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सिर्फ भारत ही नहीं अन्य देशों में मनाते हैं होली, जानिए वहां की परंपराएं और मान्यताएं

First Published Mar 25, 2021, 12:41 PM IST
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उज्जैन. होली एक ऐसा त्योहार है, जिसमें सभी लोग ऊंच-नीच, जाति-धर्म की दीवार तोड़कर सिर्फ मस्ती के रंग में रंग जाते हैं। सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में होली से मिलते-जुलते त्योहार मनाए जाते हैं। इन त्योहारों की मान्यताएं और परंपराएं भले ही अलग हो, मगर उद्देश्य एक ही होता है। होली (29 मार्च, सोमवार) के मौके पर जानिए किस देश में कैसे मनाया जाता है होली का त्योहार…

अमेरिका
अमेरिका में होली का त्योहार हैलोईन नाम से प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर की रात को मनाया जाता है। इस त्योहार में बच्चों की टोलियां सूर्यास्त के बाद खेलने-कूदने और मस्ती करने के लिए जमा हो जाती है। इस तरह होली का त्योहार सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व में किसी न किसी नाम व रूप में मनाया जाता है।
 

अमेरिका
अमेरिका में होली का त्योहार हैलोईन नाम से प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर की रात को मनाया जाता है। इस त्योहार में बच्चों की टोलियां सूर्यास्त के बाद खेलने-कूदने और मस्ती करने के लिए जमा हो जाती है। इस तरह होली का त्योहार सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व में किसी न किसी नाम व रूप में मनाया जाता है।
 

फ्रांस
फ्रांस के नारमंडी नामक स्थान में घास से बनी हुई मूर्ति को शहर में घुमाकर गाली तथा भद्दे शब्द बकते हुए आग लगा देते हैं। बच्चे हो-हल्ला करते हुए इसके चक्कर लगाते हैं।

फ्रांस
फ्रांस के नारमंडी नामक स्थान में घास से बनी हुई मूर्ति को शहर में घुमाकर गाली तथा भद्दे शब्द बकते हुए आग लगा देते हैं। बच्चे हो-हल्ला करते हुए इसके चक्कर लगाते हैं।

जर्मनी
ईस्टर के समय में पेड़ों को काटकर गाड़ दिया जाता है। उसके चारों ओर लकड़ी व घास का ढेर लगा देते हैं और उसमें आग लगा देते हैं। उस समय एक-दूसरे के मुंह पर रंग लगाते हैं और कपड़ों पर ठप्पा लगाकर हंसते हैं।

जर्मनी
ईस्टर के समय में पेड़ों को काटकर गाड़ दिया जाता है। उसके चारों ओर लकड़ी व घास का ढेर लगा देते हैं और उसमें आग लगा देते हैं। उस समय एक-दूसरे के मुंह पर रंग लगाते हैं और कपड़ों पर ठप्पा लगाकर हंसते हैं।

ईटली
ईटली में यह उत्सव फरवरी में रेडिका के नाम से मनाया जाता है। शाम को लोग तरह-तरह की वेश-भूषा में कार्निवल की मूर्ति को एक रथ में बैठाकर, गाते-बजाते जुलूस के रूप में निकलते हैं। यह जुलूस नगर के प्रमुख चौराहों से गुजरता हुआ शहर के मुख्य चौक पर पहुंचता है। वहां इकट्ठी की हुई सुखी लकडिय़ों को इस रथ में खड़ा करके इसमें आग लगा दी जाती है। इसके बाद सभी गाते व नाचते हैं।

ईटली
ईटली में यह उत्सव फरवरी में रेडिका के नाम से मनाया जाता है। शाम को लोग तरह-तरह की वेश-भूषा में कार्निवल की मूर्ति को एक रथ में बैठाकर, गाते-बजाते जुलूस के रूप में निकलते हैं। यह जुलूस नगर के प्रमुख चौराहों से गुजरता हुआ शहर के मुख्य चौक पर पहुंचता है। वहां इकट्ठी की हुई सुखी लकडिय़ों को इस रथ में खड़ा करके इसमें आग लगा दी जाती है। इसके बाद सभी गाते व नाचते हैं।

साइबेरिया
ग्रीष्म ऋतु के आगमन से पूर्व बालक घर-घर जाकर लकडिय़ां इकट्ठी करते हैं और आग लगा देते हैं। स्त्री-पुरुष एक-दूसरे का हाथ पकड़कर तीन बार अग्नि की परिक्रमा कर उसको लांघते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से वर्ष भर बुखार नहीं आता।

साइबेरिया
ग्रीष्म ऋतु के आगमन से पूर्व बालक घर-घर जाकर लकडिय़ां इकट्ठी करते हैं और आग लगा देते हैं। स्त्री-पुरुष एक-दूसरे का हाथ पकड़कर तीन बार अग्नि की परिक्रमा कर उसको लांघते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से वर्ष भर बुखार नहीं आता।

स्वीडन-नार्वे
सैंट जॉन की पवित्र तिथि पर लोग इकट्ठे होकर अग्नि क्रीड़ा महोत्सव करते हैं। शाम को किसी प्रमुख स्थान पर आग जलाकर लोग नाचते-गाते हैं और इसकी परिक्रमा करते हैं।

स्वीडन-नार्वे
सैंट जॉन की पवित्र तिथि पर लोग इकट्ठे होकर अग्नि क्रीड़ा महोत्सव करते हैं। शाम को किसी प्रमुख स्थान पर आग जलाकर लोग नाचते-गाते हैं और इसकी परिक्रमा करते हैं।

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