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वो हीरोइन जिसने 88 साल पहले First Time दिया था इतने मिनट का Kiss सीन, हैरान रह गई पूरी इंडस्ट्री
मुंबई. बॉलीवुड इंडस्ट्री में देविका रानी (Devika Rani) एक ऐसी एक्ट्रेस रही है, जिन्हें आसानी से भूलाया नहीं जा सकता। अपनी खूबसूरती और एक्टिंग के बल पर हर किसी को दीवाना करने वाली देविका की आज यानी 30 मार्च को बर्थ एनिवर्सरी है। उनका जन्म 1908 में विशाखापटनम में हुआ था। सिल्वर स्क्रीन पर देविका ने हर तरह के रोल प्ले किए। इतना ही नहीं उन्होंने उस वक्त स्क्रीन पर किसिंग सीन दिया था जब इस तरह के सीन करने को कोई हीरोइन सोचती भी नहीं थी। उस समय तो एक्ट्रेसेस स्क्रीन पर साड़ी या फिर सलवार सूट में ही नजर आई थी। कुछ ही फिल्मों में काम करने वाली देविका ने 1933 में किसिंग सीन देकर पूरी इंडस्ट्री को चौंका दिया था। आपको बता दें कि देविका ने फिल्मों में आने से पहले ही 1929 में फिल्ममेकर हिमांशु राय (Himanshu Rai) से शादी कर ली थी।

देविका रानी ने 1933 में फिल्म कर्मा से फिल्मों में डेब्यू किया। अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने बोल्डनेस की हदें पार कर दीं थीं। उस दौर में उन्होंने चार मिनट लंबा किसिंग सीन देकर सभी को हैरान कर दिया था। इससे पहले किसी भी फिल्म में इस तरह के किसिंग सीन नहीं दिखाए गए थे। इस फिल्म के प्रोड्यूसर हिमांशु राय थे।
इस सीन के बाद देविका की खूब आलोचना हुई और फिल्म को प्रतिबंधित भी कर दिया गया था। बाद में हिमांशु ने देविका से शादी कर ली। देविका और हिमांशु रॉय ने साथ मिलकर बॉम्बे टॉकीज नाम का स्टूडियो बनाया था, जिसके बैनर तले कई सुपरहिट फिल्में बनी थीं।
देविका रानी 9 साल की उम्र में ही पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड गईं थीं। वहां से उन्होंने रॉयल अकादमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट में एक्टिंग का कोर्स किया था। वो जर्मन सिनेमा से बहुत प्रभावित थीं और एक्ट्रेस मार्लिन डीट्रिच को काफी फॉलो करती थीं।
देविका रानी ने ही भारतीय सिनेमा को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाने का काम किया था। उनकी एक्टिंग की तुलना ग्रेटा गार्बो से की गई थी इसलिए उन्हें इंडियन गार्बो भी कहा जाता था। वे रवींद्रनाथ टैगौर के पड़पोती थीं। उनके पिता कर्नल एमएन चौधरी मद्रास के पहले सर्जन जनरल थे।
बता दें कि वे काफी गर्म मिजाज की थी इसलिए उन्हें ड्रैगन लेडी भी कहते थे। अपने 10 साल के करियर में देविका रानी ने महज 15 फिल्मों में काम किया था। 1936 में आई फिल्म अछूत कन्या में देविका ने एक दलित लड़की का किरदार निभाया था। इस फिल्म के बाद उन्हें फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन स्क्रीन की उपाधि दी गई थी।
दिलीप कुमार को इंडस्ट्री में लाने का श्रेय देविका रानी को ही जाता है। दिलीप डॉक्टर मसानी के साथ बॉम्बे टॉकीज के स्टूडियो गए थे जहां देविका रानी ने उनसे पूछा था कि क्या वो एक्टर बनना चाहते हैं। इसके लिए आपको 1250 रुपए महीने की सैलरी मिलेगी। इसके बाद उन्होंने दिलीप कुमार को अशोक कुमार से मिलवाया और कहा कि इस लड़के को एक्टर के रूप में भर्ती कर लो। उन दिनों राज कपूर महज 170 रुपए में काम कर रहे थे।
1940 में हिमांशु रॉय का निधन हो गया और देविका रानी ने बॉम्बे टॉकीज का कार्यभार संभाला था। इस स्टूडियो से पुनर्मिलन और किस्मत जैसी सफल फिल्में बनीं। फिल्में बनाने के साथ-साथ उनके मन में एक्टिंग करने को लेकर भी कश्मकश चल रही थी।
जब वो दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा के प्रोडक्शन पर काम कर रहीं थी तो उनकी मुलाकात स्वेतोस्लाव रॉरिक से हुई। देविका अपनी आखिरी फिल्म के डिजाइन के लिए स्वेतोस्लाव रॉरिक के स्टूडियो गईं। वहीं उनकी मुलाकात दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई। फिर दोनों ने शादी कर ली और देविका ने बॉम्बे टॉकीज बंद कर दिया। 9 मार्च 1994 में देविका रानी का निधन हो गया।
देविका ने जवानी की हवा, जीवन नैया, जन्मभूमि, सावित्री, जीवन प्रभात, इज्जत, प्रेम कहानी, निर्मला, वचन, दुर्गा, अन्जान, हमारी बता जैसी फिल्मों में काम किया।
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