दिग्गज फिल्म प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी का निधन कैसे हुआ? कितने साल के थे CBFC के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी? CBFC के अध्यक्ष के तौर पर कैसा रहा था पहलाज निहलानी का कार्यकाल? पहलाज निहलानी की वो फ़िल्में कौन-सी हैं, जिनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा?

इंडियन फिल्म इंडस्ट्री से एक और बड़ा नाम हमेशा के लिए विदा हो गया है। जाने-माने फिल्म निर्माता और पूर्व CBFC चेयरमैन पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि वह लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे। अपने लंबे करियर में उन्होंने कई चर्चित और सफल फिल्मों का निर्माण किया और बॉलीवुड में एक अलग पहचान बनाई। वहीं CBFC प्रमुख के तौर पर उनका कार्यकाल भी काफी सुर्खियों में रहा, जहां फिल्मों की सेंसरशिप और फैसलों को लेकर कई विवाद खड़े हुए। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है।

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कब और कैसे हुआ पहलाज निहलानी का निधन?

पत्रकार विक्की लालवानी की एक पोस्ट के अनुसार, वरिष्ठ फिल्म निर्माता और पूर्व सेंसर बोर्ड प्रमुख का 4 जून 2026 की सुबह नानावटी अस्पताल में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि निहलानी पिछले चार महीनों से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और उन्हें लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) की बीमारी डायग्नोज हुई थी। वे डॉ. जयंत बारवे की देखरेख में इलाज करा रहे थे और पिछले लगभग तीस दिनों से उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा था।

पहलाज निहलानी का फिल्मी सफर और योगदान

पहलाज निहलानी ने बतौर प्रोड्यूसर हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्में दीं। आंखें, अंदाज़, तलाश, रंगीला राजा और जूली 2 जैसी फिल्मों ने उन्हें एक कमर्शियल फिल्ममेकर के तौर पर स्थापित किया। उनका करियर कई दशकों तक फैला रहा और उन्होंने अलग-अलग जॉनर की फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी फिल्मों में मास एंटरटेनमेंट का खास तड़का देखने को मिलता था, जिसने उन्हें अपने दौर के प्रमुख निर्माताओं में शामिल कर दिया।

CBFC चेयरमैन के तौर पर विवादित कार्यकाल

2015 से 2017 तक पहलाज निहलानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उनका कार्यकाल काफी चर्चित और विवादों से भरा रहा। फिल्मों की कटौती और सर्टिफिकेशन को लेकर कई बार फिल्म इंडस्ट्री और बोर्ड के बीच टकराव देखने को मिला। उनके फैसलों पर लगातार बहस होती रही, जिससे वे लंबे समय तक सुर्खियों में बने रहे। हालांकि, उन्होंने अपने निर्णयों को नियमों के अनुरूप बताया और सख्त सेंसरशिप नीति का समर्थन किया।