Kirti Kulhari ने अपने पुराने इंटरव्यू में घरेलू सहायिका की सैलरी को लेकर क्या कहा था? Mini Mathur ने कीर्ति कुल्हारी के बयान पर कैसी प्रतिक्रिया दी? मुंबई में घरेलू कामगारों की सैलरी को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के क्या तर्क रहे?
Household Worker Salary: एक्ट्रेस कीर्ति कुल्हारी का एक पुराना इंटरव्यू ऑनलाइन सामने आने के बाद एक्ट्रेस मिनी माथुर ने उन्हें जमकर सुनाया है। इस इंटरव्यू में कीर्ति ने घरेलू सहायिका (मेड) की सैलरी पर हैरानी जताई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।

एक पुराने इंटरव्यू का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कीर्ति मुंबई के यारी रोड पर अपने नए घर में शिफ्ट होने और घरेलू कामों के लिए मेड द्वारा बताई गई सैलरी सुनकर हैरान होने की बात कर रही हैं। जैसे ही यह वीडियो दोबारा सामने आया, मिनी माथुर और कई इंस्टाग्राम यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने कहा कि मेट्रो शहरों में बढ़ते खर्चों को संभालना मुश्किल है, तो वहीं दूसरों को लगा कि कीर्ति की बातें हकीकत से कोसों दूर हैं, खासकर मुंबई जैसे शहर के लिए।

मिनी माथुर ने इस पुराने वीडियो वाली एक पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, "ज़रा सोचिए कि उनके दो घंटे हमें दो घंटे में कितना कमाने का मौका देते हैं। यह दुनिया में कहीं भी न्यूनतम मजदूरी से कम है।"
एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, "मैं उनकी प्राथमिकताओं को समझता हूं, लेकिन यह मुंबई में रहने वाले किसी भी व्यक्ति की हकीकत से बिल्कुल अलग लगता है। 10 हजार रुपये तो बेसिक है और इसे सम्मान के साथ देना चाहिए।"
एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, "अगर वह 5 घरों में भी काम करती है, तो 10 घंटे काम करके महीने का 50 हजार कमा पाएगी। मुंबई जैसे शहर में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए कम से कम 50 हजार तो चाहिए। मुझे नहीं लगता कि यह कोई गलत मांग है।"
बॉलीवुड बबल को दिए एक इंटरव्यू में कीर्ति ने बताया था, "मैं अपने मैनेजर से भी इस बारे में बात कर रही थी। अभी मैंने नया घर शिफ्ट किया है, यारी रोड में, और... कुक और मेड से जो रेट्स हमें मिले, उन्हें सुनकर मैं सोच में पड़ गई कि 'ये रेट्स समझ ही नहीं आ रहे थे'।"

जब इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा कि उनसे कितने पैसे मांगे गए, तो कीर्ति ने जवाब दिया, "मुझे ठीक से याद नहीं, शायद दो घंटे के काम के लिए, जिसमें झाड़ू, पोंछा, बर्तन शामिल थे। मैं चाहती थी कि दो घंटे में डस्टिंग, पोंछा और बर्तन धोने जैसे सभी घरेलू काम पूरे हो जाएं। उसने मुझसे 10,000 रुपये मांगे। मैं हैरान थी, 'तुम दो घंटे आ रही हो, तुम अपने हिसाब से जितना काम होता है कर रही हो... और फिर तुम मुझसे 10,000 रुपये किस बात के मांग रही हो?' उस वक्त हमें लगा कि, 'क्या हमारी शक्ल देखकर ऐसा हो रहा है कि, इनके पास तो होंगे, थोड़ा सा और मांग ही लेते हैं।'"
इस मुद्दे ने अब घरेलू काम, उचित वेतन और मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने की आर्थिक चुनौतियों को लेकर एक बड़ी ऑनलाइन बहस छेड़ दी है। जहां कुछ यूजर्स ने कीर्ति की हैरानी को जायज ठहराया, वहीं दूसरों का तर्क था कि घरेलू सहायिकाओं को अक्सर बहुत कम वेतन दिया जाता है, जबकि वे कामकाजी पेशेवरों को उनके व्यस्त शेड्यूल को संभालने में मदद करती हैं।
