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10 साल की उम्र में सड़क किनारे बेचे अंडे, अकले पाला पूरा परिवार, अब करोड़पति है ये शख्स
उदयपुर: आप शहर में घूमते हैं तो सड़क किनारे लगे ठेलों पर लाजवाब स्ट्रीट फूड जरूर चखते होंगे। ऐसा भी होता है जब आपको किसी फाइव स्टार महंगे होटल से भी ज्यादा स्वादिष्ट और टेस्टी खाना खाने को मिल जाता है। किसी के हाथों का स्वाद चख आप सोचते होंगे अरे इसे तो किसी बड़े होटल में खाना बनना चाहिए। ऐसे ही एक स्ट्रीट फूड वेंडर ने अपने संघर्ष से फाइव स्टार होटल के शेफ बनने तक का सफर तय किया। ये कहानी है उदयपुर के एग किंग जय कुमार वलेचा (Jay Kumar Valecha)की। जय कुमार बहुत छोटी उम्र से सड़क किनारे लॉरी (स्टॉल) लगाकार अंडा भुर्जी का ठेला चला रहे थे लेकिन अब वो एक फाइव स्टार होटल के शेफ से खुद के कई रेस्टोरेंट के मालिक हैं। उन्होंने अपने बचपन से लेकर कामयाबी तक की पूरे संघर्ष की कहानी साझा की।
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दोस्तों कुकिंग में भी शानदार करियर के मौके हैं। मास्टर शेफ बन छात्र अच्छे पैकेज पर काम कर सकते हैं। जिन्हें कुकिंग पसंद है वो होटल मैनेजमेंट या कुकिंग के कोर्स कर इसमें बढ़िया करियर बना सकते हैं लेकिन इसके लिए आपमें जज्बा और जुनून होना चाहिए। कुकिंग का शौक रखने वाले छात्रों को हम आज एक शेफ के संघर्ष की कहानी सुना रहे हैं।
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राज्सथान के उदयपुर में जय कुमार एक गरीब परिवार के साथ किराए के मकान में रहते थे। उनका परिवार इतना गरीब था कि घर के सभी लोग कुछ न कुछ काम करके पैसा कमाने में लगे हुए थे। जय के पिता अंडे बेचते थे। ठेला लगाकर अंडे बेचना ही उनकी रोजी-रोटी थी। उसमें जो बिक्री होती उसी से घर का खर्च चलता था। गरीबी की वजह से जय सिर्फ चौथी क्लास तक ही पढ़ा पाए। हालांकि वो चाहते थे कि वो पढ़े और बिजनेसमैन बनें।
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जय पिता के साथ मात्र 10-12 साल की उम्र से ठेले पर काम करने लगे। उनके पिता ने उन्हें अंडा बेचने, ओमलेट और एग भुर्जी बनाना सिखाया था। पिता डायबिटीज के कारण बीमार रहने लगे तो जय को काम संभालना पड़ा। परिस्थियां ऐसे बनी कि 12 साल की छोटी उम्र में बीमार पिता, माता, भाई-बहनों और पूरे परिवार की जिम्मेदारी जय के कंधों पर आ गई। इस दौरान वो एक पहाड़ी को चढ़कर ठेला लगाने जाते थे। ये पहाड़ी पार करना ही बड़ा मुश्किल होता था।
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समय बीता और जय ठेले पर काम करने लगे। उन्होंने सोचा कुछ तो नया करके अपना बिजनेस बढ़ाना होगा। ऐसे उन्होंने नई डिशेज क्रिएट की और लोगों के बीच पहचान बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने अंडे के साथ प्रयोग किए और नई डिशेज बनाई। देखते ही देखते उनके हाथ का स्वाद और डिशेज काफी फेमस हो गईं। ऐसे में उन्हें विदेशी टूरिस्ट भी जानने लगे। उदयपुर में जय के एग भुर्जी का डंका बजने लगा।
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फिर क्या? उनकी बनाई अंडे की नई डिश का स्वाद लेने लोग उनके ठेले में आने लगे। ग्राहकों का विश्वास उन पर बढ़ता गया। उन्होंने उदयपुर में ‘The Egg World’ नाम से अपना एक रेस्टोरेंट खोल लिया, जो दिन-दूनी रात-चौगुनी बढ़ता चला गया। उनकी ख्याति इतनी बढ़ गई कि लोग उन्हें ‘उदयपुर का एग किंग’ कहने लगे। देश-विदेश के पर्यटक और शूटिंग के लिए उदयपुर आये फ़िल्मी सितारे भी उनके यहां की डिश का स्वाद लेने आने लगे हैं।
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एक वो समय भी आया जब जय का ताज जैसे हाई-फाई फाइव स्टार में खाना बनाने का सपना भी पूरा हुआ। जय कुमार ने अपनी किस्मत मास्टर शेफ इंडिया के सीजन 4 में आजमाई और लेवल २ तक पहुंचे थे। मीडिया में उनकी कहानी पब्लिश हुई तो जय और फेमस हो गए। आज जय कुमार का बिजनेस दुनियाभर में मशहूर है और वो उदयपुर के रहीश और सेलेब्रिटी लोगों में शुमार हैं।
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एक सड़क किनारे ठेला चलाने वाले इस वेंडर से हाई-फाई शेफ का सफर काफी दिलचस्प रहा है। जय कुमार के नन्हें कंधे भले ही उतने मजबूत ना थे, पर सपने बड़े थे, हौसले बुलंद थे और जिंदगी में कुछ बड़ा कर गुजरने का ज़ज्बा दिल में भरा पड़ा था। उसी ज़ज़्बे के बदौलत सड़क किनारे ठेले पर अंडा भुर्जी बेचने वाला मामूली सा लड़का इतना सक्सेजफुल है। उनकी पत्नी आज 12 लाख की महंगी गाड़ियों में घूमती हैं। जय खुद पूरे देश में अपने एग किंग रेस्टोरेंट की कई फ्रेंचाइजी खोल चुके हैं।
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