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'दियों से तेल निकालने वाली लड़की रोहिंग्या शरणार्थी है..' इस दावे के साथ वायरल तस्वीर का सच क्या है

सोशल मीडिया पर दिया जलाते हुए एक लड़की की तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर के साथ एक और तस्वीर है। दोनों को दिखाकर दावा किया जा रहा है कि अवैध रोहिंग्या लड़की की तस्वीर को अयोध्या की बताकर वायरल किया जा रहा है। लेकिन तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा झूठा है।

What is the truth of the claim that the girl who stole oil uring Diwali refugee
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New Delhi, First Published Nov 5, 2019, 6:03 PM IST
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नेशनल डेस्क. सोशल मीडिया पर दिया जलाते हुए एक लड़की की तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर के साथ एक और तस्वीर है। दोनों को दिखाकर दावा किया जा रहा है कि अवैध रोहिंग्या लड़की की तस्वीर को अयोध्या की बताकर वायरल किया जा रहा है। लेकिन तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा झूठा है।

वायरल न्यूज में क्या है?
वायरल तस्वीर में दो लड़कियों को दिखाया गया है। एक लड़की दिए में तेल डाल रही है, दूसरी में लड़की पेड़ के जरिए खड़ी है। तस्वीर के साथ लिखा है, "इस अवैध रोहींगया लड़की को वाम और सेकुलर गैंग ने एक षड़यंत्र के तहत अयोध्या पहुंचाया ज़िससे एक झूठा प्रोपेगैंडा फैलाया जा सके, अरे बेशर्मो तुम्हारा प्लान फेल हो गया।" यहां वायरल न्यूज में जो मैसेज वायरल हो रहा है उसे वैसे ही बिना हिंदी सही किए लिखा गया है। मनोज नाम के फेसबुक यूजर ने 31 अक्टूबर को तस्वीर पोस्ट किया, जिसपर 500 से ज्यादा लोगों ने कमेंट और शेयर किया।

वायरल फोटो की पड़ताल
- सबसे पहले पेड़ के सहारे खड़ी लड़की की फोटो की पड़ताल की गई। तस्वीर को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्चिंग की गई। तब पता चला कि गेटी इमेज पर यही फोटो दो साल पहले भी डाली गई थी। फोटो को केएम असद ने गेटी इमेज के जरिए एएफपी के लिए लिया था। फोटो के साथ लिखा है, "म्यांमार से बांग्लादेश के उखिया में 6 सितम्बर 2017 को आये नए शरणार्थियों को देखती एक लड़की। 125000 से ज्यादा शरणार्थी बांग्लादेश की सीमा में आ चुके हैं। इसमें अधिकतर रोहिंग्या हैं जो म्यांमार में अल्पसंख्यक मुस्लिम हैं।

- अब बात दूसरी तस्वीर की। इसे पहली बार 29 अक्टूबर 2019 के आसपास सोशल मीडिया पर देखा गया। इस तस्वीर को कई ट्विटर यूजर्स ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करते हुए दीवाली पर भव्य सजावट और लड़की की स्थिति बताते हुए इस्तेमाल किया। इस फोटो को रिवर्स इमेज सर्च से पता चला कि 29 अक्टूबर से पहले यह तस्वीर गूगल पर मौजूद नहीं है। हालांकि यह बच्ची कौन है इसका पता नहीं चला है। 

 

निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं दोनों लड़कियों की फोटो अलग-अलग है। पहली तस्वीर 2017 की है, जबकि दूसरी तस्वीर 29 अक्टूबर 2019 को सोशल मीडिया पर शेयर की गई। पड़ताल में यह भी पता चला कि इससे पहले यह तस्वीर गूगल पर मौजूद नहीं है।

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