15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई ‘शोले’ की ग्लोबल दीवानगी को लेकर महानायक अमिताभ बच्चन ने हाल ही में एक किस्सा सुनाया। उनके मुताबिक़, 2025 में इटली में इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला।

मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने अपनी आइकॉनिक फिल्म ‘शोले’ से जुड़ा ऐसा किस्सा साझा किया है, जो बताता है कि हिंदी सिनेमा की यह क्लासिक सीमाओं से कितनी दूर तक पहुंची। ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के हालिया एपिसोड में उन्होंने बताया कि इटली के बोलोन्या में करीब 2,000 लोगों ने खुले चौक में रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक ‘शोले’ की रीस्टोर्ड कॉपी देखी। फिल्म की नई बहाल की गई प्रिंट का वर्ल्ड प्रीमियर जून 2025 में बोलोन्या में हुआ था। 1975 में रिलीज हुई यह फिल्म आज भी अपने किरदारों, संवादों, संगीत और कहानी की वजह से भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है।

इटली में ‘शोले’ को लेकर अमिताभ बच्चन ने क्या बताया?

अमिताभ बच्चन ने बताया कि 3 घंटे 24 मिनट की इस फिल्म की नई रीस्टोर्ड प्रिंट को इटली के बोलोन्या शहर के एक ऐतिहासिक केंद्रीय चौक में प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने कहा, “हाल ही में, उन्होंने जब शोले फिर से, उसका निर्धारण हुआ, अच्छे प्रिंट में बन गए, तो वो फिल्म हेरिटेज में शिवेंद्र सिंह जी हैं जो इसका काम कर रहे हैं। ये ले गए इसको इटली में, भाईसाहब बोलोन्या एक जगह है, शहर का नाम है, वहां एक बहुत बड़ा आंगन है। जैसे बड़े-बड़े शहरों में बीच में शहर में एक आंगन होता है ना, वहां पर 2,000 इटालियंस, रात के 11 बजे से सुबह 3 बजे तक शोले देखा।” फिल्म की रीस्टोर्ड कॉपी का वर्ल्ड प्रीमियर 27 जून 2025 को बोलोन्या में ‘शोले’ की 50वीं सालगिरह के समारोह के तहत हुआ था।

क्यों खास है ‘शोले’ की कहानी?

रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी ‘शोले’ 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी। कहानी रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ठाकुर बलदेव सिंह के इर्द-गिर्द घूमती है, जो डाकू गब्बर सिंह को पकड़ने के लिए छोटे-मोटे अपराधी जय और वीरू की मदद लेता है। फिल्म में संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, अमजद खान, हेमा मालिनी और जया भादुड़ी प्रमुख भूमिकाओं में थे। फिल्म में एक्शन, ड्रामा, रोमांस, कॉमेडी और त्रासदी को एक साथ पिरोया गया था।

‘शोले’ का संगीत आज भी क्यों याद है?

फिल्म का संगीत आर.डी. बर्मन ने दिया था और गीत आनंद बख्शी ने लिखे थे। इसके गाने आज भी लोकप्रिय हैं, जिनमें ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’, ‘होली के दिन’, ‘कोई हसीना जब रूठ जाती है’, ‘महबूबा महबूबा’ और ‘जब तक है जान’ शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि रिलीज के शुरुआती दौर में ‘शोले’ को दर्शकों की कमजोर प्रतिक्रिया मिली थी और फिल्म के असफल होने की चर्चा होने लगी थी। लेकिन धीरे-धीरे माउथ पब्लिसिटी ने माहौल बदल दिया। फिल्म सुपरहिट बनी और लंबे समय तक सिनेमाघरों में चलने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। इसके बाद इसके डायलॉग्स, किरदार और संगीत लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन गए। कर्नाटक के रामनगर के पथरीले इलाकों में फिल्म की बड़े पैमाने पर शूटिंग ने इसके दृश्य संसार को भी खास पहचान दी।