मुंबई के लोखंडवाला स्थित घर में 76 साल के दिग्गज फिल्ममेकर एम.एम. बैग मृत पाए गए। वे कई दिनों से बीमार थे और परिवार दुबई में था। पुलिस को कोई साजिश के संकेत नहीं मिले। कूपर अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद इसे प्राकृतिक मौत माना गया।
मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स से बुधवार रात एक दुखद खबर सामने आई। 76 साल के दिग्गज फिल्ममेकर M. M. Baig अपने घर में मृत पाए गए। शुरुआती पुलिस जांच में किसी भी तरह की साजिश या संदिग्ध परिस्थिति के संकेत नहीं मिले हैं और इसे प्राकृतिक मौत माना जा रहा है। परिवार के सदस्य उस समय दुबई में थे, जबकि कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे बैग घर पर अकेले थे। फोन कॉल का जवाब ना मिलने और घर से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो बैग को अचेत अवस्था में पाया।
M.M. Baig Death Cause: कैसे हुई एम.एम. बैग की मौत
ओशिवारा पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर संजय चवन ने मीडिया से बातचीत में बताया, "एम.एम. बैग कई दिनों से बीमार थे और घर पर अकेले थे। उनका परिवार दुबई गया हुआ था। पिछले दो दिनों से जब उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया, तो परिवार ने किसी को जांच के लिए भेजा। पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया और उन्हें घर के अंदर अचेत अवस्था में पाया गया।" एम.एम. बैग को तुरंत Cooper Hospital ले जाया गया, जहां गुरुवार तड़के करीब 1.30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की गई है।
एम.एम. बैग के पब्लिसिस्ट ने बताई पूरी कहानी
एम.एम. बैग के पब्लिसिस्ट हनीफ जावेरी ने मीडिया से उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया, "वे काफी समय से बीमार थे। चार-पांच दिनों से घर से बाहर नहीं निकले थे। घर से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा खोला और बैग साहब का शव पाया तथा उनकी बेटी को सूचित किया। रात करीब 1.30 से 2 बजे के बीच पोस्टमॉर्टम के लिए शव को कूपर अस्पताल ले जाया गया। वह बेहद प्यारे इंसान थे। मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।"
ऋतिक रोशन के मेंटर रहे एम.एम. बैग
एम.एम. बैग ने अपने करियर की शुरुआत जे. ओम प्रकाश, विमल कुमार और राकेश रोशन के असिस्टेंट के रूप में की थी। उन्होंने 'छोटी बहू' (1994) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया और अभिनेता ऋतिक रोशन को उनके डेब्यू से पहले गाइड भी दिया। बैग 'आदमी खिलौना है', 'जैसी करनी वैसी भरनी', 'क़र्ज़ चुकाना है', 'काला बाज़ार' और 'किशन कन्हैया' जैसी फिल्मों से जुड़े रहे। इसके अलावा 'आखिर क्यों', 'नगीना', 'प्यार किया है प्यार करेंगे', और 'औलाद' जैसी फिल्मों में भी उनका योगदान रहा।
