शबाना आजमी की ‘बंटवारा 1947’ और ‘आवारापन 2’ एक ही दिन रिलीज हो रही हैं। एक्ट्रेस ने 1983 का किस्सा याद किया, जब उनकी चार फिल्में करीब-करीब साथ रिलीज हुई थीं। उन्होंने पुराने दौर की शूटिंग के अनुभव भी शेयर किए।
दिग्गज अदाकारा शबाना आजमी इन दिनों एक खास वजह से चर्चा में हैं। उनकी दो फिल्में ‘बंटवारा 1947’ और ‘आवारापन 2’ एक ही दिन यानी 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही हैं। खास बात यह है कि शबाना दोनों फिल्मों का हिस्सा हैं। एक तरफ वह राजकुमार संतोषी की पीरियड ड्रामा फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में नजर आएंगी, तो दूसरी ओर ‘आवारापन 2’ में उनका अलग अंदाज देखने को मिलेगा। शबाना ने इस तरह के फिल्म क्लैश को अपने लिए नया नहीं बताया और 1983 की एक दिलचस्प याद शेयर की।
1983 में भी हुआ था ऐसा संयोग
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में शबाना आजमी ने बताया कि उनके करियर में इससे पहले भी ऐसा दौर आया था, जब उनकी कई फिल्में बेहद कम अंतराल में रिलीज हुई थीं। उन्होंने 1983 को याद करते हुए बताया कि उस समय ‘अवतार’, ‘मासूम’, ‘कामयाब’ और ‘ये नजदीकियां’ लगभग दो हफ्ते के भीतर रिलीज हुई थीं। हालांकि, उस दौर में कलाकार एक साथ कई फिल्मों में काम किया करते थे, इसलिए ऐसी स्थिति असामान्य नहीं थी। शबाना के मुताबिक, उस समय एक्टर एक साथ 8 से 10 फिल्मों में काम करते थे और दिन में कई शिफ्ट करना आम बात थी। उन्होंने पुराने दौर के शूटिंग शेड्यूल को याद करते हुए बताया कि एक्टर्स के पास आज जैसी सुविधाएं भी नहीं थीं।
‘10 मिनट भी नहीं मिलते थे तैयारी के लिए’
शबाना आजमी ने पुराने समय की शूटिंग को याद करते हुए कहा कि कलाकारों को लंबे-लंबे डायलॉग याद करने पड़ते थे और कई बार किसी इमोशनल सीन के लिए खुद को तैयार करने के लिए 10 मिनट से भी कम समय मिलता था। उन्होंने उस दौर की व्यस्तता का उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ कलाकार दिन में चार-पांच शिफ्ट तक किया करते थे। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय कलाकारों के लिए उनकी कार कई बार अस्थायी घर जैसी बन जाती थी, क्योंकि लगातार एक शूटिंग से दूसरी शूटिंग पर जाना पड़ता था।
‘बंटवारा 1947’ में शबाना का अहम किरदार
‘बंटवारा 1947’ में शबाना आजमी एक बुजुर्ग हिंदू महिला माई के किरदार में नजर आएंगी। फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है और असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ई नई’ से प्रेरित है। फिल्म में उनका किरदार लाहौर स्थित अपनी पुश्तैनी हवेली छोड़ने से इनकार कर देता है, जबकि विभाजन के बाद एक मुस्लिम परिवार को वह घर आवंटित कर दिया जाता है। शबाना ने अपने किरदार को मजबूत होने के साथ-साथ संवेदनशील और कमजोर भावनाओं वाला बताया है। फिल्म में वह पहली बार सनी देओल के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं।
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‘आवारापन 2’ में निभा रहीं विलेन का रोल
वहीं ‘आवारापन 2’ में शबाना आजमी का किरदार बिल्कुल अलग है। फिल्म में वह नफीसा नाम की विलेन के रोल में दिखाई देंगी। फिल्म में इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, सुविंदर विक्की और अनिरुद्ध रावल भी अहम भूमिकाओं में हैं। शबाना ने इस रोल को लेकर बताया कि उन्होंने इसे जरूरत से ज्यादा गुस्से और आक्रामकता के बजाय एक अलग अंदाज में निभाने की कोशिश की।
शबाना बोलीं- इस उम्र में ऐसे रोल मिलना किस्मत की बात
एक ही दिन दो बिल्कुल अलग फिल्मों में नजर आने को लेकर शबाना आजमी ने इसे अपनी खुशकिस्मती बताया। 75 साल की उम्र में उन्हें अलग-अलग तरह के किरदार ऑफर किए जा रहे हैं, इसे वह अपने करियर के लिए बेहद खास मानती हैं।
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