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सेट पर चाय बेचने वाले के सवाल से हिल गए थे हिरानी, रोज जब तक एक सीन क्रिएट न हो नहीं लौटते थे घर
एंटरटेनमेंट डेस्क. साल 2006 में 1 सितंबर को रिलीज हुई फिल्म 'लगे रहो मुन्ना भाई' (Lage Raho Munna Bhai) को आज 16 साल पूरे होने जा रहे हैं। यह साल 2003 में आई फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' (Munna Bhai M.B.B,S) की फॉलोअप थी, जिसमें संजय दत्त (Sanjay Dutt) ने अंडरवर्ल्ड डॉन मुन्ना भाई का रोल प्ले किया था। दोनों ही फिल्मों ने दर्शकों को खूब हंसाया और हंसाते-हंसाते जबरदस्त मैसेज भी दिया। जहां पहली फिल्म मेडिकल साइंस और बाप-बेटे की रिश्ते पर आधारित थी। वहीं 'लगे रहो मुन्ना भाई' गांधी जी के विचारों और गांधीगिरी पर बेस्ड दी। फिल्म में संजय दत्त, अरशद वारसी (Arshad Warsi), बोमन ईरानी (Boman Irani) और जिम्मी शेरगिल (Jimmy Shergill) जैसे कई कलाकार पहले पार्ट से ही लिए गए थे। जबकि विद्या बालन (Vidya Balan) और दीया मिर्जा (Dia Mirza) समेत कई कलाकारों की नई एंट्री हुई थी। इस फिल्म की स्क्रिप्ट को लेकर राइटर-डायरेक्टर जकुमार हिरानी (Rajkumar Hirani) काफी वक्त तक सोच विचार करते रहे थे। इस खबर में हम आपको फिल्म के लिखे जाने से लेकर, शूट किए जाने और रिलीज होने तक के कई मजेदार किस्सों से रूबरू कराएंगे...

4 महीनों तक हर रोज एक सीन करते रहे क्रिएट
राजकुमार हिरानी ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर काफी वक्त तक काम किया। पहले इस फिल्म के लिए वकीलों पर आधारित एक कहानी लिखी गई थी। राजकुमार हिरानी इस स्क्रिप्ट से संतुष्ट नहीं थे इसके बाद उन्होंने लगातार 2 साल तक फिल्म पर काम किया। कहानी तो बदल गई पर ओरिजिनल स्क्रिप्ट से वकीलों वाले कुछ दृश्यों का भी इस फिल्म में इस्तेमाल किया गया। हिरानी ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर अपने दोस्त अभिजात जोशी के साथ मिलकर काम किया। वे दोनों करीबन 4 महीने तक हर रोज फिल्म के लिए एक सीन क्रिएट करते रहे। वे रोजाना घर से बाहर घूमने निकल जाते थे और जब तक कोई सीन क्रिएट न हो घर वापस नहीं लौटते थे। एक इंटरव्यू में हिरानी ने बताया था कि चूंकि इस फिल्म का पहला पार्ट बेहद सक्सेसफुल था इसलिए उनके ऊपर इस फिल्म को भी बेहतर बनाने का बहुत दवाब था। इस वजह से उन्हें स्क्रिप्ट फाइनल करने में काफी वक्त लगा।
सामने बैठे बोमन ईरानी को नहीं पहचान पाए लोग
फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले फैंस को सेट पर जाने की अनुमति थी। इस दौरान सभी लोग सेट पर बोमन ईरानी को ढूंढते रहे जिन्होंने इस फिल्म में लकी सिंह का रोल प्ले किया। मजेदार बात यह है कि बोमन उन सभी के सामने लकी सिंह के गेटअप में बैठे हुए थे पर सभी उन्हें पिछली फिल्म के किरदार डॉक्टर अस्थाना के रूप में खोज रहे थे।
जब एक बच्चे ने पूछा- 'महात्मा गांधी कौन हैं?'
राजू ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब फिल्म की शूटिंग शुरू हुई तो सेट पर एक चाय बेचने वाला बच्चा आया करता था। वह मुन्ना भाई का बड़ा फैन था और अक्सर फिल्म से जुड़े सवाल करता रहता था। एक दिन उसने हमसे फिल्म का टाइटल पूछा जिसके जवाब में हमने उसे बताया कि इस फिल्म का नाम 'मुन्ना भाई मीट्स महात्मा गांधी' (यह फिल्म की टेंटेटिव टाइटल था) है। इतना सुनकर वो बच्चा मुझसे बोला कि मुन्ना भाई तो ठीक हैं पर ये महात्मा गांधी कौन हैं? इस घटना से मैं बड़ा दुखी हुआ और मुझे बड़ा गहरा असर पड़ा कि आज की जनरेशन के बच्चे बापू के बारे में नहीं जानते। और सिर्फ यह बच्चा ही नहीं। कुछ दिन पहले एक टीवी शो पर मैंने देखा था कि कुछ नेताओं को यह नहीं पता था कि 2 अक्टूबर को क्या होता है। ऐसी कई वजहें थीं जिनके चलते मैंने इस फिल्म में गांधी जी के विचारों को प्रमुखता से दिखाया।
अरशद भूल गए थे अपना किरदार
फिल्म के पहले सीन में अरशद वारसी अपने किरदार के एक्सेंट को पकड़ ही नहीं पा रहे थे। इसके बाद राजकुमार हीरानी ने उन्हें 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की डीवीडी दी और उनसे अपने किरदार को फिर से तैयार करने के लिए कहा। अरशद के मुताबिक वह किसी भी किरदार को एक बार निभाने के बाद उसे भूल जाते हैं।
सुनील दत्त और आमिर खान करने वाले थे कैमियो
पहली फिल्म में संजय दत्त के पिता सुनील दत्त ने ही फिल्म में मुन्ना भाई के पिता का किरदार निभाया था। इस फिल्म में भी वे एक कैमियो रोल करने वाले थे पर फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही उनका निधन हो गया। फिल्म में आमिर खान का भी एक कैमियो रोल था पर बाद में इस किरदार को शूटिंग के दौरान ही हटा दिया गया था। बाद में 2014 में संजय दत्त और आमिर खान पहली बार राजकुमार हिरानी की फिल्म 'पीके' में ही साथ नजर आए थे।
क्या आपने फिल्म में अनुष्का शर्मा को नोटिस किया?
बहुत ही कम लोगों ने नोटिस किया होगा कि इस फिल्म में अनुष्का शर्मा भी नजर आई थीं। फिल्म के एक सीन में अनुष्का शर्मा का एक पोस्टर लगा हुआ नजर आता है। जबकि अनुष्का ने इस फिल्म के रिलीज होने के 2 साल बाद 2008 में फिल्म 'रब ने बना दी जोड़ी' से बॉलीवुड डेब्यू किया था। बाद में अनुष्का ने राजकुमार हिरानी की फिल्म 'पीके' और 'संजू' बायोपिक में भी काम किया।
जब बापू को नहीं पहचान पाए मुन्ना भाई
इसी फिल्म के सेट पर जब संजय दत्त ने महात्मा गांधी का किरदार निभाने वाले एक्टर दिलीप प्रभावलकर को बिना मेकअप के देखा तो वे उन्हें पहचान ही नहीं पाए। हैरानी की बात है कि संजय दत्त ने इस पूरी फिल्म में किसी भी सीन में दो से ज्यादा टेक नहीं लिए। फिल्म में अभिषेक बच्चन भी स्पेशल अपीयरेंस में नजर आए थे।
विद्या बालन ने आरजे के साथ बिताया वक्त
फिल्म में अपने किरदार की तैयारी करने के लिए विद्या बालन ने आरजे मलिश्का के साथ काफी वक्त बिताया। उन्होंने रेडियो जॉकी का एटीट्यूड और बोलने के तौर तरीकों के बारे में जाना। फिल्म का एक अहम सीन जिसमें विद्या बालन लीड एक्टर संजय दत्त का इंटरव्यू कर रही हैं, उसे शूट होने में 3 रातें लग गईं। ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि विद्या बालन के बाल ठीक तरह से सेट नहीं हो पा रहे थे।
जब बापू ने रुकवा दी थी स्क्रीनिंग
फिल्म में महात्मा गांधी का किरदार निभाने वाले दिलीप प्रभावलकर जब पुणे की एक बस में ट्रेवल कर रहे थे तो उन्होंने देखा कि बस में फिल्म की पायरेटेड वर्जन की स्क्रीनिंग की जा रहे हैं, जबकि फिल्म अभी भी थिएटर में लगी हुई थी। उन्होंने तुरंत इसकी स्क्रीनिंग रुकवाई और पुलिस को इनफॉर्म किया।
सामने आईं गांधीगिरी की कई घटनाएं
इस फिल्म के चलते गांधीगिरी शब्द बेहद चर्चा में आया और लोगों ने कई करप्ट ऑफिशल्स को फूल देना शुरू कर दिए। रियल लाइफ में भी देश भर से गांधीगिरी की कई घटनाएं सामने आए। कुछ ऐसा ही फिल्म के पहले पार्ट को देखने के बाद भी हुआ था। जब मेडिकल एग्जाम में कई मुन्नाभाई चीटिंग करते हुए पकड़े गए थे।
अचीवमेंट्स:
- मात्र 19 करोड़ रुपए में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 126 करोड रुपए कमा कर ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
- यह फिल्म अमेरिका में दिखाई जाने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी।
- 2007 में हुए ऑस्कर अवॉर्ड में प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा ने इस फिल्म को अकेडमी अवॉर्ड फॉर बेस्ट फॉरेन फिल्म के लिए इंडिपेंडेंट एंट्री के तौर पर भेजा था।
- 2007 में इस फिल्म को तेलुगु भाषा में 'शंकर दादा ज़िंदाबाद' के नाम से बनाया गया। फिल्म में चिरंजीवी ने लीड रोल प्ले किया और इसे डायरेक्ट किया प्रभु देवा ने।
- फिल्म ने कुल 70 नॉमिनेशन में से 32 अवॉर्ड अपने नाम किए। इसमें 4 नेशनल और 4 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी शामिल हैं। फिल्म में महात्मा गांधी का किरदार निभाने वाले दिलीप प्रभावलकर को बेस्ट सपोर्टिंग ऐक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। वहीं फिल्म ने बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइड होलसम इंटरटेनमेंट कैटेगरी में भी नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किया।
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