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भोजपुरी सिनेमा की पहली फिल्म कौन-सी थी? पहले एक्टर-एक्ट्रेस के बारे में भी जानिए?
भोजीवुड यानी भोजपुरी सिनेमा देश की सबसे पॉपुलर फिल्म इंडस्ट्रीज में से एक है। यह बात अलग है कि इस इंडस्ट्री की फ़िल्में अभी पैन इंडिया की पहुंच से दूर हैं। लेकिन यूपी और बिहार में यह काफी मशहूर है। क्या आप जानते पहली भोजपुरी फिल्म कौन-सी थी...?

भोजपुरी सिनेमा की पहली फिल्म कौन-सी?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़, भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत 1963 में हुई थी। पहली बार जो फिल्म भोजपुरी में बनाई गई थी, वह थी 'गंगा मैया तोहे पियरी चढइबो'। फिल्म की कहानी बिहार-उत्तर प्रदेश के ग्रामीण समाज, परम्पराओं और संस्कृति पर आधारित थी। बताया जाता है कि जब यह फिल्म रिलीज हुई तो ना केवल बॉक्स ऑफिस पर सक्सेसफुल रही, बल्कि इसे खूब तारीफ़ भी मिली। एक अखबार ने तो यह तक लिख दिया था कि भोजपुरी फ़िल्में सामाजिक बुराइयों को उजागर करने में अहम् भूमिका निभा सकती हैं।
कौन थे पहली भोजपुरी फिल्म के डायरेक्टर
पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मैया तोहे पियरी चढइबो' का निर्देशन कुंदन कुमार ने किया था। बाद में उन्होंने 'परदेसी' जैसी भोजपुरी फिल्म भी बनाई, जो दिग्गज भोजपुरी उपन्यासकार कुशवाहा कांत के नॉवेल पर आधारित थी। कुशवाहा कांत वही लेखक थे, जिन्होंने कथिततौर पर महज 33 साल की उम्र में 37 किताबें लिख दी थीं और 29 फ़रवरी 1952 को कुछ अज्ञात हमलावरों ने उनकी चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी।
भोजपुरी फिल्मों की पहली हीरोइन कौन थीं?
भोजपुरी फिल्मों की पहली हीरोइन कुमकुम थीं, जिन्होंने बॉलीवुड की 'आंखें', 'मदर इंडिया', 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' और 'नया दौर' जैसी पॉपुलर फिल्मों में काम किया था। उनका असली नाम सैय्यदा जबुन्निसा था। पहली भोजपुरी फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' से उन्होंने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।
पहली भोजपुरी फिल्म में हीरो कौन था?
भोजपुरी सिनेमा की नींव रखने वाली फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' में लीड रोल अशीम कुमार ने निभाया था। अशीम ने बॉलीवुड में 'देवदास', 'हीरा मोती', 'लागी नहीं छूटे राम', 'लव कुश' और 'पैसा या प्यार' जैसी फिल्मों में भी काम किया था।
लता मंगेशकर जैसे सिंगर्स ने गाए थे फिल्म के गाने
भोजपुरी की पहली फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' का संगीत चित्रगुप्त ने दिया था, जबकि इसके गाने लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी जैसे सिंगर्स ने गाए थे। शैलेंद्र ने इसके गाने लिखे थे।
किसने लिखी थी 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' की कहानी
कहा जाता है कि जद्दनबाई (नरगिस की मां और संजय दत्त की नानी) के कहने पर नाज़िर हुसैन ने भोजपुरी में 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' की कहानी लिखी थी। 1950 में एक फंक्शन के दौरान देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से नाजीर हुसैन की इस विषय पर चर्चा हुई और उन्होंने उन्हें भोजपुरी में फिल्म बनाने को कहा। व्यवसायी विश्वनाथ प्रसाद शाहाबाद इसके फाइनेंसर बनें, जिनका अपना स्टूडियो और सिनेमा हॉल भी था। बिहटा, पटना और आरा में इसकी शूटिंग हुई। कुछ हिस्से बनारस में भी फिल्माए गए। फ़रवरी 1962 में यह बनारस के प्रकाश टॉकीज में लगी और 22 फ़रवरी 1963 को इसे पटना के वीणा टॉकीज में रिलीज किया गया।
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