63 साल के दिग्गज एक्टर ने राजनीतिक व्यंग्य, BJP में अपनी 24 घंटे की सदस्यता पर खुलकर बात की। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके इस एक्टर को किस बात का अफ़सोस है?

दिग्गज एक्टर और होस्ट शेखर सुमन इन दिनों अपने शो Shekhar Tonite को लेकर चर्चा में हैं। कुछ हफ्ते पहले उनके एक मोनोलॉग ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी, जिसमें उन्होंने एक ऐसे राजा का जिक्र किया था जिसने अपने बारे में सच सामने आने से रोकने के लिए आईना तोड़ दिया था। इस कमेंट को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई गईं। कांग्रेस ने यह मोनोलॉग अपने X हैंडल से शेयर कर सवाल उठाया था कि यह राजा कौन है? अब शेखर सुमन ने एक इंटरव्यू में न सिर्फ उस मोनोलॉग के पीछे की सोच पर बात की है, बल्कि BJP और कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक अनुभव, नेताओं के साथ रिश्तों, राजनीतिक व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी खुलकर राय रखी है।

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‘राजा ने आईना तोड़ दिया’ वाले मोनोलॉग पर क्या बोले शेखर सुमन?

स्क्रीन स्पॉटलाइट पर शेखर सुमन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं था। उनके मुताबिक, वह अपने मोनोलॉग्स में देश की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर कमेंट करते हैं और वही बातें कहते हैं, जो उन्हें अखबारों और सार्वजनिक घटनाओं से दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि व्यंग्य का मकसद किसी को अपमानित करना या नीचा दिखाना नहीं होना चाहिए। अगर बात करने का तरीका संतुलित हो तो लोग हल्की-फुल्की आलोचना और चुटकी लेना पसंद भी करते हैं।

बीजेपी में सिर्फ 24 घंटे के लिए रहे शेखर सुमन

'शेखर टुनाइट' के पहले एपिसोड में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी उनके मेहमान बने थे। जब सुमन से पूछा गया कि क्या बीजेपी के पूर्व सदस्य होने की वजह से उन्हें गडकरी को शो में लाने में मदद मिली तो उन्होंने कहा, "नहीं, मैं सिर्फ 24 घंटे के लिए बीजेपी का सदस्य था।" इस पर उनसे पूछा गया कि फिर वे पार्टी में शामिल ही क्यों हुए थे? उन्होंने कहा, “कभी-कभी परिस्थितियां आपको ऐसे मोड़ पर ले जाती हैं जहां आप वह काम कर बैठते हैं जो वास्तव में नहीं करना चाहते। मेरे साथ ऐसा दो बार हुआ कि मुझे वो करना पड़ा, जो हकीकत में मैं नहीं करना चाहता था।”

कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर पछताए शेखर सुमन

शेखर सुमन ने आगे कहा, "मैंने एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, तब भी मेरे साथ ऐसे ही हालात बने थे। मैं उस वक्त भी चुनाव नहीं लड़ना चाहता था। मुझे आज तक समझ नहीं आया कि मैंने ऐसा क्यों किया? लेकिन वह सिर्फ पार्टी की मेंबरशिप थी, कोई फुलटाइम पॉलिटिकल रोल नहीं था।" गौरतलब है कि शेखर सुमन ने 2009 में पटना साहिब से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन इसमें वे बीजेपी (उस वक्त) के शत्रुघ्न सिन्हा से हार गए थे। बात बीजेपी की करें तो शेखर ने 7 मई 2024 को पार्टी जॉइन की थी और 24 घंटे में इसकी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।