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ज्येष्ठ अमावस्या आज: शुभ फल पाने के लिए इस दिन क्या करें और क्या करने से बचें?

First Published Jun 10, 2021, 9:02 AM IST
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उज्जैन. आज (10 जून, गुरुवार) ज्येष्ठ अमावस्या है। इस तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है। इस अमावस्या पर शनि जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। श्रद्धालु इस दिन पवित्र जल में स्नान करके व्रत भी रखते है। इतना ही नहीं शनि जयंती और स्नान-दान के साथ-साथ महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखती हैं। इसलिए उत्तर भारत में तो ज्येष्ठ अमावस्या को विशेष रूप से सौभाग्यशाली एवं पुण्य फलदायी माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार गुरुवार का आने वाली अमावस्या शुभ फल देने वाली होती है। आगे जानिए इस अमावस्या पर क्या करें- क्या नहीं…
 

1. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। लेकिन महामारी के चलते घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर नहाने से उतना ही पुण्य मिलेगा।
 

1. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। लेकिन महामारी के चलते घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर नहाने से उतना ही पुण्य मिलेगा।
 

2. पूरे दिन व्रत या उपवास के साथ ही पूजा-पाठ और श्रद्धानुसार दान देने का संकल्प लें।
 

2. पूरे दिन व्रत या उपवास के साथ ही पूजा-पाठ और श्रद्धानुसार दान देने का संकल्प लें।
 

3. पूरे घर में झाडू-पौछा लगाने के बाद गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें।
 

3. पूरे घर में झाडू-पौछा लगाने के बाद गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें।
 

4. सुबह जल्दी पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं। पीपल और वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करें इससे दरिद्रता मिटती है।
 

4. सुबह जल्दी पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं। पीपल और वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करें इससे दरिद्रता मिटती है।
 

5. इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दान दें। माना जाता है कि अमावस्या के दिन मौन रहने के साथ ही स्नान और दान करने से हजार गायों के दान करने के समान फल मिलता है।
 

5. इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दान दें। माना जाता है कि अमावस्या के दिन मौन रहने के साथ ही स्नान और दान करने से हजार गायों के दान करने के समान फल मिलता है।
 

6. इस तामसिक भोजन यानी लहसुन-प्याज और मांसाहार से दूर रहें। किसी भी तरह का नशा न करें। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
 

6. इस तामसिक भोजन यानी लहसुन-प्याज और मांसाहार से दूर रहें। किसी भी तरह का नशा न करें। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
 

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