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गुप्त नवरात्रि में तंत्र सिद्धियां पाने के लिए तांत्रिक करते हैं देवी के इन 10 रूपों की पूजा

First Published Feb 12, 2021, 1:27 PM IST
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उज्जैन. माघ मास में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार ये साल की अंतिम नवरात्रि होती है। इस बार गुप्त नवरात्रि का आरंभ 12 फरवरी, शुक्रवार से हो रहा है, जो 21 फरवरी, रविवार तक रहेगी। गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस नवरात्रि में सिद्धियां पाने के लिए मां आदिशक्ति की दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। ये दस विद्याएं इस प्रकार है…

1. माता काली
दस महाविद्याओं में माता काली को प्रथम महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। ये साधक को समस्त सिद्धि प्रदान करने वाली हैं। सिद्धि प्राप्ति, विजय प्राप्ति आदि के लिए इनकी पूजा की जाती है।

1. माता काली
दस महाविद्याओं में माता काली को प्रथम महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। ये साधक को समस्त सिद्धि प्रदान करने वाली हैं। सिद्धि प्राप्ति, विजय प्राप्ति आदि के लिए इनकी पूजा की जाती है।

2. तारा देवी
इन्हें तांत्रिकों की मुख्य देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सर्वप्रथम महर्षि वशिष्ठ ने देवी तारा की आराधना की थी। इन्हीं की आराधना करके महर्षि वशिष्ठ ने सिद्धियां प्राप्त की थी।

2. तारा देवी
इन्हें तांत्रिकों की मुख्य देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सर्वप्रथम महर्षि वशिष्ठ ने देवी तारा की आराधना की थी। इन्हीं की आराधना करके महर्षि वशिष्ठ ने सिद्धियां प्राप्त की थी।

3. माता षोडशी या त्रिपुर सुंदरी
दस महाविद्याओं में से ये तीसरी महाविद्या हैं। माता त्रिपुर सुंदरी को ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी, राज राजेश्वरी भी कहा जाता है। इनकी आराधना करने से साधक को हर सफलता की प्राप्ति होती है।

3. माता षोडशी या त्रिपुर सुंदरी
दस महाविद्याओं में से ये तीसरी महाविद्या हैं। माता त्रिपुर सुंदरी को ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी, राज राजेश्वरी भी कहा जाता है। इनकी आराधना करने से साधक को हर सफलता की प्राप्ति होती है।

4. भुवनेश्वरी
माता भुवनेश्वरी को शताक्षी और शाकम्भरी के नाम से भी जाना जाता है। इनकी पूजा से साधक को सूर्य के तेज समान ऊर्जा की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति के लिए माता भुवनेश्वरी की आराधना बहुत शुभफलदायी मानी जाती है।

4. भुवनेश्वरी
माता भुवनेश्वरी को शताक्षी और शाकम्भरी के नाम से भी जाना जाता है। इनकी पूजा से साधक को सूर्य के तेज समान ऊर्जा की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति के लिए माता भुवनेश्वरी की आराधना बहुत शुभफलदायी मानी जाती है।

5. छिन्नमस्ता 
माता छिन्नमस्ता के स्वरूप में उनका मस्तक कटा हुआ है और एक हाथ में कटार तो दूसरे हाथ में कटा हुआ मस्तक है। इनके गले से रक्त की तीन धाराएं सुशोभित हो रही हैं। इन्हें प्रचंड चंडिका भी कहा जाता है ये साधक के उसकी उपासना के अनुसार दर्शन देती हैं।

5. छिन्नमस्ता 
माता छिन्नमस्ता के स्वरूप में उनका मस्तक कटा हुआ है और एक हाथ में कटार तो दूसरे हाथ में कटा हुआ मस्तक है। इनके गले से रक्त की तीन धाराएं सुशोभित हो रही हैं। इन्हें प्रचंड चंडिका भी कहा जाता है ये साधक के उसकी उपासना के अनुसार दर्शन देती हैं।

6. भैरवी
दसमहाविद्याओं में से ये छठी महाविद्या हैं। इनकी उपासना से साधक को सभी बंधनों से मुक्ति प्राप्त होती है। लोग ऐश्वर्य प्राप्ति, रोग-शांति, त्रैलोक्य विजय व आर्थिक उन्नति की बाधाएं दूर करने के लिए इनकी आराधना करते हैं।

6. भैरवी
दसमहाविद्याओं में से ये छठी महाविद्या हैं। इनकी उपासना से साधक को सभी बंधनों से मुक्ति प्राप्त होती है। लोग ऐश्वर्य प्राप्ति, रोग-शांति, त्रैलोक्य विजय व आर्थिक उन्नति की बाधाएं दूर करने के लिए इनकी आराधना करते हैं।

7. धूमावती
धूमावती माता की साधना से अभाव और संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। ये माता पार्वती का ही स्वरूप हैं। इनकी साधना तांत्रिकों द्वारा तो की ही जाती है। साधारण जन भी इनकी पूजा से कष्टों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

7. धूमावती
धूमावती माता की साधना से अभाव और संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। ये माता पार्वती का ही स्वरूप हैं। इनकी साधना तांत्रिकों द्वारा तो की ही जाती है। साधारण जन भी इनकी पूजा से कष्टों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

8. बगलामुखी
मां बगलामुखी स्तंभन की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी साधना से भय, शत्रु बाधा से मुक्ति पाप्त होती है। वाक् सिद्धि और राजनीतिक के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए इनकी आराधना की जाती है।

8. बगलामुखी
मां बगलामुखी स्तंभन की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी साधना से भय, शत्रु बाधा से मुक्ति पाप्त होती है। वाक् सिद्धि और राजनीतिक के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए इनकी आराधना की जाती है।

9. मातंगी
दस महाविद्याओं में से मां मातंगी नवीं महाविद्या हैं। शीघ्र विवाह, सुखी गृहस्थ जीवन की कामना से इनकी पूजा की जाती है। इनकी पूजा से गृहस्थ जीवन सुखमय होता है।

 

9. मातंगी
दस महाविद्याओं में से मां मातंगी नवीं महाविद्या हैं। शीघ्र विवाह, सुखी गृहस्थ जीवन की कामना से इनकी पूजा की जाती है। इनकी पूजा से गृहस्थ जीवन सुखमय होता है।

 

10. कमला देवी
ये परम सौभाग्य प्रदात्री हैं। मान्यता है कि इनकी उपासना से साधक को समृद्धि, धन, नारी, पुत्र की प्राप्ति होती है।

10. कमला देवी
ये परम सौभाग्य प्रदात्री हैं। मान्यता है कि इनकी उपासना से साधक को समृद्धि, धन, नारी, पुत्र की प्राप्ति होती है।

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