Netflix की नई थ्रिलर ‘Ghooskhor Pandat’ क्यों आई विवादों में? क्यों भड़के लोग
Ghooskhor Pandat Title Dispute: Netflix की अपकमिंग थ्रिलर ‘Ghooskhor Pandat’ विवादों में घिर गई है। टाइटल को लेकर कानूनी नोटिस, ब्राह्मण समुदाय का विरोध और दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका के बाद फिल्म की रिलीज पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Netflix की नई थ्रिलर ‘Ghooskhor Pandat’ विवादों में, टाइटल पर उठे गंभीर सवाल
Netflix की अपकमिंग थ्रिलर फिल्म ‘Ghooskhor Pandat’ रिलीज से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। मुंबई में आयोजित ‘Next on Netflix’ इवेंट में जैसे ही इस फिल्म का टीज़र लॉन्च हुआ, वैसे ही सोशल और कानूनी हलकों में इस पर बहस शुरू हो गई। दमदार कंटेंट और मजबूत स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म का टाइटल अब इसके मेकर्स के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।
एक रात की कहानी, एक भ्रष्ट पुलिस अफसर का किरदार
फिल्म में मनोज बाजपेयी अजय दीक्षित नाम के एक भ्रष्ट और नैतिक रूप से कमजोर पुलिस अफसर की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे ‘Pandat’ के नाम से जाना जाता है। कहानी एक ही रात के भीतर घटती है, जब दीक्षित को सड़क पर एक गंभीर रूप से घायल लड़की मिलती है, जिसे चलती कार से फेंक दिया गया होता है। यही घटना उसे एक बड़े और खतरनाक षड्यंत्र की ओर ले जाती है।
फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है और कहानी रितेश शाह व नीरज पांडे ने मिलकर लिखी है। मनोज बाजपेयी के साथ नुसरत भरुचा और साकिब सलीम भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।
विवाद की शुरुआत: टीज़र रिलीज के बाद कानूनी नोटिस
विवाद तब शुरू हुआ जब मुंबई के एक वकील आशुतोष दुबे ने Netflix और फिल्म के निर्माताओं को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताते हुए इसे आपत्तिजनक और मानहानिकारक बताया गया है। मुख्य आपत्ति ‘Pandat’ शब्द को ‘Ghooskhor’ जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ने को लेकर है।
‘Pandat’ शब्द पर आपत्ति क्यों?
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि ‘Pandat’ शब्द, जो ‘Pandit’ से जुड़ा माना जाता है, भारतीय सभ्यता में ज्ञान, नैतिकता, धार्मिक और बौद्धिक सम्मान का प्रतीक रहा है। नोटिस के अनुसार, इस शब्द को रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से जोड़ना न सिर्फ आपत्तिजनक है, बल्कि एक पूरे समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाने जैसा है।
नोटिस में यह भी दलील दी गई है कि भ्रष्टाचार किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत नैतिक कमजोरी हो सकती है, लेकिन इसे किसी समुदाय की पहचान से जोड़ना अनुचित और भ्रामक है।
क्या मांग की गई है मेकर्स से?
कानूनी नोटिस में फिल्म का मौजूदा टाइटल तुरंत वापस लेने की मांग की गई है। इसे असंवैधानिक, मानहानिकारक और सामाजिक रूप से भड़काऊ बताया गया है। नोटिस का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समुदाय को अपमानित या बदनाम नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब संभावित सामाजिक नुकसान पहले से स्पष्ट हो।
विवाद यहीं नहीं रुका। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खुद को ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा बताने वाले लोगों ने फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर उतरे और फिल्म पर समुदाय को नकारात्मक रूप में दिखाने का आरोप लगाया।
इसी बीच, दिल्ली हाईकोर्ट में भी फिल्म की रिलीज को लेकर एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता महेंद्र चतुर्वेदी, जो खुद को आचार्य बताते हैं, का दावा है कि फिल्म का टाइटल और प्रमोशनल कंटेंट सामुदायिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन करता है। याचिका में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है।
अब तक न तो Netflix और न ही फिल्म के निर्माताओं की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि फिल्म का टाइटल बदला जाएगा या प्रोजेक्ट तय योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा।
फिलहाल, ‘Ghooskhor Pandat’ कंटेंट से ज्यादा अपने नाम को लेकर चर्चा में है। आने वाले दिनों में अदालत और मेकर्स का रुख यह तय करेगा कि यह थ्रिलर पर्दे तक उसी नाम से पहुंचेगी या किसी नए रूप में।
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