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लाखों की नौकरी ठुकराकर बनी IPS....लेडी सिंघम ने आधी रात को गाड़ी दौड़ा दौड़ाकर बदमाशों को पकड़ा

First Published Apr 7, 2020, 11:06 AM IST
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नई दिल्ली. कहते हैं जिस घर में बेटी पैदा होती है वहां लक्ष्मी निवास करती हैं। बेटियां पढ़ लिखकर माता-पिता का नाम रोशन करती हैं। उनकी कड़ी मेहनत से पूरे परिवार की जय-जयकार होती है। ऐसे ही राजस्थान के चित्तौड़ की एक लेडी सिंघम है उनके हौसले और जज्बे ने पिता का मान बढ़ा दिया। एमबीए करने के बाद भी भी इस उसने पुलिस अफसर बनने की ठानी। IAS, IPS सक्सेज स्टोरी में हम आपको राजस्थान की महिला IPS के संघर्ष की कहानी सुना रहे हैं। 

राजस्थान राज्य के रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की एक ऊर्जावान इंस्पेक्टर ललिता खींची एक साहसी अफसर हैं। सारे ऑफिसर उनकी सच्चाई और कठोर परिश्रम की प्रशंसा करते नहीं थकते। दोपहर तीन बजे की चिलचिलाती धूप हो या एक बजे की अंधेरी रात, यह मेहनती ऑफिसर हमेशा अपने ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात रहती हैं।

राजस्थान राज्य के रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की एक ऊर्जावान इंस्पेक्टर ललिता खींची एक साहसी अफसर हैं। सारे ऑफिसर उनकी सच्चाई और कठोर परिश्रम की प्रशंसा करते नहीं थकते। दोपहर तीन बजे की चिलचिलाती धूप हो या एक बजे की अंधेरी रात, यह मेहनती ऑफिसर हमेशा अपने ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात रहती हैं।

राजस्थान राज्य के रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की एक ऊर्जावान इंस्पेक्टर ललिता खींची एक साहसी अफसर हैं। सारे ऑफिसर उनकी सच्चाई और कठोर परिश्रम की प्रशंसा करते नहीं थकते। दोपहर तीन बजे की चिलचिलाती धूप हो या एक बजे की अंधेरी रात, यह मेहनती ऑफिसर हमेशा अपने ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात रहती हैं।  ललिता कोई साधारण ऑफिसर नहीं है क्योंकि उनके पास बहुत सारी चमकती डिग्रियां भी हैं। एमबीए की डिग्री के साथ अगर वह चाहतीं तो कॉरपोरेट जगत की नौकरी कर विलासिता की ज़िंदगी शानदार ढंग से जी सकती थीं परंतु उन्होंने हमेशा भीड़ से हटकर एक अलग करिअर को पसंद किया।

राजस्थान राज्य के रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की एक ऊर्जावान इंस्पेक्टर ललिता खींची एक साहसी अफसर हैं। सारे ऑफिसर उनकी सच्चाई और कठोर परिश्रम की प्रशंसा करते नहीं थकते। दोपहर तीन बजे की चिलचिलाती धूप हो या एक बजे की अंधेरी रात, यह मेहनती ऑफिसर हमेशा अपने ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात रहती हैं। ललिता कोई साधारण ऑफिसर नहीं है क्योंकि उनके पास बहुत सारी चमकती डिग्रियां भी हैं। एमबीए की डिग्री के साथ अगर वह चाहतीं तो कॉरपोरेट जगत की नौकरी कर विलासिता की ज़िंदगी शानदार ढंग से जी सकती थीं परंतु उन्होंने हमेशा भीड़ से हटकर एक अलग करिअर को पसंद किया।

अपने विश्वास को साबित करने के लिए कि महिलाएं किसी भी कठिन परिस्थिति को भी संभाल सकती है और चुनौती भरी भूमिका भी निभा सकती है; उन्होंने यह करिअर चुना। ललिता ने राजस्थान स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में इंस्पेक्टर के पद पर आसीन हुई जहाँ दिन और रात किसी भी समय गाड़ियों की सरप्राइज चेकिंग की जाती थी। रोडवेज बस ऑपरेटर्स कहते हैं कि उन्होंने उन्हें रात के दो बजे भी  सरप्राइज चेकिंग के लिए मुस्तैद खड़े देखा है। उनके रहते कोई भी गलत सामान अपनी गाड़ी में नहीं ले जा सकता था।

अपने विश्वास को साबित करने के लिए कि महिलाएं किसी भी कठिन परिस्थिति को भी संभाल सकती है और चुनौती भरी भूमिका भी निभा सकती है; उन्होंने यह करिअर चुना। ललिता ने राजस्थान स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में इंस्पेक्टर के पद पर आसीन हुई जहाँ दिन और रात किसी भी समय गाड़ियों की सरप्राइज चेकिंग की जाती थी। रोडवेज बस ऑपरेटर्स कहते हैं कि उन्होंने उन्हें रात के दो बजे भी सरप्राइज चेकिंग के लिए मुस्तैद खड़े देखा है। उनके रहते कोई भी गलत सामान अपनी गाड़ी में नहीं ले जा सकता था।

उदयपुर डिपो में वह असिस्टेंट ट्रैफिक इंस्पेक्टर के पद पर आसीन हैं। वह अपने डिपार्टमेन्ट के लिए अपने आप में अनूठे व्यक्तित्व की स्वामिनी रही हैं और अपने सभी महिला ऑफिसर के लिए एक रोल मॉडल की तरह हैं । उनका काम दिल्ली, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात और दूसरे राज्यों की सड़कों से आने वाली सभी गाड़ियों तक रहता है। अपने काम करने के अपने बिंदास तरीके, सख्त दृष्टिकोण और कठिन मेहनत से उन्होंने एक नया नाम पाया है -लेडी सिंघम

उदयपुर डिपो में वह असिस्टेंट ट्रैफिक इंस्पेक्टर के पद पर आसीन हैं। वह अपने डिपार्टमेन्ट के लिए अपने आप में अनूठे व्यक्तित्व की स्वामिनी रही हैं और अपने सभी महिला ऑफिसर के लिए एक रोल मॉडल की तरह हैं । उनका काम दिल्ली, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात और दूसरे राज्यों की सड़कों से आने वाली सभी गाड़ियों तक रहता है। अपने काम करने के अपने बिंदास तरीके, सख्त दृष्टिकोण और कठिन मेहनत से उन्होंने एक नया नाम पाया है -लेडी सिंघम

ललिता अपनी नौकरी के लिए सबसे युवा और ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं। इसके साथ-साथ काम के प्रति उनकी लगन ही उन्हें निडर रवैया देती है। अभी हाल में ही उन्होंने एक दिन में 46 बस ऑपरेटर्स के खिलाफ रिपोर्ट किया। डिपार्टमेंट के अनुसार एक महीने में 20 रिपोर्ट काफी अच्छा प्रदर्शन माना जाता है। परन्तु ललिता उन सबसे काफ़ी आगे निकल चुकी है। शासन प्रबंध के जनरल मैनेजर राकेश राजौरिया कहते हैं कि ललिता के जैसा पूरे जिले में कोई नहीं है। उन्होंने कभी भी किसी भी चेकिंग के आर्डर को नहीं ठुकराया चाहे वह सुबह के चार बजे हों या देर रात हो। यह सभी रोडवेज़ कर्मचारियों के लिए एक उदाहरण पेश करती हैं।

ललिता अपनी नौकरी के लिए सबसे युवा और ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं। इसके साथ-साथ काम के प्रति उनकी लगन ही उन्हें निडर रवैया देती है। अभी हाल में ही उन्होंने एक दिन में 46 बस ऑपरेटर्स के खिलाफ रिपोर्ट किया। डिपार्टमेंट के अनुसार एक महीने में 20 रिपोर्ट काफी अच्छा प्रदर्शन माना जाता है। परन्तु ललिता उन सबसे काफ़ी आगे निकल चुकी है। शासन प्रबंध के जनरल मैनेजर राकेश राजौरिया कहते हैं कि ललिता के जैसा पूरे जिले में कोई नहीं है। उन्होंने कभी भी किसी भी चेकिंग के आर्डर को नहीं ठुकराया चाहे वह सुबह के चार बजे हों या देर रात हो। यह सभी रोडवेज़ कर्मचारियों के लिए एक उदाहरण पेश करती हैं।

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