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फांसी से पहले दोषी के गांव में सन्नाटा; भाई ने कहा, मौत के बाद कौन देखेगा अक्षय के बीवी बच्चे?
औरंगाहबाद/पटना. दिल्ली में साल 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप के दोषियों की फांसी की तैयारी चल रही हैं। सात साल बाद 1 फरवरी 2020 को निर्भया के दरिंदों को सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। इस बीच चारों दोषियों के परिजन काफी परेशान और बौखलाए हुए नजर आ रहे हैं। निर्भया के चारों दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर के परिवार से एशियानेट न्यूज हिंदी ने बातचीत की। अक्षय ठाकुर के भाई ने मीडिया से बातचीत में कई खुलासे कर डाले साथ ही उसने फांसी के बाद भाई के बीवी-बच्चों के पालन-पोषण पर भी सवाल उठाए।
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निर्भया केस में चारों दोषियों के खिलाफ फांसी का फरमान जारी होने के बाद जहां पीड़िता के गांव में खुशी और जश्न का माहौल है। वहीं आरोपियों के गांव में सन्नाटा है। (अक्षय ठाकुर और उसका परिवार)
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निर्भया का एक दोषी अक्षय ठाकुर औरंगाबाद जिले के कर्मा लहंग गांव का है। यहां शांति छाई हुई है। उसके भाई विनय सिंह ने हमारे रिपोर्टर से फोन पर बात की। पहले पहल तो मीडिया का नाम सुनते ही दोषी का भाई भड़क गया बाद में शांति से उसने सारी बातें की।
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भाई ने कहा कि दोषियों की और उसके परिवार की सुनने वाला है कौन ? उसका गुस्सा कानून और पुलिस सब पर निकल रहा था। उसने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की। (अक्षय ठाकुर का परिवार)
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भाई ने बताया, "निर्भया केस में मेरे पिता सरयू सिंह और परिवार ने प्रशासन की पूरी मदद की। घटना के बाद मेरे पिता ने खुद अक्षय को सौंपा था। फिर भी प्रशासन ने मुझे मारा पीटा। (अक्षय ठाकुर की पत्नी)
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भाई ने बताया, "निर्भया केस में मेरे पिता सरयू सिंह और परिवार ने प्रशासन की पूरी मदद की। घटना के बाद मेरे पिता ने खुद अक्षय को सौंपा था। फिर भी प्रशासन ने मुझे मारा पीटा। (अक्षय ठाकुर की पत्नी)
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दोषी के भाई ने कहा कि, हम गरीब लोग हैं जो प्राइवेट वकील करके पैसा लगाकर अपने भाई को छुड़ा सकते इसलिए जो कर सकते थे किया। हमारे पास इतना रुपया पैसा ही नहीं है कि केस लड़ सकें।
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बता दें राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर की रात साल 2012 में चलती बस में गैंगरेप किया गया था। रेप के दौरान पीड़िता के शरीर को काटा गया और लोहे की रॉड डालकर उसकी अतड़िएं निकाल दी गईं। इसमें 6 आरोपी पकड़े गए थे। एक मुख्य आरोपी राम सिंह ने जेल में पश्चाताप के चलते आत्महत्या कर ली थी। बाकी एक को नाबागिल होने के कारण साल 2015 में छोड़ दिया गया।
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अब बाकी के चारों दोषियों को डेथ वारंट जारी होने के बाद फांसी दी जानी है। निर्भया की मां आशा देवी बेटी को न्याय दिलवाने के लिए पिछले सात साल से कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रही हैं।
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