एक्ट्रेस रागिनी द्विवेदी के अनुसार, ग्लैमर और अश्लीलता में बारीक फर्क है। किरदार का चित्रण कपड़ों पर नहीं, बल्कि कहानी की जरूरत और मंशा पर निर्भर करता है। आज की ऑडियंस सवाल करती है और कलाकारों के पास विकल्प चुनने व 'ना' कहने की आज़ादी है।
नई दिल्ली: हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म 'पेद्दी' (Peddi) के मेकर्स पर एक्ट्रेस जान्हवी कपूर के किरदार को ज़रूरत से ज़्यादा सेक्शुअलाइज़ करने के गंभीर आरोप लगे थे। इस विवाद के बाद, खबरें हैं कि फिल्म की टीम ने उन सीन्स को काटकर फिल्म को दोबारा रिलीज़ (Re-release) किया है। इस घटना के बाद मेनस्ट्रीम सिनेमा में ग्लैमर, एक्ट्रेस को पर्दे पर दिखाने का तरीका और महिला किरदारों के चित्रण पर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है।

इस मुद्दे पर बात करते हुए एक्ट्रेस रागिनी द्विवेदी ने कहा, "यह पूरी बहस सिर्फ कपड़ों या स्क्रीन पर दिखने वाले लुक तक सीमित नहीं है। किसी किरदार को कैसे दिखाया जाता है, यह आखिरकार फिल्म बनाने वालों के इरादे, कहानी के कॉन्टेक्स्ट और एक्टर की अपनी पसंद पर निर्भर करता है।" रागिनी ने हाल ही में अपनी 2014 की सुपरहिट फिल्म 'रागिनी आईपीएस' के सीक्वल 'R2' का ऐलान किया है, जो इस फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाएगी।
बिकिनी पहनकर भी सम्मानजनक दिख सकते हैं!
कमर्शियल और परफॉर्मेंस वाले, दोनों तरह के रोल में एक दशक से ज़्यादा समय तक बैलेंस बनाने वाली रागिनी ने ग्लैमर पर बात करते हुए कहा, "ग्लैमर और अश्लीलता (Vulgarity) के बीच एक बहुत पतली सी लाइन है। आप स्क्रीन पर बिकिनी पहनकर भी बेहद सम्मानजनक या आकर्षक दिख सकती हैं। वहीं, आप पूरे कपड़े पहनकर भी सेंशुअस या मादक लग सकती हैं। इसलिए, यह मामला कभी भी सिर्फ कपड़ों का नहीं होता।"
उन्होंने आगे कहा, "जब मैंने अपना करियर शुरू किया था, तब ग्लैमरस एक्ट्रेस और परफॉर्मेंस वाली एक्ट्रेस के बीच एक साफ बंटवारा होता था। मैंने भी स्क्रीन पर बहुत छोटे और ग्लैमरस कपड़े पहने हैं। लेकिन मुझे हमेशा पता था कि लाइन कहां खींचनी है। यह फैसला हर एक्टर को खुद लेना होता है। दिक्कत तब शुरू होती है, जब कोई चीज़ ज़बरदस्ती या बिना वजह दिखाई जाती है।"
आज की ऑडियंस सवाल करती है
रागिनी आज के दर्शकों की सोच के बारे में बताती हैं, "पहले कुछ चीज़ों को लोग बिना सवाल किए मान लेते थे। लेकिन आज लोग कुछ भी दिखाए जाने पर सवाल करते हैं, 'इसे क्यों दिखाया जा रहा है? क्या कहानी के लिए यह ज़रूरी है?' किसी किरदार का एक खास पहलू दिखाने के लिए एक मजबूत वजह होनी चाहिए। अगर यह कहानी के लिए ज़रूरी है, तो दर्शक इसे ज़रूर स्वीकार करेंगे। लेकिन अगर इसे सिर्फ लोगों का ध्यान खींचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो लोग सवाल ज़रूर उठाएंगे।"
'ना' कहना सबसे ताकतवर शब्द; OTT ने लाया बदलाव
बड़े बजट की कमर्शियल फिल्मों में काम करते समय एक्ट्रेस पर पड़ने वाले दबाव के बारे में बात करते हुए रागिनी ने कहा कि आज के कलाकारों के पास ज़्यादा आज़ादी और अधिकार हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "'ना' (No) कहना एक बहुत ताकतवर शब्द है।"
उनके मुताबिक, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और इंडिपेंडेंट सिनेमा (Independent Cinema) के बढ़ने से आज की पीढ़ी के पास पहले से कहीं ज़्यादा मौके हैं। "एक ज़माना था जब मौके सीमित थे। लेकिन आज अलग-अलग तरह का कंटेंट मौजूद है। अगर आप किसी सीन या विषय को लेकर सहज नहीं हैं, तो आप उसे न करने का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन एक बार हामी भरने के बाद, आपको पूरी तरह पता होना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं। ऐसी बातें प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही हो जानी चाहिए," उन्होंने साफ किया।
प्रोड्यूसर के तौर पर रागिनी की नई पारी; 'R2' एक नया दौर
महिला किरदारों के चित्रण पर चल रही यह बहस रागिनी की कहानियों के चुनाव पर भी असर डाल रही है। फिलहाल वह मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल के साथ 'वृषभ' (Vrushabha) में नज़र आने वाली हैं और अपनी पीरियड-ड्रामा फिल्म 'मदनिका' (Madanika) की रिलीज़ का इंतज़ार कर रही हैं। इस बीच, 'R2' की घोषणा के साथ वह के। मंजू के साथ मिलकर प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी नई पारी शुरू कर रही हैं।
रागिनी ने कहा, “R2 फिल्म 'रागिनी आईपीएस' का सीक्वल और एक नई फ्रेंचाइजी की शुरुआत होगी। उस फिल्म ने मेरी ज़िंदगी बदल दी थी, और उसकी विरासत को आगे ले जाना गर्व की बात है। आज सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि पूरे क्रिएटिव प्रोसेस का हिस्सा बनना ज़रूरी है। हमने भारत की अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री में हीरोज़ की कई सफल फ्रेंचाइजी देखी हैं। लेकिन दक्षिण भारत में महिला प्रधान (Female-led) फ्रेंचाइजी के उदाहरण बहुत कम हैं। हमारे सिनेमा को ऐसी और फिल्मों की ज़रूरत है।”
