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गंगा में शव मिलने के नाम पर आम आदमी पार्टी के नेता ने फैलाया झूठ, शेयर कर रहे हैं 5 साल पुरानी फोटो

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में गंगा में तैरती लाशों से जुड़ी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि सरकार ने मौतों का आंकड़ा छुपाया है। ऐसी ही एक तस्वीर में दिख रहा है कि नदी में लाशें हैं और पास में ही कुत्ते खड़े हैं। हालांकि इस तस्वीर का कोरोना महामारी से कोई लेना देना नहीं है। तस्वीर 5 साल पुरानी है।

second wave of Corona epidemic lies are being lied in the name of finding a dead body in the Ganges kpn
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Lucknow, First Published May 19, 2021, 10:56 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी की दूसरी लहर में गंगा में तैरती लाशों से जुड़ी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि सरकार ने मौतों का आंकड़ा छुपाया है। ऐसी ही एक तस्वीर में दिख रहा है कि नदी में लाशें हैं और पास में ही कुत्ते खड़े हैं। हालांकि इस तस्वीर का कोरोना महामारी से कोई लेना देना नहीं है। तस्वीर 5 साल पुरानी है।

वायरल तस्वीर में क्या है?
तस्वीर में नदी में तैर रहे शवों के आसपास आवारा कुत्ते और कौवे इकट्ठा हैं। तस्वीर के साथ लिखा है यह बिहार के बक्सर जिले को दिखाता है जहां हाल ही में लगभग 71 अज्ञात शव निकाले गए। 

वायरल तस्वीर को हाल ही में बिहार और उत्तर प्रदेश में गंगा में मिले शवों के साथ जोड़ा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कोविड से हुई मौतों के बाद शवों को नदी में फेंक दिया गया। 

आप नेता ने भी फैलाया झूठ
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार गुप्ता ने भी इस तस्वीर को फेसबुक पर शेयर कर लिखा, बिहार के बक्सर और बीरपुर इलाकों में गंगा नदी में लगभग 500 शव तैरते देखे गए हैं। कई शव के साथ कोरोना किट्स भी हैं। करीब 30 किमी. के क्षेत्र में मिले ये शव यूपी और बिहार दोनों सरकारों की संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण हैं और सिस्टम पर बहुत बड़ा धब्बा है।

 

 

वायरल तस्वीर का सच?
वायरल तस्वीर का सच जानने के लिए गूगल के रिवर्स इमेज टूल का इस्तेमाल किया गया, जिससे पता चला कि तस्वीर साल 2015 की है। जब उत्तर प्रदेश में कानपुर और उन्नाव के बीच परियार के पास की है, जहां गंगा नदी में 100 से अधिक सड़ी-गली लाशें सामने आई थीं।

गेटी इमेज पर भी मौजूद है फोटो
गूगल पर तस्वीर के साथ कई आर्टिकल के लिंक भी मिले। एक तस्वीर ऐसी भी मिली, जिसमें गेटी का वॉटरमार्क था। गेटी पर पता चला कि इसे 13 जनवरी 2015 को लिया गया था। नदी के पास उड़ते गिद्धों और कौवे की दूसरी तस्वीर भी उसी घटना की है।  

कई न्यूज चैनल पर भी ये खबर मिली
इस घटना पर स्थानीय प्रशासन ने आरोप लगाया था कि ये वे शव थे जिन्हें नदी में विसर्जित किया गया था। कानपुर और उन्नाव दोनों प्रशासनों ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। एनडीटीवी ने भी इस खबर को कवर किया था। 

निष्कर्ष
ये सच है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में गंगा नदी में कुछ शव मिले हैं, जिससे बाद कानपुर में प्रशासन ने शवों को गंगा में प्रवाहित करने पर रोक भी लगा दी। लेकिन इस घटना के नाम पर साल 2015 की तस्वीर शेयर की जा रही है जो पूरी तरह से गलत है।

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