Nayyi Navelli Film Review: ‘नयी नवेली’ की शुरुआत रहस्य और कॉमेडी से बांधती है, लेकिन कमजोर दूसरा हाफ, बिखरा हॉरर और उलझी माइथोलॉजिकल फिल्म का मजा किरकिरा कर देते हैं।

क्या घर की नई बहू सच में डायन हो सकती है? यामी गौतम की फिल्म ‘नयी नवेली’ इसी सवाल के साथ एक अजीबोगरीब परिवार और रहस्यमयी घटनाओं की दुनिया में ले जाती है। शुरुआत में शक, मजेदार बहस और अनोखे रीति-रिवाज कहानी को दिलचस्प बनाते हैं। खासकर बंटू का अपनी भाभी को लेकर शक और परिवार के अतरंगी रिएक्शन हंसाते हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी रावण, मंदोदरी और अलौकिक शक्तियों की तरफ बढ़ती है, कॉमेडी और हॉरर का तालमेल बिगड़ने लगता है। तो क्या यामी की परफॉर्मेंस इस फिल्म को देखने लायक बनाती है?

क्या है ‘नयी नवेली’ की कहानी?

मेरठ में एक शादी के दौरान राजा (अदिनाथ एम कोठारे) अपनी पत्नी मोहिनी (यामी गौतम) के गायब होने से परेशान है। उधर, उसका देवर बंटू (अनुराग ठाकुर) मोहिनी को जंगल में एक रहस्यमयी अनुष्ठान करते देखता है। वह उसे वापस लाकर कमरे में बंद कर देता है और परिवार के सामने दावा करता है कि उसकी भाभी डायन है। कहानी का मजेदार हिस्सा परिवार में आए बदलावों और बंटू के शक से निकलता है। बाद में रावण-मंदोदरी से जुड़ा काल शील और राजा पर मंडराता खतरा कहानी को पौराणिक हॉरर की तरफ मोड़ देते हैं।

‘नयी नवेली’ की स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस कैसी है?

यामी गौतम मोहिनी के रहस्यमयी और सख्त, दोनों रूपों में प्रभाव छोड़ती हैं। अदिनाथ एम कोठारे भावनात्मक दृश्यों में ठीक लगते हैं, हालांकि उनका गुस्सा और चीखना बार-बार दोहराया जाता है। सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ और प्रतीक पचौरी अपने किरदारों में जंचते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा असर अनुराग ठाकुर छोड़ते हैं। बंटू के शक, तर्कों और कॉमिक टाइमिंग से फिल्म को कई मजेदार पल मिलते हैं।

बालाजी मोहन का डायरेक्शन कैसा है?

बालाजी मोहन की फिल्म का पहला हिस्सा रहस्य और पारिवारिक कॉमेडी का अच्छा मेल बनाता है। मोहिनी परिवार की उन महिलाओं को आत्मविश्वास देती है, जिनकी मेहनत को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। मगर दूसरे हिस्से में पौराणिक कहानी हावी हो जाती है। कॉमेडी और हॉरर के बीच संतुलन बिगड़ता है और करीब-करीब तीन घंटे का एहसास देने वाली खिंची हुई कहानी दर्शकों का धैर्य आजमा सकती है।

‘नयी नवेली’ का म्यूजिक कैसा है?

जीवी प्रकाश कुमार ने इस फिल्म से हिंदी सिनेमा में संगीतकार के तौर पर शुरुआत की है। फिल्म का संगीत देसी धुनों और आधुनिक बीट्स का मेल है, जो इसके रंगीन माहौल के अनुकूल है। हालांकि, ‘फटा पटाखा’ ऐसा गाना है जो बाकी ट्रैक्स के मुकाबले ज्यादा याद रहता है। बैकग्राउंड म्यूजिक माहौल बनाने में मदद करता है, लेकिन हर दृश्य का असर बढ़ाने में सफल नहीं होता।

टेक्निकल फ्रंट पर कैसी है फिल्म?

फिल्म का रहस्यमयी घर, अलौकिक घटनाएं और राक्षसी रूप हॉरर का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, राजा का दानवी रूप जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। फिल्म कई बार डर पैदा करने के बजाय सुपरनैचुरल तमाशे पर ज्यादा ध्यान देती है। दोहराए गए टकराव भी धीरे-धीरे अपना असर खो देते हैं।

क्यों देखें और क्यों न देखें ‘नयी नवेली’?

अगर आपको अतरंगे किरदार, पारिवारिक कॉमेडी और रहस्य पसंद हैं, तो पहला हाफ आपको मनोरंजन दे सकता है। यामी और अनुराग की परफॉर्मेंस भी फिल्म की ताकत है। लेकिन कमजोर दूसरा हाफ, उलझी पौराणिक कहानी और असंतुलित हॉरर इसकी बड़ी कमियां हैं। कुल मिलाकर, ‘नयी नवेली’ में आइडिया अच्छा है, मगर उसे पूरी तरह साधने में फिल्म चूक जाती है। हमारी ओर से फिल्म को 5 में से 2 स्टार।