्धू आक्रमक हुए। इससे उनकी अपनी पार्टी भी सकते में आ गई। कई बार तो सीएम चन्नी पर भी सवाल खड़ा कर दिया। लेकिन पार्टी की ओर से उन्हें कोई मौक नहीं दिया गया कि वह इधर उधर हो सके। क्योंकि पार्टी के रणनीतिकार जानते थे, यदि सिद्धू की बातों को तवज्जो नहीं दी तो वह बगावत भी कर सकते हैं। इसलिए पार्टी ने धर्य बनाते हुए उन्हें बहुत ही कुशल तरीके से अब इस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। जहां उनके सामने कांग्रेस और खुद के लिए लड़ने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा है। 

रही सही कसर बहन ने पूरी कर दी
अभी सिद्धू पार्टी और मजीठिया के झटकों से उभरने की कोशिश कर ही रहे थे। शुक्रवार को सुमन तूर ने खुद को बहन बताते हुए सिद्धू पर हमला बोल दिया। उन्होंने जो आरोप लगाए, वह काफी संवेदनशील हैं। यूं भी पंजाब में बुजुर्गों को पूरा मान सम्मान देने की परंपरा रही है। सुमन तूर ने सिदधू पर आरोप जड़ा कि उन्होंने मां को घर से निकाल दिया। उनकी मौत स्टेशन पर लावारिश इंसान की तरह हुई। इस तरह की बातों से सिद्धू की छवि को खासा नुकसान पहुंचा है। क्योंकि तमाम विवादों के बाद भी सिद्धू की छवि, कड़क, सिद्धांतवादी और मूल्यों और परंपराओं में यकीन रखने वाले नेता की थी। बहन के आरोपों से यह छवि टूटती हुई नजर आ रही है। निश्चित इसका असर उन पर पड़ सकता है।

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