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बॉलीवुड में चलता है इन 12 खानदानों का दबदबा, कई दशकों से इंडस्ट्री पर राज करते आ रहे हैं ये लोग
मुंबई। सुशांत राजपूत की खुदकुशी के बाद से ही बॉलीवुड में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है। अब तक रवीना टंडन, शेखर कपूर, कंगना रनोट, अभिनव कश्यप और साहिल खान जैसे सेलेब्स नेपोटिज्म को लेकर अपनी-अपनी बात रख चुके हैं। कुछ सेलेब्स ने तो नेपोटिज्म पर खुलकर सलमान खान का नाम लिया है। वैसे, इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता कि बॉलीवुड में कुछ 'खानदानों' का दबदबा रहा है। इनमें कपूर खानदान से लेकर कई परिवार हैं। इस पैकेज में हम बता रहे हैं बॉलीवुड के कुछ ऐसे ही खानदानों के बारे में।

सलीम खान ने करियर की शुरुआत बतौर एक्टर 1960 में फिल्म 'बरात' से की थी। उन्होंने करीब 14 फिल्मों में बतौर एक्टर काम किया और इसके बाद स्क्रिप्ट राइटिंग करने लगे।
कपूर खानदान की शुरुआत तो वैसे राजकपूर के पिता स्वर्गीय पृथ्वीराज कपूर से मानी जाती है। उन्हीं के नाम पर पृथ्वी थिएटर बना था। हालांकि बाद में उनके बेटों राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर ने इसे आगे बढ़ाया।
अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर ने बतौर प्रोड्यूसर 1972 में आई फिल्म शहजादा से करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों को प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया।
आमिर खान के पिता ताहिर हुसैन ने बतौर प्रोड्यूसर 1971 में फिल्म कारवां से करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने कई फिल्में बनाईं। तीन फिल्मों में उन्होंने बतौर एक्टर काम किया है।
धर्मेन्द्र को बॉलीवुड में 6 दशक हो चुके हैं। हालांकि अब वो फिल्मों से दूर हैं, लेकिन उनके बच्चे एक्टिव हैं। धर्मेन्द्र ने करियर की शुरुआत 1960 में आई फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से की थी।
काजोल की नानी शोभना ने करियर की शुरुआत 40 के दशक में की थी। उन्होंने बाद में डायरेक्टर कुमारसेन समर्थ से शादी कर ली। उनके बाद उनकी दोनों बेटियां नूतन और तनुजा भी फिल्मों में आ गईं।
जितेन्द्र ने करियर की शुरुआत 60 के दशक में की थी। उनकी पहली फिल्म 'नवरंग' थी लेकिन बतौर एक्टर उन्हें पहचान 1964 में आई 'गीत गाया पत्थरों ने' से मिली।
राजेश खन्ना के करियर की शुरुआत भी 60 के दशक में हुई थी। उनकी पहली फिल्म 'आखिरी खत' थी, जो 1966 में आई थी। हालांकि उन्हें पहचान 1969 में आई मूवी 'आराधना' से मिली थी।
यश चोपड़ा और उनके भाई बीआर चोपड़ा ने कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया। इनमें धूल के फूल, दाग, सिलसिला, चांदनी, लम्हे, डर, दिल तो पागल है, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और वीर-जारा प्रमुख हैं। वहीं बीआर चोपड़ा ने मशहूर सीरियल महाभारत भी बनाया।
डेविड धवन ने बतौर डायरेक्टर करियर की शुरुआत 1989 में आई फिल्म 'ताकतवर' से की। उनकी आखिरी फिल्म 'कुली नंबर 1' है, जिसे उन्होंने बेटे वरुण धवन और सारा अली खान के साथ बनाया है।
शर्मिला टैगोर ने भी करियर की शुरुआत 60 के दशक में बंगाली फिल्मों से की थी। उनकी पहली हिंदी फिल्म 1964 में आई 'कश्मीर की कली' थी।
फिल्म इंडस्ट्री में रोशन खानदान की शुरुआत राकेश रोशन के पिता रोशन लाल नागरथ से मानी जाती है। वो म्यूजिक कम्पोजर थे। उन्होंने 50 के दशक में करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने बावरे नैन, मल्हार, अनहोनी, चांदनी चौक, बरसात की रात, दिल ही तो है, चित्रलेखा और बहू बेगम जैसी फिल्मों में म्यूजिक दिया है।
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