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दिन में उठाता था दूसरों की जूठी प्लेट्स, रात में सिर्फ पढ़ाई, IAS अफसर बन वेटर ने रचा इतिहास
नई दिल्ली. देश में हुनर और काबिलियत की की कमी नहीं है लेकिन गरीबी और मुश्किलें रास्ते का पत्थर बन जाती हैं। कुछ के पास हुनर होता है और जज्बा भी लेकिन सुविधाएं नहीं होती हैं जिससे वो उस काबिलियत का परचम लहरा दें। पर कुछ लोग ठान लेते हैं और मुश्किलों में भी आसमान में नाम लिख देते हैं। ऐसे ही एक वेटर की कहानी हम सुना रहे हैं जो होटल में दूसरों की जूठन उठाया करता था लेकिन एक कड़ी मेहनत से देश का बड़ा अफसर बन गया।
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इस अफसर की कहानी इतनी दिलचस्प है कि किसी को भी हौसला देख गुमान हो जाए कि हमारे देश में ऐसे हिम्मती युवा हैं। (दूसरी तस्वीर प्रतीकात्मक तौर पर इस्तेमाल की गई है)
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के. जयागणेश ने तमिलनाडु के एक गरीब परिवार में पैदा हुए हैं। जयागणेश के पिता गरीब थे, लेदर फैक्टरी में सुपरवाइजर का काम कर हर महीने सिर्फ चा या साढ़े चार हजार तक ही कमा पाते थे। परिवार में अक्सर पैसों में कमी रहती थी। बेटा भी गरीबी से जूझ रहा था।
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चार भाई-बहनों में जयागणेश सबसे बड़े थे ऐसे में बसे बड़े होने के कारण घर की खर्च की जिम्मेदारी भी उन पर ही थी। बता दें, वह शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे थे। 12वीं में उनके 91 प्रतिशत अंक आए थे। फिर उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी, नौकरी भी मिली लेकिन उन्होंने उससे कुछ बड़ा ही करने का सोचा।
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इसके बाद उन्हें चेन्नई में सरकारी कोचिंग के बारे में मालूम चला जहां आईएएस की कोचिंग की तैयारी करवाई जाती है। तैयारी करने के लिए ये चेन्नई चले गए, वहां एक सत्यम सिनेमा हॉल के कैंटीन में बिलिंग ऑपरेटर के तौर पर काम मिल गया। जिसके बाद उन्हें इंटरवल के वक्त उन्हें वेटर का काम करना पड़ता था। वे दूसरों की झूठी प्लेट्स उठाते थे, यहां कई बार कस्टमर उनके साथ बदसलूकी भी करते थे। उन्होंने बताया मुझे मेरा बस एक ही मकसद था। कैसे भी करके IAS ऑफिसर बनना चाहता हूं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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उन्होंने बताया, उनके गांव के अधिकतर बच्चे 10वीं तक ही पढ़ाई कर पाते थे और कई बच्चों को तो स्कूल का मुंह ही देखना नसीब नहीं होता था। जयगणेश बताते हैं, कि उनके गांव के दोस्त ऑटो चलाते हैं या शहरों में जाकर किसी फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। अपने दोस्तों में वह इकलौते थे जो यहां तक पहुंचे थे। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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IAS ऑफिसर बनने के लिए जयागणेश ने यूपीएससी की पढ़ाई की। लगातार मेहनत करने से सफलता मिलती है। ये जयागणेश ने ही साबित कर दिखाया है। 1, 2 नहीं बल्कि 6 बार यूपीएससी की परीक्षा में फेल होने के बाद उन्हें 7वीं बार सफलता हासिल हुई और 156वीं रैंक हासिल की। आज उनके हाथों में झूठी प्लेट्स नहीं कंप्यूटर था।
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जयागणेश ने काफी मेहनत से पढ़ाई की, फिर भी पांचवी बार में सफलता हासिल नहीं कर पाए। आगे पढ़ाई करने के लिए पैसे की कमी बहुत ज्यादा आड़े आ रही थी। अपनी जेब खाली देख उन्होंने यूपीएससी की तैयारी कराने वाले एक कोचिंग में सोशियोलॉजी पढ़ाना शुरू कर दिया। अपने छठे प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा तो पास कर ली लेकिन इंटरव्यू पास करने से चूक गए। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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छठीं बार असफल होने के बाद भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। जिसके बाद उन्होंने 7वीं बार यूपीएससी की परीक्षा दी। जब वे 7वीं बार परीक्षा में बैठे तो प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू भी पास कर गए। उन्हें 7वीं बार में 156वां रैंक मिल गई। जिसके बाद जयागणेश को लगा आखिकार एक लंबे युद्ध को जीत लिया है। आपको बता दें, जयागणेश के पास इंटेलिजेंस ब्यूरो में ऑफिसर की नौकरी का ऑफर था लेकिन उनकी जिद IAS ऑफिसर बनने की थी और वह बन भी गए। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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