Nana Patekar High Fees Demand and creative differences: 1995 की फिल्म 'राजा' में नाना पाटेकर सह-कलाकारों को निर्देशित करने लगे थे। इससे भ्रम पैदा हुआ और 2 दिन बाद उन्होंने फिल्म छोड़ दी।

नाना पाटेकर के बारे में एक पुरानी लेकिन बहुत दिलचस्प बात फिर चर्चा में आ गई है। 1995 की फिल्म राजा में वो माधुरी दीक्षित और संजय कपूर के साथ काम करने वाले थे। संजय कपूर के बड़े भाई का रोल उनके पास था। लेकिन सिर्फ दो दिन की शूटिंग के बाद उन्हें फिल्म छोड़नी पड़ी। डायरेक्टर इंद्र कुमार ने बाद में बताया कि नाना सह-कलाकारों को डायरेक्शन देने लगे थे। माधुरी समेत कई लोग कंफ्यूज हो रहे थे। फिर भी नाना ने जो फीस ली थी वो पूरी वापस कर दी। इंद्र कुमार के मुताबिक उस समय इतनी बड़ी रकम अनिल कपूर भी नहीं लेते थे।

2 दिन की शूटिंग और फिर मतभेद

इंद्र कुमार राजा में नाना पाटेकर के साथ काम करने को लेकर काफी उत्साहित थे। नाना ने रोल साइन कर लिया और शूटिंग भी शुरू हो गई। लेकिन सेट पर उनका अंदाज अलग था। वो माधुरी दीक्षित, दिलीप तहिल और मुकेश खन्ना जैसे कलाकारों को एक्टिंग के नोट्स देने लगे। इंद्र कुमार ने माना कि नाना की नीयत अच्छी थी, वो सबका काम बेहतर करना चाहते थे। लेकिन तरीका गलत था। एक्टर जब डायरेक्टर की लकीर पार करने लगे तो प्रॉब्लम खड़ी हो गई।

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माधुरी दीक्षित की कंफ्यूजन और डायरेक्टर का फैसला

माधुरी दीक्षित इंद्र कुमार के साथ पहले दिल और बेटा जैसी फिल्में कर चुकी थीं। वो डायरेक्टर की आंखों में देखकर समझ जाती थीं कि क्या चाहिए। लेकिन नाना के इनपुट्स से वो थोड़ी कंफ्यूज हो रही थीं। सेट का माहौल प्रभावित हो रहा था। इंद्र कुमार समझ गए कि अगर ये जारी रहा तो फिल्म बिगड़ सकती है। उन्होंने नाना के घर जाकर बात की। नाना ने भी मान लिया कि उनका वर्किंग स्टाइल अलग है और दोनों के तरीके मेल नहीं खा रहे। दोनों ने सम्मान के साथ पार्ट वेज का फैसला लिया।

पूरी फीस वापस करने वाला अंदाज

सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि नाना ने दो दिन की शूटिंग के बावजूद पूरी फीस वापस कर दी। इंद्र कुमार ने कहा कि नाना इतने शरीफ इंसान हैं। कोई और एक्टर होता तो पैसे नहीं लौटाता। उन्होंने जो प्राइस मांगी थी वो उस जमाने में अनिल कपूर भी नहीं लेते थे। इंद्र कुमार को उनके साथ काम करना था इसलिए मान गए। लेकिन नाना ने वो सारे पैसे वापस कर दिए। ये उनकी प्रोफेशनलिज्म को दिखाता है।

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परेश रावल ने संभाला रोल

नाना के बाहर होने के बाद परेश रावल को ये किरदार मिला। राजा फिल्म हिट रही और परेश रावल का रोल भी याद रखा गया। माधुरी और संजय कपूर की जोड़ी और संगीत ने फिल्म को लोकप्रिय बनाया। लेकिन नाना पाटेकर वाले इस किस्से ने दिखाया कि सेट पर क्रिएटिव मतभेद कैसे सुलझाए जा सकते हैं। दोनों तरफ से सम्मान बना रहा।

नाना की विरासत में ये किस्सा

नाना पाटेकर की जिंदगी के कई किस्से उनके सिद्धांत और ईमानदारी को दिखाते हैं। राजा वाला वाकया भी उनमें से एक है। ऊंची फीस लेकर भी पूरी रकम लौटा देना आसान नहीं होता। इंद्र कुमार ने बाद में इस बात को सराहा। आज जब नाना नहीं रहे तो ये पुरानी बातें उनकी यादों को और जीवंत बना रही हैं। फिल्म इंडस्ट्री में प्रोफेशनलिज्म की मिसाल के तौर पर ये किस्सा याद रखा जाएगा।