लॉकडाउन-1 में भारतीय इकोनॉमी को 8 लाख करोड़ का झटका, अब 2.0 की बारी
नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की घोषणा की थी। जिसका एक चरण अब पूरा हो गया है वहीं अब लॉकडाउन को और प्रभावी ढंग लागू करने के लिए 3 मई तक बढ़ा दिया गया है। लेकिन इस लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार अर्थव्यवस्था पर पड़ी है।
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एक अनुमान के अनुसार 21 दिनों के लॉकडाउन में देश की इकोनॉमी को 7-8 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा है।
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इस लॉकडाउन के दौरान अधिकतर कंपनियां बंद रहीं, उड़ान सेवाएं निलंबित रहीं और ट्रेनों के पहिए भी जहां के तहां थमे रहे।
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बता दें कि कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया था।
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ऐलान के बात 25 मार्च से भारत की 70 फीसद आर्थिक गतिविधियां थम गई हैं।
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लॉकडाउन के दौरान केवल जरूरी सामान एवं कृषि, खनन, यूटिलिटी सेवाओं और कुछ वित्तीय एवं आइटी सेवाओं के परिचालन के लिए ही अनुमति दी गई है।
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सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च ने कहा है कि भारत में महामारी ऐसे समय में आई है, जब देश की अर्थव्यवस्था में रिकवरी के संकेत नजर आ रहे थे।
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इस महामारी से उपजे संकट की वजह से ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्तरां और रियल एस्टेट गतिविधियां सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।
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Acuite Ratings & Research Ltd ने अनुमान जताया है कि लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को हर दिन करीब 4.64 अरब डॉलर यानी 35,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
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