थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायगन’ CBFC विवाद में अटकी है। विजय ने राजनीति को भविष्य बताया और बताया कि फिल्म प्रोड्यूसर को नुकसान दुख देता है। उन्होंने शाह रुख खान, एमजीआर और जयललिता को अपना रोल मॉडल कहा।
तमिल सुपरस्टार थलापति विजय की अपकमिंग फिल्म ‘जन नायगन’ लंबे समय से सर्टिफिकेशन (CBFC) विवाद में फंसी है। यह फिल्म उनकी राजनीति में एंट्री करने से पहले उनका आख़िरी प्रोजेक्ट होने वाली थी, जिसे लेकर वे लंबे समय से तैयारी कर रहे थे। लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा सर्टिफिकेट ना मिलने की वजह से फिल्म की रिलीज़ अटकी हुई है। इस बीच विजय ने शाहरुख़ खान का नाम लेकर सबको हैरान कर दिया है। उनकी मानें तो वे शाहरुख़ से प्रेरित होकर वे राजनीति में एंट्री ले रहे हैं।
'जन नायगन' के प्रोड्यूसर के लिए दुखी थलापति विजय
NDTV को दिए एक इंटरव्यू में विजय ने कहा कि वह अब फिल्मों को अलविदा कहने को तैयार हैं। उनके लिए राजनीति ही भविष्य है। विजय ने ऑफ कैमरा बात की और चैनल के एडिटर-इन चीफ राहुल कंवल ने उनसे हुई बातचीत के बारे में बताया। कंवल के मुताबिक़, विजय ने कहा कि फिल्म 'जन नायगन' के प्रोड्यूसर को जो आर्थिक और भावनात्मक नुकसान हो रहा है, उसके लिए उन्हें दुख है। विजय ने कहा कि राजनीतिक रास्ते पर चलने के फैसले से फिल्मों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, लेकिन वे इस बात के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं।
विजय कब से कर रहे थे पॉलिटिक्स में एंट्री की तैयारी
विजय ने इंटरव्यू में कहा कि वह COVID-19 के बाद से ही राजनीति में आने की तैयारी कर रहे थे। बातचीत के दौरान विजय ने करूर त्रासदी (Karur tragedy) को जिंदगी का सबसे बड़ा झटका बताया, जिसने उन्हें राजनीतिक राह चुनने में और मजबूर किया।
शाहरुख़ खान से प्रेरित होकर राजनीति में आए विजय
दिलचस्प बात यह है कि विजय ने शाहरुख खान को अपने राजनीतिक सफर के दौरान प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने कहा , "वे बहुत अच्छा बोलते हैं। उनका बोलने का तरीका और कला बहुत अच्छी है। मैं उन्हें देखता था और सोचा था कि यह आदमी कितना अच्छा बोलता है।" इसके अलावा उन्होंने तमिल राजनीति के दिग्गजों एमजीआर, जयललिता और करुणानिधि को भी अपने आदर्श के रूप में माना है।
सुप्रीम कोर्ट में अटका 'जन नायगन' का मामला
एच. विनोद के निर्देशन में बनी 'जन नायगन' के सर्टिफिकेशन विवाद में CBFC ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर किया है। इसमें कहा गया है कि बिना CBFC को सुने कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। इसके चलते यह मामला और लंबा खिंचता दिख रहा है।
