नितेश तिवारी की रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम बनेंगे और अरुण गोविल राजा दशरथ। क्या रणबीर 38 साल पुराने राम का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे?

Arun Govil vs Ranbir Kapoor: नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' को लेकर दर्शकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कोई इसे भव्य फिल्म बता रहा है, तो कोई इसके पात्रों, संगीत और गानों को लेकर खासा नाराज है। बता दें कि रामायण को लेकर अब तक कई सीरियल और फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन रामानंद सागर की 'रामायण' का कोई तोड़ नहीं है। 38 साल बाद भी दर्शकों के बीच वह रामायण आज भी उतनी ही पॉपुलर है। वहीं, अब नितेश तिवारी अपनी फिल्म के जरिए इस विरासत को एक बार फिर बड़े पर्दे पर पेश करने जा रहे हैं। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि भगवान राम के रोल में क्या रणबीर कपूर दर्शकों के दिलों में अरुण गोविल जैसी जगह बना पाएंगे?

अरुण गोविल के भगवान राम का जादू आज भी बरकरार

  • रामानंद सागर की 1987 में आई टीवी सीरीज 'रामायण' में अरुण गोविल ने भगवान राम का किरदार निभाया था। उनका अभिनय इतना प्रभावशाली था कि उन्होंने भगवान राम की ऐसी छवि बनाई, जो आज भी लोगों के मन में बसी हुई है।
  • उस दौर में अरुण गोविल घर-घर में मशहूर हो गए थे। कई लोग उन्हें पर्दे पर भगवान राम के रूप में देखकर सचमुच भगवान की तरह मानने लगे थे और उनकी पूजा करने लगे थे।
  • आज भी उत्तर और मध्य भारत में प्रिंट सामग्री और मेलों में बिकने वाले सामानों पर भगवान राम के रूप में उनकी तस्वीर दिखाई देती है। यह उस दौर में उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है, जब सोशल मीडिया भी नहीं था।

हर नए राम की अरुण गोविल से हुई तुलना

  • अरुण गोविल के बाद कई कलाकारों ने भगवान राम का किरदार निभाया। किताबों, कॉमिक्स, एनिमेशन फिल्मों और टीवी सीरियल्स में राम के अलग-अलग रूप देखने को मिले। इसके बावजूद दर्शक हर नए कलाकार की तुलना अरुण गोविल से करते रहे।
  • उनके अभिनय की सबसे बड़ी खासियत शांत स्वभाव, चेहरे की मासूमियत और दयालु भाव थे। उनकी हल्की मुस्कान और संवाद बोलने का अंदाज दर्शकों को भगवान राम की पारंपरिक छवि के करीब लगता था।
  • 1992 की भारत-जापान एनिमेटेड फिल्म से लेकर 2008 और 2015 के टीवी धारावाहिकों तक भगवान राम के कई रूप दिखाए गए, लेकिन अरुण गोविल की छवि सबसे अलग बनी रही।
  • 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन ने 1980 के दशक की 'रामायण' का दोबारा प्रसारण शुरू किया। इससे जेन Z यानी नई पीढ़ी को भी अरुण गोविल के राम को देखने का मौका मिला। उस समय शो ने एक दिन में 77 मिलियन दर्शकों के साथ प्रसारण के रिकॉर्ड तोड़ दिए।

गुरमीत चौधरी, आशीष शर्मा और प्रभास भी नहीं तोड़ पाए छवि

  • अरुण गोविल के बाद 2008 में गुरमीत चौधरी और 2015 में आशीष शर्मा ने भगवान राम की भूमिका निभाई। बड़े पर्दे पर प्रभास भी फिल्म 'आदिपुरुष' में इस किरदार में नजर आए।
  • हालांकि, इन कलाकारों को दर्शकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। कई लोगों को लगा कि इन किरदारों में वह दिव्य शांति और विनम्रता नहीं थी, जो अरुण गोविल के अभिनय में दिखाई देती थी।
  • खासतौर पर प्रभास को राम के अधिक आक्रामक रूप में दिखाए जाने को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी।

रणबीर कपूर के राम बनने पर भी शुरू हुई चर्चा

  • अब नितेश तिवारी की 'रामायण' में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी तुलना भी अरुण गोविल से होने लगी है। इस बार तुलना इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि अरुण गोविल खुद फिल्म में भगवान राम के पिता राजा दशरथ का किरदार निभा रहे हैं।
  • कुछ दर्शकों का मानना है कि रणबीर कपूर के व्यक्तित्व में भगवान राम के किरदार के लिए जरूरी शांति दिखाई देती है। वहीं, कई लोगों का मानना है कि अरुण गोविल ने जिस स्तर का अभिनय किया था, वहां तक पहुंचना रणबीर कपूर के बस की बात नहीं।
  • हालांकि, खुद अरुण गोविल ने रणबीर कपूर की तारीफ की है। उनका कहना है कि भगवान राम के व्यक्तित्व को लेकर उनके मन में जो कल्पना है, रणबीर कपूर उसके सबसे करीब नजर आते हैं। वे इस मूवी में दशरथ का रोल निभा रहे हैं।

29 साल की उम्र में अरुण गोविल बने थे भगवान राम

  • अरुण गोविल ने जब रामानंद सागर की 'रामायण' में भगवान राम का किरदार निभाया था, तब उनकी उम्र केवल 29 साल थी।
  • वहीं, रणबीर कपूर की उम्र 44 साल है। अरुण गोविल उस समय एक युवा और सहज राजकुमार के रूप में नजर आए थे, जो वनवास जाता है और आगे चलकर एक समझदार राजा बनता है।
  • अरुण गोविल के लिए इस किरदार की लोकप्रियता का एक बड़ा नुकसान भी रहा। फिल्म निर्माता उन्हें भगवान राम की छवि से बाहर नहीं देख पा रहे थे।
  • उन्हें रोमांटिक और कमर्शियल फिल्मों में लेने से भी परहेज किया जाने लगा। इसका असर उनके बॉलीवुड करियर पर पड़ा।

क्या रणबीर कपूर तोड़ पाएंगे अरुण गोविल के राम का रिकॉर्ड?

  • लॉस एंजिल्स (LA) में फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद सामने आई प्रतिक्रियाओं से संकेत मिले हैं कि दर्शक रणबीर कपूर के अभिनय से प्रभावित हैं। हालांकि, दोनों कलाकारों के बीच तुलना होना स्वाभाविक है, क्योंकि उन्होंने अलग-अलग दौर में भगवान राम का किरदार निभाया है।
  • रणबीर कपूर का मकसद अरुण गोविल के अभिनय की नकल करना नहीं, बल्कि भगवान राम की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
  • नितेश तिवारी की फिल्म में अरुण गोविल का राजा दशरथ बनकर लौटना भी खास है।
  • करीब 39 साल पहले उन्होंने पहली बार भगवान राम के रूप में इस दुनिया में कदम रखा था। अब उसी कहानी में वह भगवान राम के पिता की भूमिका निभा रहे हैं।
  • अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रणबीर कपूर अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में अरुण गोविल जैसी जगह बना पाएंगे?
  • क्या नई पीढ़ी उन्हें अपने भगवान राम के रूप में स्वीकार करेगी या अरुण गोविल की 38 साल पुरानी छवि ही सबसे ऊपर बनी रहेगी? इसका जवाब फिल्म रिलीज होने के बाद ही मिलेगा।