IFS अफसर बनने का सपना देखने वाले चंद्रचूड़ सिंह किस्मत के चलते बॉलीवुड स्टार बने। लेकिन एक हादसे, गलत फैसलों और इंडस्ट्री की चुनौतियों ने उनका करियर बदल दिया।

बॉलीवुड में कई सितारों की सफलता की कहानियां मशहूर हैं, लेकिन चंद्रचूड़ सिंह की कहानी सबसे अलग है। शाही परिवार में जन्मे चंद्रचूड़ कभी भारतीय विदेश सेवा (IFS) में जाने का सपना देखते थे और यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि थिएटर से फिल्मों तक पहुंचे और 1996 में 'तेरे मेरे सपने' तथा 'माचिस' जैसी फिल्मों से रातोंरात स्टार बन गए। हालांकि साल 2000 में हुए एक गंभीर हादसे, कई अधूरी फिल्मों और गलत करियर फैसलों ने उनके चमकते करियर की रफ्तार थाम दी। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी की पूरी कहानी।

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चंद्रचूड़ सिंह कहां पैदा हुए, ओड़िसा से क्या है रिश्ता?

चंद्रचूड़ सिंह का जन्म 11 अक्टूबर 1968 को सेना अधिकारी, पूर्व विधायक बलदेव सिंह और ओडिशा की पूर्व रियासत पटना की राजकुमारी कृष्णा कुमारी देवी के घर अलीगढ, उत्तर प्रदेश में हुआ। पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले चंद्रचूड़ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखते थे, क्रिकेट खेलते थे और हाई जंप में रिकॉर्ड भी बना चुके थे। उनका सपना एक्टर बनना नहीं, बल्कि भारतीय विदेश सेवा (IFS) या IAS अधिकारी बनना था। उन्होंने समर सरीला को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, "आईएफएस में जाना मेरा पहला लक्ष्य था और अगर नहीं, तो आईएएस। मैं यूपीएससी की तैयारी समझने के लिए कई सिविल सर्वेंट्स से मिलता था।"

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थिएटर ने कैसे बदल दी चंद्रचूड़ सिंह की जिंदगी?

सेंट स्टीफंस कॉलेज में पढ़ाई के दौरान चंद्रचूड़ सिंह थिएटर से जुड़े। पहले ही साल उन्हें राजपाल मेमोरियल में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। उन्होंने कहा, "रचनात्मकता हमेशा से मेरी जिंदगी का हिस्सा थी। कॉलेज में मुख्य भूमिकाएं निभाते-निभाते मुझे बिना मुंबई गए फिल्मों के ऑफर मिलने लगे।" यहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हो गया।

पहली फिल्म रिलीज ही नहीं हुई, फिर कैसे मिला बड़ा ब्रेक?

1988 में उन्होंने महेश भट्ट के साथ असिस्टेंट के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्हें सुचित्रा कृष्णमूर्ति के साथ फिल्म 'जब प्यार किया तो डरना क्या' मिली, लेकिन करीब 60 फीसदी शूटिंग के बाद फिल्म बंद हो गई। उन्होंने कहा, "मैंने फिल्मों को कभी करियर के रूप में नहीं चुना। हालात मुझे फिल्मों में लेकर आए।" इसके बाद कई फिल्में बंद हो गईं और उन्हें दिल्ली लौटकर स्कूल में बच्चों को पढ़ाना पड़ा।

'तेरे मेरे सपने' और 'माचिस' ने कैसे बनाया सुपरस्टार?

जब चंद्रचूड़ सिंह को स्कूल में स्थायी नौकरी मिल चुकी थी, तभी उन्हें 'तेरे मेरे सपने' का ऑफर मिला। उसी दौरान 'माचिस' भी मिली। उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली में बच्चों को पढ़ा रहा था। जैसे ही स्थायी नौकरी मिली, 'तेरे मेरे सपने' का फोन आ गया। उसी समय 'माचिस' भी मिली और मैंने नौकरी छोड़ दी।" अमिताभ बच्चन के प्रोडक्शन हाउस की 'तेरे मेरे सपने' और गुलजार की 'माचिस' ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। 'माचिस' के लिए उन्हें 1997 का फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड भी मिला।

अमिताभ बच्चन से तुलना ने क्यों बढ़ा दिया दबाव?

फिल्मों में शानदार शुरुआत के बाद मीडिया ने चंद्रचूड़ सिंह की तुलना अमिताभ बच्चन से करनी शुरू कर दी। इस पर उन्होंने कहा, "अमिताभ बच्चन एक संस्था हैं। उन्होंने मुझे पहला ब्रेक दिया। सिर्फ एक फिल्म के बाद उनकी तुलना मुझसे होना मेरे लिए बहुत बड़ा दबाव था। मैं खुद को अमित जी के आसपास भी नहीं मानता।" चंद्रचूड़ सिंह का मानना है कि इंडस्ट्री में बाहरी होने का नुकसान उन्हें झेलना पड़ा। बकौल सिंह, "मुझे कभी सोलो हीरो वाली फिल्में नहीं मिलीं। शायद इसलिए क्योंकि मैं फिल्मी परिवार से नहीं था। किसी आउटसाइडर के लिए इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करना बहुत मुश्किल होता है।"

किस हादसे ने चंद्रचूड़ सिंह के करियर की तबाह कर दिया?

साल 2000 में गोवा में 'जोश' की शूटिंग के दौरान छुट्टी वाले दिन चंद्रचूड सिंह के साथ समुद्र में एक गंभीर हादसा हुआ। चंद्रचूड़ सिंह ने बताया, "समुद्र में करीब दो किलोमीटर अंदर मेरा एक्सीडेंट हुआ। मेरा कंधा इतनी बुरी तरह डिसलोकेट हुआ कि हाथ लगभग शरीर से अलग हो गया था।" सर्जरी, लंबी फिजियोथेरेपी और लगातार दर्द की वजह से उनकी शूटिंग रुक गई। वह एक्सरसाइज नहीं कर पाए और उनका वजन भी बढ़ गया। 

हालांकि, चंद्रचूड़ सिंह का मानना है कि सिर्फ हादसा ही नहीं, बल्कि कई कारण उनके करियर पर असर डाल गए। उन्होंने कहा, "यह कई चीजों का मेल था। सफलता, असफलता, गलत फैसले... सबने मिलकर असर डाला।" आगे उन्होंने स्वीकार किया, "मैंने कुछ गलत फैसले लिए। सफलता भी इंसान को हकीकत से उतना ही दूर कर देती है, जितनी असफलता।"

फिल्मों से दूर रहने के बाद क्या कर रहे थे चंद्रचूड़ सिंह?

फिल्मों से दूरी के दौरान उन्होंने खाना बनाने का शौक अपनाया और 2012 में 'रॉयल रसोई' नाम का टीवी शो भी होस्ट किया। इसके बाद उन्होंने 2020 में वेब सीरीज 'आर्या' से डिजिटल दुनिया में वापसी की। इसके बाद 'कठपुतली' और 'बयान' जैसे प्रोजेक्ट्स में भी नजर आए। 

अपनी जिंदगी को लेकर चंद्रचूड़ सिंह कहते हैं, "अगर मैं एक्टर नहीं बनता, तो एक शिक्षक जरूर बनता।" उनका मानना है कि उन्होंने कभी स्टारडम के पीछे भागने की कोशिश नहीं की और आज भी उन्हें अपने फैसलों का कोई अफ़सोस नहीं है।